कागजों में बंद पड़ी नल जल योजनाओं को बताया जा रहा चालू, उधर गांवों में लोग पानी के लिए परेशान

नलजल योजना से मिलने लगा पेयजल

दमोह. जिले की अधिकांश सभी ग्राम पंचायतों में नलजल योजना के तहत पाइप लाइन बिछाई गई और पानी की टंकियों का निर्माण कराया गया था। योजना पर शासन द्वारा जिले में करोड़ों रुपए की राशि खर्च की गई। लेकिन इसका फायदा पचास फीसदी ग्रामीणों को भी नहीं हो सका है। कहीं पाइप लाइन अधूरी पड़ी है तो कहीं पर मोटर पंप खराब है। उधर योजना के ठप होने के कारण गांवों में पीने के पानी का संकट वर्षों से चला आ रहा है। इस समय भी यही स्थिति कई गांवों की है। सैकड़ों की संख्या में ऐसे गांव हैं जहां पर प्राकृतिक जलस्रोत पर्याप्त मात्रा में नहीं होने के कारण सर्दी के मौसम से ही पानी के लिए लोगों की जद्दोजहद शुरू हो जाती है। अभी तक देखने में आया है कि जलसंकट के नाम पर पिछले कुछ सालों के भीतर करोड़ों रुपए पीएचई विभाग, नगर पालिका, परिषद, पंचायतों द्वारा खर्च किए जा चुके हैं। लेकिन जल संकट से जिले को निजात नहीं मिल सकी।
पीएचई विभाग की जिले भर में ३७० नल जल योजानाएं हैं। कार्यपालन यंत्री एचएल अहिरवार के अनुसार इनमें से ६० योजनाएं पूरी तरह से बंद हैं। वहीं गांवों में सरकारी हैंडपंपों की बात करें तो ९६०० हैंडपंप हैं। इनमें से ६०० हैंडपंप वर्तमान स्थिति में बंद हंै। विदित हो कि विभाग द्वारा हैंडपंपों और नल जल योजनाओं को ८० फीसदी चालू होना बताया गया है। जबकि हकीकत यह नहीं है।
जिले की सात तहसीलों में दमोह तहसील क्षेत्र की बात करें तो यहां जिला मुख्यालय, इमलाई, तिंदोनी, सलैया, जोरतला, बांदकपुर, नोनपानी, आनू, समन्ना, लक्ष्मणकुटी, खजरी सहित दर्जनों गांव में जलापूर्ति गांवों के हैंडपंपों पर निर्भर है। जबकि अधिकांश हैंडपंप बंद खराब हालत में हैं। इसी तरह पथरिया तहसील क्षेत्र के बांसाकला, नदरई, सेमरालोधी, रजवांश, लखरोनी, मैलवारा, सूखा, सतपारा सहित अन्य गांव की स्थिति पीने के पानी की व्यवस्था को लेकर खराब है। जबेरा तहसील के अधिकांश गांवों में जल संकट का दौर सर्दी के मौसम से ही श्ुारू हो जाता है। इनमें प्रमुख रूप से पडऱी, गोलापटी, खैड़ार, सैगरा, टपरिया, देवतरा, झागा सुरेखा, लखनी, बडग़ुवां, मुआर, झरौली, मनगुवां मानगढ़, छपरवाहा, चौपरा, पोड़ीमहुआ खेड़ा, सिमरीखुर्द गांव सहित अन्य गांव हैं। हटा तहसील के बछामा, अमझिर, घोगरा, नारायण पुरा, बोरीकला, प्रेमपुरा, रनेह, हटा नगर के कुछ वार्ड, ग्राम पंचायत बोरीखुर्द ऐसे हैं जहां पर लोगों को जलसंकट से जूझना पड़ता है। इसी तरह जिले का तेंदूखेड़ा तहसील क्षेत्र में बमनौदा, करौली, जरुआ, हाथीडोल, ककरिया, धनगौर, बादीपुरा, महगुवांकला, महंगुवां खुर्द, सहजपुर, पाड़ाझिर, बिसनाखेड़ी, बिल्थरा, बगदरी, जामुनखेड़ा, अजीतपुर खमरिया, बैलवाड़ा, झरौली इन गांवों में जलसंकट की स्थिति सर्दी के दिनों से ही तैयार हो जाती है जो अभी देखी जाने लगी है। इस तहसील क्षेत्र की अधिकांश नल जल योजनाएं बंद हैं। पीएचई विभाग द्वारा जितनी योजनाएं जिले में बंद होना बताई जा रहीं हैं उससे कहीं अधिक तेंदूखेड़ा और जबेरा तहसील क्षेत्र में ही बंद पड़ी हैं। यही हाल बटियागढ़ तहसील के जलना, मुठिया, हरदुटोला, सौंरई, गीदन, सिंगपुर, सगौनी, शहजादपुरा, सादपुर, ककरी, सैड़ारा ऐसे गांव हैं जहां पर लोगों के लिए जल संकट से जूझना पड़ रहा है।
नदियां सूखीं नजर तलहटी के पत्थर आ रहे नजर
वैसे तो इस साल जिले में पर्याप्त बारिश हुई, लेकिन बहते पानी को नहीं संजोया गया। लिहाजा जो पानी स्टाप डैमों के जरिए रोका जाना चाहिए था वह नहीं रूका और बह गया। इसकी वजह यह थी कि डैम के गेट समय पर बंद नहीं किए गए। जब यह बात उजागर हुई तो कलेक्टर द्वारा जलसंसाधन पर पीएचई विभाग को गेट बंद करने के सख्त निर्देश दिए गए थे। अभी फरवरी का मौसम है, लेकिन नदियां सूख चुकीं हैं। वहीं कुओं का जल स्तर भी तेजी से गिर रहा है। जानकारों का कहना है कि पर्याप्त बारिश होने के बाद भी इस साल अप्रैल मई के मौसम में जल संकट जिले में भयाभय रूप लेगा।

वर्जन
नल जल योजना में गड़बड़ी की शिकायत हुई थी जिसकी जांच चल रही है। बुंदेलखंड पैकेज के तहत १०० नल जल योजनाओं पर कार्य किया गया था। ग्रामीण क्षेत्रों में खराब हैंडपंपों का सुधार कार्य किया जा रहा है।
एचएल अहिरवार, कार्यपालन यंत्री

pushpendra tiwari Reporting
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