मकर संक्रांति पर यहां लग रहे हैं मेले, आप शामिल हो रहे हैं न

मकर संक्रांति पर यहां लग रहे हैं मेले, आप शामिल हो रहे हैं न

Rajesh Kumar Pandey | Publish: Jan, 14 2018 01:51:09 PM (IST) Damoh, Madhya Pradesh, India

सतसूमा और गौमुखधाम पंडोन नदी लगेगा मेला

दमोह/ मडिय़ादो. मकर संक्रांति पर्व को लेकर पूरी तैयारी लोग कर चुके हंै, जिले सहित ग्रामीण अंचलों में लोग रविवार को मकर संक्रांति पर धार्मिक स्थलों पर पहुंच कर आस्था की डुबकी लगाएंगे। इसके लिए शनिवार से ही श्रद्धालु धार्मिक धार्मिक स्थलों पर पहुंचना शुरू हो गए हैं। मडिय़ादों के नजदीक ही कुछ स्थान ऐसे हैं जहां प्रतिवर्ष इस अवसर पर लोगों की काफी भीड़ एकत्र होती है और इन धार्मिक स्थानों पर पहुंचकर लोग आस्था की डुबकी लगाते हैं। तहसील हटा में सतसूमा, झारखंडी, गौमुख, सिद्ध स्थल बमीठा, रामकुंड़ के अलावा जिले की वार्डर के पर छतरपुर जिला के जटाशंकर धाम, मौनाशैया, झारखंडी और पांडोन में पहुंच कर आस्था लोग मकर संक्रांति पर पहुंचते हैं।
क्या है यहां खास
सबसे पहले हम हटा से मडिय़ादो रूट की बात करें तो यहां कांटी गांव के समीप सुनार नदी में एक कुंड सतसूमा घाट के नाम से प्रसिद्ध है, यहां प्रतिवर्ष संक्रांति पर्व पर एक दिन का मेला भरता है। यहां बताया जाता है कि सतसूमा का कुंड भीषण गर्मियों में भी किसी ने सूखा नहीं देखा यहां के गहराई के बारे में बुर्जग बताते हैं कि यहां बहुत पुराना तीर्थ स्थल है, यहां नदी में जो कुंड है उसकी गहराई नापने के लिए कभी सात सुमेड़ी बांध कर डाली गई थीं, फिर भी तली का पता नहीं चला था। यहां सन 1505ईं का पत्थर लगा हुआ है जिसमें खिलजी राजा नासिरशाह का नाम लिखा है। यहां संक्रांति पर्व पर बुड़की लगाने हजारों की संख्या मेें श्रद्धालू जमा होते है।

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झारखंडी - यहां बारह मासी जलस्रोत है, बटियागढ़ ब्लॉक अंर्तगत भिलोनी गांव के समीप खड़ेरा माता के मंदिर और जटाशंकर किला के समीप यहा एक चट्टान से पानी की धार निकलती रहती है। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालू पहुंच कर बुड़की लगाने के साथ पिकनिक मनाते हैं। इस स्थल की खासबात यह है कि जंगली क्षेत्र होने के कारण यहां बंदरों की संख्या भी अधिक है।
गौमुखधाम-मडिय़ादो से महज तीन किमी दूरी पर पश्चिम दिशा में एक जंगली कुंड की गौमुखधाम से पहचान होती है। यहां बजरंगबली का मंदिर आस्था का केन्द्र है। त्योहार पर अक्सर लोग बड़ी सख्या में पहुंच कर आंनद लेते हंै संक्रांति पर यहा सैकड़ों लोग पहुंचते है।
जोगीदंण की गुफा-जिले की सीमा से लगे छतरपुर जिला के जंगल में छतरपुर के रावतपुरा गांव के समीप जोगीदंण गुफा एक रहस्य है, यहां गुफा के अंदर चट्टान से पानी रिस कर शिवलिंग पर निरंतर गिरता है। इस प्वाइंट तक पहुंचना काफी कठिन है, लेकिन लोग आस्था के चलते यहां पहुंचते हैं। कुछ ही दूरी पर प्रसिद्ध तीर्थ स्थल जटाशंकर धाम और मौनासैया भी यहां है जहां कई जिलों के लोग पहुंचते हैं और यहां के अनोखों रहस्यों से वाकिफ होते हैं।

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प्रकृति सौंदर्य व आस्था का अद्भुत संगम है जोगन कुंड
बनवार. जबेरा तहसील का सिद्धधाम जोगन कुंड में प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी संक्रांति का मेला भरा जाएगा। इसके अलावा तहसील क्षेत्र के कुछ अन्य स्थानों पर भी प्रतिवर्षानुसार मेले का आयोजन किया जाएगा, जिसकी तैयारियां पूरीं हो चुकीं हैं। बताया गया है कि सिद्धधाम में १५ दिवसीय मेले का आयोजन किया जाएगा। जिसमें जिले से भारी संख्या में श्रद्धालु हर वर्ष पहुंचते हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार शून्य नदी में यहां संक्रांति की डुबकी लगाकर लोग संक्रांति पर्व मनाते हैं व यहां स्थित शिव मंदिर में भगवान भोलेनाथ के दर्शन का धर्म लाभ प्राप्त करते हैं। इसी तरह से जमनेरा तालाब के समीप शंकर गढ़ प्राचीन शिव पार्वती धाम है। यहां एक दिवसीय मेला का आयोजन किया जाता है। वहीं क्षेत्र के घटेरा के सिद्ध धाम चुड़का सहित जबेरा बनवार अंचल में एक दिवसीय मेला का आयोजन किया जाता है।
इन सभी स्थलों में क्षेत्र के जोगनकुंड व मतक कुंड प्रमुख आकर्षण का केंद्र माने जाते हैं। दरअसल यहां का प्राकृतिक सौंदर्य लोगों का मन मोह लेता है। यहां स्थित मटक कुंड में काफी आर्कषक जलप्रपात है जो काफी मनमोहक है। यहां पर्वत श्रखंला से गिरती जलधारा के सौंदर्य को निहारने के लिए यहां दूर दूर से लोग पहुंचते हैं। जलप्रपात के कुंड से निकली जल धारा पर्वत श्रृंखला से प्रवाहित होती हुई जोगनकुंड धाम पहुंचती है। यहां भगवान श्रीराम लक्ष्मण जानकी, महाकाली, संकट मोचन हनुमान की भव्य प्रतिमा के साथ यज्ञ शाला प्रमुख धार्मिक आस्था के केंद्र है। यहां बारह महीने लोगों का आना जाना बना रहता है।

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