scriptMining the forest and revenue land | वन व राजस्व भूमि को खनन से कर रहे खोखला | Patrika News

वन व राजस्व भूमि को खनन से कर रहे खोखला

नदी में उत्खन कर निकाले बोल्डर, राजस्व भूमि से खोदी मुरम बन गई सड़क

दमोह

Published: August 22, 2021 10:40:01 pm

दमोह. जिले की वन व राजस्व भूमि से मुरम का खनन किया जा रहा है, वहीं नदियों से बोल्डर व पत्थर निकाला जा रहा है। यह सामग्री लाखों रुपए की लागत से बन रही सड़कों के लिए निकाली जा रही है। जिससे शासन से तो ठेकेदार पाई-पाई वसूल रहे हैं, वहीं अवैध उत्खनन व खनन से शासन को करोड़ों का चूना लगा रहे हैं। दमोह जिले में राजस्व व वन भूमि को खनन से खोखला कर दिया गया है।
आंजनी से फुटेरकला, सरिया व बटियागढ़ तक सड़क का निर्माण किया जा रहा है। इस सड़क के निर्माण में सबसे बड़ी खामी यह देखी गई है कि जूड़ी नदी के बीचों-बीच उत्खनन कर बोल्डर निकाले गए हैं, वह सीधे डाल दिए गए हैं, जबकि इस सड़क निर्माण में मानक स्तर की गिट्टी का प्रयोग किया जाना था। इसके अलावा गीदन गांव के पास राजस्व भूमि से मुरम खोदकर डाली गई है। सड़क का पुराव से लेकर साइड सोल्डर तक अवैध मुरम का प्रयोग किया जा रहा है। आंजनी से बटियागढ़ तक बन रही इस सड़क के संबंध में कई शिकायतें की गईं हैं। निर्माणाधीन पुलिया भी धंसक रही हैं, लेकिन निर्माण एजेंसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
बोल्डर से गायब हो जाएगा डामर
सड़क निर्माण के तकनीकी जानकारों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि डामर सड़क के लंबे समय तक टिके रहने के लिए मानक स्तर का मटेरियल निर्धारित किया गया है, जो मेजर मेंट में उल्लेखित रहता है। सड़क के पुराव के लिए मुरम व मिट्टी की मात्रा के साथ ही जीरा गिट्टी व बोल्डर गिट्टी की मानक साइज निर्धारित है। यदि सड़क में गिट्टी जगह नदी के बोल्डरों का उपयोग किया गया है तो सड़क के ऊपर से डामर शीघ्र निकल जाएगा और नीचे के बोल्डर नजर आने लगेंगे जिससे लोगों को बोल्डर वाली सड़क पर चलने में असुविधा होगी।
सीसी सड़क निर्माण में नदी की बजरा रेत
दमोह जिले की समस्त ग्राम पंचायतों में सीमेंट कांक्रीट रोड व नाली निर्माण किया गया है, इस कार्य में मानक रेत के बजाए नदी व नालों की बजरा मिली रेत का उपयोग किया गया है। इस तरह की बजरा मिली रेत का निर्माण शहरी क्षेत्र की सीसी रोड के बनाने में भी किया गया है, जिस कारण से सड़कें शीघ्र खराब हो गई है। कई सड़कों का नामोनिशान भी मिट गया है, तकनीकी जानकारों का दावा है कि मानक रेत ही सीमेंट को अच्छी तरह पकड़ती है यदि रेत मेें कंकड़ पत्थर जिसे बजरा रेत कहते हैं वह इस्तेमाल होती है तो शीघ्र ही सीमेंट पकड़ छोड़ देता है और सड़क खराब हो जाती है।
वन भूमि को भी किया खोखला
मुरम व पत्थर के लिए वन भूमि को भी खोखला किया जा रहा है। सरकारी निर्माण में लागत से अधिक की राशि के टेंडर होते हैं। लेकिन निर्माण एजेंसी अवैध रूप से वन, राजस्व, नदियों से खनन कर सामग्री जुटा लेते हैं। वर्तमान में कई सड़कों का निर्माण किया जा रहा है। इसके साथ निर्माण एजेंसी के क्रशर प्लांट भी लगे हैं, जहां भी रा मटेरियल वन भूमि से ही अवैध खनन के माध्यम से उपलब्ध कराया जा रहा है जिस पर कोई रोक टोक नहीं हो रही है।
तीन विभागों के फेर में कार्रवाई
वन, राजस्व व खनिज विभाग मिलाकर तीन विभाग होते हैं। जिन्हें कार्रवाई करना चाहिए, लेकिन वन विभाग में होने वाले खनन की नुकसानी का पीओआर नहीं काटा जाता है, जिसमें वनरक्षक, रेंजरों की मिली भगत होती है। राजस्व भूमि पर क्षेत्र के पटवारी व आरआइ की मिली भगत से कार्रवाई नहीं होती है। खनिज विभाग को शिकायत मिलने पर भी कार्रवाई नहीं होती है, जिससे दमोह जिले की वन, राजस्व व नदियां खनन से खोखली किए जाने का सिलसिला जारी है।
Mining the forest and revenue land
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