दमोह शीशपुर पटी के बारेलाल को पाकिस्तान ने किया रिहा

अटारी बार्डर पर सौंपा भारत सरकार को

 

By: Rajesh Kumar Pandey

Updated: 27 Jun 2021, 10:29 PM IST

दमोह. दमोह के नोहटा थाना क्षेत्र के शीशपुर पटी गांव का बारेलाल आदिवासी जो मानसिक रोगी है, वह साढ़े चार से लापता था, करीब 17 माह पहले पाकिस्तान की कैद में होने की खबर गांव पहुंची थी। तब से उसकी रिहाई के प्रयास किए जा रहे थे। भारत सरकार पर दवाब बनाने के लिए दमोह में मुहिम छेड़ी गई थी। जिसके फलस्वरूप अटारी बार्डर के माध्यम से बारेलाल को भारत सरकार के सुपुर्द किया गया था। जो अब अपने गांव पहुंच गया है।
शीशपुर पटी गांव का बारेलाल 10 वीं कक्षा में फेल हो गया था। फेल होने का टेंशन उसके दिमाग में बना था। वह गांव के युवाओं के साथ दिल्ली मजदूरी करने गया था। 2006 में तबियत बिगड़ी उसके बाद अपना दिमागी संतुलन खो बैठा था। फरवरी 2017 में परिजनों को बिना बताए गायब हो गया था। परिजनों ने काफी खोजने के बाद नोहटा थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस और परिजन खोजबीन करते रहे। आशा की किरण तब जगी जब 14 नवंबर 2019 को बारेलाल बहावलपुर में यजमन पुलिस द्वारा पकड़ लिया गया। तब से वह बहावलपुर की जेल में था। बताया जा रहा है कि 21 जून को अटारी बार्डर पर पाकिस्तान ने बारेलाल को भारत सरकार के सुपुर्द कर दिया था। जिसे अमृतसर की मजीठा थाना रोड रेडक्रास सोसायटी के सुपुर्द किया गया था। 24 जून को नोहटा पुलिस के आरक्षक आलोक भारद्वाज व पिता सुब्बी आदिवासी व भाई पदम सींग अमृतसर के मजीठा थाना रोड स्थित रेडक्रास सोसायटी के कार्यालय पहुंचे थे। जहां मजीठा तहसीलदार वीर करन सिंह व पटवारी जसमीत सींग के साथ रेडक्रास सोसायटी के सदस्यों ने बारेलाल की सुपुर्दगी दी।
पिता को 5 मिनट लगे पहचानने में
बारेलाल की पहचान कराने के लिए पिता सुब्बी को जब भेजा गया तो अपने दिलो दिमाग में अपने दुबले पुतले पुत्र की तस्वीर संजोय पिता ने अपने सामने एक हठ्ठा-कठ्ठा पठानी सूट में बारेलाल को देखा तो देखते हुए वह यह कह नहीं पाए कि यही उनका बारेलाल है, जब नजदीक से हाथ पांव देखे तब उन्होंने कहा यही बारेलाल है।
पिता जी नहीं कहा नाम बताया
मजीठा तहसीलदार ने बारेलाल से कहा कि सामने जो खड़े हैं उन्हें पहचानते हो तो उसने सीधे नाम सुब्बी बताया। इसके बाद बड़े भाई को भी नाम से पहचान गया। जिसके बाद करीब एक घंटे की सुपुर्दगी कार्रवाई के बाद पिता के सुपुर्द बारेलाल कर दिया और सभी अमृतसर से दमोह की ओर रवाना हो गए।
जहां लगाए थे पेड़ वहां बन गई नर्सरी
बारेलाल के दोस्त भागचंद ने बताया कि जब उसका मानसिक संतुलन खराब हो गया तो उस पर नर्सरी लगाने का जुनून सवार हो गया था। उसने जिस जगह पेड़ लगाए थे, जो आज बड़े हो गए हैं, उसी जगह वन विभाग ने प्लांटेशन किया है और एक वन रोपणी तैयार हो गई है।
पाकिस्तान तक बनवाना चाह रहा था पुल
बारेलाल के मित्र सोनू सेन का कहना है कि जब उसका मानसिक संतुलन खराब हुआ तो वह दोस्तों के साथ बैठता था तो यही रट लगाता था कि वह पाकिस्तान जाएगा। वह शीशपुर पटी से नोहटा तक पुल बनवाएगा फिर नोहटा से पाकिस्तान तक पुल बनाकर वहां पैदल जाएगा। सोनू की माने तो बारेलाल ने कागज पर नक्शा बनाकर भी दिखाया था कि ऐसे शीशपुर पटी से नोहटा और नोहटा से पाकिस्तान का पुल बनेगा। बारेलाल पाकिस्तान तक पुल तो नहीं बनवा पाया लेकिन 5 माह पैदल चलकर पाकिस्तान जरूर पहुंच गया। सोनू से बारेलाल कहता था कि उसके गांव में एक दिन उससे मिलने मीडिया आएगी, बारेलाल की यह बात भी सच साबित हो गई है।
घर और गांव में खुशी का माहौल
बारेलाल के वापस आने की खुशी घर के साथ गांव में भी है। सभी पड़ोसी व गांव वाले बारेलाल को देखने पहुंच रहे हैं। वह उससे हालचाल भी पूछ रहे हैं। बारेलाल किसी को भी कुछ नहीं बता रहा है, क्योंकि जबसे उसका मानसिक संतुलन बिगड़ा है वह बहुत ही कम बात करता है। अब परिजनों को खुशी के साथ इस बात की भी चिंता है कि कहीं बारेलाल फिर न भाग जाए। इसलिए पिछले दो दिन से घर वालों के अलावा बारेलाल जहां भी बाहर निकल रहा है गांव वाले भी निगाह रखे हुए हैं।
पाकिस्तानी पहनावा और प्रोडक्ट लाया
अपने गांव पहुंचे बारेलाल के पास बोलने बताने के लिए पाकिस्तानी यादें तो ज्यादा नहीं हैं, लेकिन वह पाकिस्तानी पहनावे पठानी शूट पहन रहा है, जिसके पास पाकिस्तान से दिए दो शूट, खाने पीने के अलावा रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए पाकिस्तान प्रोडक्ट हैं, जिन्हें वह साथ लेकर आया है।
पत्रिका ने चलाई थी मुहिम
दमोह बारेलाल को भारत वापस बुलाने के लिए पत्रिका ने लगातार मुहिम चलाई थी। जिसमें दमोह जिले के संगठनों ने भी अपनी भूमिका निभाई थी। केंद्रीय राज्यमंत्री प्रहलाद सिंह पटेल द्वारा भी विदेश मंत्रालय से पत्राचार किया था। छात्र क्रांति संगठन द्वारा प्रधानमंंत्री के नाम पत्र लिखा था। जिसके बाद वहां से भी पत्राचार किया गया था। जिसमें बताया गया था कि पाकिस्तान सरकार से लगातार चर्चा चल रही है। जिससे बारेलाल के रिहा होने की उम्मीद बढऩे लगी थी। भारत सरकार पर भी लगातार दवाब बढ़ रहा था। वहीं मानसिक रूप से कमजोर होने के कारण बारेलाल गलती से पाकिस्तान की सीमा में प्रवेश कर गया था। जिससे बारेलाल के वापस आने की उम्मीद बंधी थी।

 
Rajesh Kumar Pandey Desk
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned