हर साल बढ़ रही जिला अस्पताल में प्रसव कराने वाली महिलाओं की संख्या

वर्ष 2019 में अब तक का सर्वाधिक रिकॉर्ड दर्ज, हुईं सर्वाधिक 8 हजार डिलेवरी

By: lamikant tiwari

Published: 06 Jan 2020, 10:23 PM IST

दमोह. जिले भर में वर्ष २०१९ ने में भले ही अन्य क्षेत्रों में कोई रिकॉर्ड न बन सका हो, लेकिन प्रसव के मामले में अब तक का सर्वाधिक रिकॉर्ड दर्ज किया गया है।
जिला अस्पताल में प्रसव कराने के लिए सुविधाओं का विस्ता होने के बाद लोग घरों में प्रसव कराने से बेहतर अब जिला अस्पताल का सहारा लेते देखे जा रहे हैं।
वर्ष कुल हुए प्रसव सीजर
२००८ ४४७८ १३०
२००९ ४८३४ ३५८
२०१० ५४०४ ३८५
२०११ ५५३६ ६३०
२०१२ ५३८३ ४१४
२०१३ ६००३ ८४२
२०१४ २६१० १११२
२०१५ ६३८८ १११०
२०१६ ६२९६ ९४४
२०१७ ६४९८ १०११
२०१८ ७२११ १०१०
२०१९ ७८२० १३०५
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जिला अस्पताल में हुए सर्वाधिक प्रसव-
-बीते सालों का रिकॉर्ड तोड़ते हुए वर्ष २०१९ में जिला अस्पताल में सर्वाधिक प्रसव हुए हैं। जिससे स्पष्ट है कि महिलाओं का रुझान जिला अस्पताल में प्रसव कराने की ओर हुआ है। बीते तीन सालों में वर्ष २०१६ में जिला अस्पताल में ६ हजार २९६ प्रसव हुए थे। लेकिन वर्ष २०१७ में यह संख्या बढ़कर ६४५७ पहुंच गई थी। इसके बाद वर्ष २०१८ में ७२११ रिकॉर्ड दर्ज किए गए। लेकिन वर्ष २०१९ में दर्ज ७८२० ने अब तक के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए।

अलग से शिफ्ट हुआ पूरा भवन -
जिला अस्पताल में चार वर्ष पूर्व एमसीएच भवन तैयार किया गया। जिसमें मैटरनिटी वार्ड की स्थापना करने के साथ वहां अलग-अलग वार्ड तैयार कर उसमें प्रसूताओं की व्यवस्था की गई। साथ ही प्राइवेट वार्डों का विस्तार भी करते हुए लोगों को सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।

अलग से बनाया स्पेशल वार्ड -
जिला अस्पताल में पहले की अपेक्षा ऑपरेशन थियेटर के अलावा भी एक एचडीयू हाई डिपेंडेंसी यूनिट की स्थापना हुई है। जहां पर कोई भी गर्भवती महिला जो गंभीर स्थिति में होती है उसका ट्रीटमेंट होने के साथ एचडीयू वार्ड में ही कम्माईंड बने ऑपरेशन थियेटर में प्रसव कराया जाता है। प्रसव के बाद उसे उसी जगह शिफ्ट करके पूरा ध्यान रखते हुए इलाज किया जाता है।

बढ़ गया सीजर ऑपरेशन का आंकड़ा -
महिलाओं की पूर्व में जिला अस्पताल में सीजर कराने की जगह निजी अस्पताल पहली पसंद होती थी। लेकिन बीते सालों में जिला अस्पताल में सुविधाएं बढऩे के बाद अब सीजर कराने वालों ने भी रिकॉर्ड बनाया है। जिला अस्पताल में वर्ष २०१८ की अपेक्षा वर्ष २०१९ में नया रिकॉर्ड बना है। जिसमें सीजर कराने वाली महिलाओं की संख्या १३०५ दर्ज की गई। जबकि वर्ष २०१८ में यह संख्या १०१० दर्ज की गई थी।
सुविधाओं में किया इजाफा -
जिला अस्पताल में मैटरनिटी वार्ड में पूर्व की अपेक्षा अब स्टॉफ दोगुना हो चुका है। महिला डॉक्टरों की संख्या भी बढ़ चुकी है। चौबीस घंटे उपचार हो रहा है। वार्ड संख्या व पलंग संख्या भी बढ़ी है। सीजर भी लगातार दिन रात किए जा रहे हैं। इसके अलावा हर वार्ड में निजी अस्पतालों की तरह सुविधाएं दी जा रहीं हैं। इसलिए लोगों का रुझान बढ़ा है।
डॉ. दिवाकर पटैल - आरएमओ

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