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दमोह

मालवाहक से ढोईं जा रहीं थीं सवारियां, अचानक पलटा वाहन, १ की मौत १३ जख्मी

जिले में एक बार फिर सवारियों से भरा मालवाहक हादसे का शिकार हो गया। पथरिया थाना क्षेत्र के जेरठ पुलिस चौकी अंतर्गत मंगलवार सुबह एक पिकअप मालवाहक अनियंत्रित होकर पेड़ से टकरा गया। हादसे के वक्त मालवाहक में करीब 15 लोग सवार थे।

दमोहJul 03, 2024 / 11:16 am

pushpendra tiwari

दमोह/ पथरिया. जिले में एक बार फिर सवारियों से भरा मालवाहक हादसे का शिकार हो गया। पथरिया थाना क्षेत्र के जेरठ पुलिस चौकी अंतर्गत मंगलवार सुबह एक पिकअप मालवाहक अनियंत्रित होकर पेड़ से टकरा गया। हादसे के वक्त मालवाहक में करीब 15 लोग सवार थे। जिनमें से एक बुजुर्ग की मौत हो गई। जबकि करीब दर्जनभर लोग घायल हुए हैं। सभी को पथरिया सीएचसी ले जाया गया। जहां से गंभीर घायलों को जिला अस्पताल रेफर किया गया है। यह हादसा जेरठ चौकी अंतर्गत आने वाले सगौनीकलां गांव के पास हुआ। जानकारी के अनुसार पिकअप मालवाहक में सवार सभी लोग भांजी के लगनोत्सव कार्यक्रम में पथरिया ब्लॉक के बोबई गांव से बिजावर गए थे। कार्यक्रम के बाद सभी लोग वापस उसी पिकअप मालवाहक से वापस गांव लौट रहे थे। मंगलवार सुबह जैसे ही वाहन सगोनीकलां गांव के पास पहुंचा, तो बेकाबू होकर सड़क किनारे लगे पेड़ से टकरा गया। इसमें पुन्ने उर्फ कन्नू पुत्र दशरथ बंसल उम्र 60 वर्ष की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि दर्जन भर लोग घायल हो गए। हादसे के बाद चीख पुकार मच गई। पुलिस को सूचना मिलने पर जेरठ चौकी प्रभारी आनंद सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। इसके बाद सभी घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। मृतक बुजुर्ग का शव भी पथरिया सीएचसी भेजा गया। यहां पर पुलिस ने पंचनामा बनाया। पोस्टमार्टम के बाद मृतक का शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया है। पुलिस पूरी घटना को लेकर जांच में जुटी हुई है।
6 गंभीर घायलों को जिला अस्पताल भेजा

इस हादसे में करीब दर्जन भर लोग घायल हुए। जिनमें हुकुम पिता गणपत, दामोदर पिता लक्खे बंसल, हल्ले पिता गणपत, गोलू पिता हल्के बंसल, सौरभ पिता रामप्रसाद, रतई पिता गणपत, संतोष पिता हल्के, दिशा पिता सेवाराम, भारत पिता हल्के, लखन पिता गणपत, लब्बो पिता नन्ना और भागीरथ पिता मोहन बंसल शामिल हैं। जानकारी के अनुसार इनमें से आधा दर्जन गंभीर रूप से घायल हुए हैं। जिन्हें जिला अस्पताल रेफर किया गया है।
मालवाहकों से सवारी ढोने पर नहीं होती कार्रवाई

मालवाहकों का उपयोग सामान परिवहन के लिए ही किया जा सकता हैए लेकिन जिले में नियम और सुरक्षा ताक पर रखकर मालवाहकों का सवारी वाहनों के तौर पर जमकर उपयोग हो रहा है। ऐसे में अक्सर हादसे होते हैं। कहने को परिवहन विभाग और पुलिस की नजरों के सामने से ही सवारियों से भरे मालवाहक गुजर रहे हैंए लेकिन जिम्मेदारों द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। इस संबंध में पत्रिका ने समय समय पर खबरें प्रकाशित कर आगाह भी किया, लेकिन न तो मालवाहक संचालकों ने सबक लिया और न ही प्रशासन ने संज्ञान लिया।
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लायसेंस निरस्त फिर भी जारी है आतिशबाजी बिक्री का खेल

दमोह. पर्यावरण प्रदूषण को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ग्रीन पटाखों को छोड़कर बेरियम पटाखों सहित अन्य खतरनाक आतिशबाजी की सामग्री पर प्रतिबंध प्रतिबंधित कर दी थी। इधर जिला प्रशासन कुछ माह पहले शहर की एक पटाखा फैक्ट्री विस्फोट घटना के बाद जिले भर के तकरीबन सभी आतिशबाजी लायसेंस निरस्त कर दिए थे। इसके बाद भी जिले में प्रतिबंधित आतिशबाजी सामग्री का धड़ल्ले से आज भी उपयोग हो रहा रहा है। शहर में ही कार्यक्रमों में प्रतिबंधित आतिशबाजी का खूब उपयोग हो रहा है। लोग बेखौफ होकर आतिशबाजी कर रहे हैं। बता दें कि अक्टूबर 2023 में बड़ा पुल क्षेत्र में हुई पटाखा फैक्ट्री विस्फोट से सबक लेते हुए जिला प्रशासन ने पटाखा व्यापारियों के गोदामों आदि की व्यापाक जांच कराई थी। इस दौरान पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम न होने और गाइडलाइन का उल्लंघन होने पर कलेक्टर ने 34 व्यापारियों के आतिशबाजी लायसेंस निरस्त कर दिए थे। यह कार्रवाई अब से करीब साढ़े तीन माह पहले हुई थी। उम्मीद की जा रही थी कि अब प्रतिबंधित आतिशबाजी सामग्री पर पूर्णत: रोक लग जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जिले में लगातार प्रतिबंधित आतिशबाजी सामग्री की लगातार उपयोग हो रहा है। जिला प्रशासन जहां आतिशबाजी लाइसेंस निरस्त करने तक, तो वहीं पुलिस अवैध पटाखा सामग्री के खिलाफ गिनी चुनी कार्रवाई करने तक सीमित रही। इसके बाद से आतिशबाजी का जमकर उपयोग हो रहा है, लेकिन कार्रवाई नहीं हो रही। इसके अलावा कुछ सवाल उठ रहे हैं, मसलन शहर समेत जिले भर में प्रतिबंधित आतिशबाजी सामग्री कहां से आ रही है। यदि जिले में ही इसका निर्माण हो रहा है, तो कौन और कहां कर रहा है। इन तमाम सवालों के जवाब जिम्मेदार अधिकारियों के पास नहीं हैं। जिम्मेदार इन सवालों के जवाब खोजकर कार्रवाई की पहल भी नहीं कर रहे। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का आदेश हो या फिर जिला प्रशासन का आतिशबाजी लाइसेंस निरस्त करना, इन सबका जमीन पर कोई असर नहीं दिख रहा। मामले में सीएसपी अभिषेक तिवारी ने कहा कि आतिशबाजी की बिक्री यदि शहर में हो रही है, तो पता कर कर्रिवाई की जाएगी।

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