MP Elections 2018 हर व्यक्ति को बदलना होगी अपनी सोच- डॉ. नीलम

MP Elections 2018 हर व्यक्ति को बदलना होगी अपनी सोच- डॉ. नीलम

Laxmi Kant Tiwari | Publish: Sep, 16 2018 11:11:39 AM (IST) Damoh, Madhya Pradesh, India

अंतराष्ट्रीय कवियत्री और वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. प्रेमलता नीलम की कलम से

दमोह. व्यक्ति को अपनी सोच बदलना चाहिए। चाहे वह साहित्यकार हो, संगीतकार हो, या चित्रकार समाज किस तरह से इस स्थान पर पहुंचपाएगा और समाज में व्याप्त विकृतियां हैं उनको दूर कैसे कर पाएगा, इसके लिए आवश्यक है, श्रेष्ठ साहित्य और दार्शनिक पुस्तकों के अध्ययन की। समाज सुधारकों ने जो संदेश व शिक्षा दी है। उनको दोहराने की। क्योंकि आज की जो युवा पीढ़ी है। साहित्य व संस्कृति को भूलती चली जा रही है। संस्कृति व संस्कार का पतन न हो इसलिए साहित्य वार्ताएं प्रतियोगिताएं, काव्य गोष्ठियां, सभी विषयों को लेकर आयोजित की जाना चाहिए। ताकि वरिष्ठ लोगों से युवा पीढ़ी कुछ सीख सके। आज के परिवेश में नेट पर बहुत सी एतिहासिक दार्शनिक, साहित्यक, सामग्री पढऩे मिलती है। उस पर भी मनन व चिंतन किया जाए। इतना ध्यान रखा जाए कि उन नेट की कविताओ को कभी अपने नाम पर समाज के सामने पेश न करे। बल्कि उसमें जो सामािजिक सुधार है शिक्षा के क्षेत्र को उत्कृष्ठ करने का संदेश है। या व्यंग्य के माध्यम से राजनैतिक क्षेत्र में भी प्रस्तुत करे ताकि साहित्य ही समाज का दर्पण है यह साबित कर सके। क्योंकि हिंदी ही हमारी राष्ब्ट्र भाषा है। और संपूर्ण विश्व में परचम फैलारही है। और भी आगे बढ़े यह जन-जन की अभिलाषा है। मेरा उद्देश्य है कि बच्चों की सृजनात्मकता एवं कल्पना शीलता का विकास हो। और हमारी ङ्क्षहदी भाषा जन जन के विकास की आधारशिला बने।
रापजनीति की दृष्टि से हम इतना ही कहेंगे कि अपने क्षेत्र के विकास का राजनेता ध्यान रखेंगे तो निश्चित ही वह बार-बार विजय प्राप्त करेंगे। क्योंंकि जनता हर नेता को बेहतर ढंग से पहचान जाती है। चुनाव जीतने के बाद क्षेत्र में विकास करना उसकी पहली प्राथमिकता होना चाहिए। खास तौर से युवा पीढ़ी के भविष्य को ध्यान में रखकर उसे विशेष ध्यान देना चाहिए। साहित्य के क्षेत्र में भी गंभीतरता बरतने की जरुरत है।
आज शहर में वाचनालयों की अधिकता नहीं है। करीब 70 साल पुरानी बाल विनोद स्कूल में स्थित वाचनालय भी जीर्णशीर्ण हो चुकी है। जहां पर लोग जाने से भी कतराने लगे हैं। उसकी ओर भी गंभीरता से ध्यान देने की जरुरत है। जिससे लोग साहित्य से जुड़े रहें। वहां पर स्थानीय साहित्यकारों की रचनाएं होना भी आवश्यक है। जिससे उन्हें साहित्य के प्रति साहित्य पढ़कर रुझान बढ़ सके। इसके लिए जनप्रतिनिधियों को भी ध्यान देना जरुरी है।

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