पेयजल आपूर्ति से परेशान लोग बिगाड़ सकते हैं चुनावी लहर, ये हैं हालात

पेयजल आपूर्ति से परेशान लोग बिगाड़ सकते हैं चुनावी लहर, ये हैं हालात

Puspendra Tiwari | Publish: Oct, 14 2018 09:54:51 AM (IST) Damoh, Madhya Pradesh, India

कार्य पूरा करने के भरोसे को प्रशासनिक अमले ने पहुंचा दिया खटाई में

दमोह. शहर की पेयजल आपूर्ति इस बार के विधानसभा चुनाव में भी चुनावी मुद्दा बनकर सामने आया है। शहर के कई वार्ड ऐसे हैं जहां पर लोग शुद्ध पेय जल के लिए परेशान हैं। पिछले दो वर्षों के भीतर शहर की पेयजल आपूर्ति के लिए विशेष योजनाओं का संचालन तो किया गया, लेकिन योजनाओं में जिम्मेदारों द्वारा ही सेंध लगा दी गई। जनप्रतिनिधियों का मानना था कि चुनाव आते आते शहर के सभी ३९ वार्डों में सुचारु रुप से पेयजल आपूर्ति होने लगेगी, लेकिन कछुआ गति से चल रहे पाइप लाइन बिछाए जाने के कार्य की वजह से ऐसा नहीं हो सका। वर्तमान स्थिति यह है कि शहर की जलापूर्ति प्रभावित बनी हुई है। लोगों के बीच जाकर जब पत्रिका ने इस मुद्दे की टोह ली तो यह सामने आया है कि लोगों के सूखे कंठ आगामी चुनाव की लहर को प्रभावित करने में अपनी महती भूमिका अदा करेगा। शहर के कई वार्ड ऐसे हैं जहां के लोगों में नल कनेक्शन नहीं होने की वजह रोष व्याप्त है।


..तो लग जाते चार चांद


शहर के जलसंकट को दूर करने के लिए १४ किमी दूर ब्यारमा नदी से पानी लाया गया और जब यह पानी लोगों तक पहुंचाने का कार्य शुरु हुआ तो कार्य की रफ्तार इतनी धीमी हो गई कि एक साल के भीतर पचास फीसदी कार्य भी नहीं हो सका। स्थिति यह है कि ३५ हजार उपभोक्ताओं में से महज ४ हजार उपभोक्ताओं को ही नल कनेक्शन नपा मुहैया करा पाई है। लोगों की प्यास बुझाने के लिए भागीरथी प्रयास तो जनप्रतिनिधियों द्वारा किए गए, लेकिन प्रोजेक्ट को पूरा कराने की जिम्मेदारी जिन प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपी गई वह फिसड्डी साबित हो गए। समय बीतता गया और अब जितने दिन मतदान के लिए बचे हैं इतने कम दिनों में हर घर पानी पहुंच जाए यह मुमकिन नहीं बचा है। आखिरकार अब यही कयास लगाया जाना सामने आ रहा है कि चुनाव के पहले जल वितरण कार्य आधे से अधिक भी हो जाता तो वोट मांगने के समय विकास कार्यों की गाथा में चार चांद लग जाते।


सुविधा ही बनी दुविधा


पाइप लाइन बिछाए जाने को लेकर शहर भर की सड़कें खोद दीं गईं, लेकिन खोदी गई जमीन की पुराई का कार्य व समतलीकरण कार्य समय से नहीं किया गया। ऐसा कोई वार्ड नहीं है जहां खुदाई वाली जमीन पर मिट्टी के टीले ना बने हों। कई वार्डों की आंतरिक सड़कें खेत खलियानों की मेढ़ बनकर नजर आ रहीं हैं। लोगों को पहले पानी मुहैया ना होना परेशानी थी और अब पानी के साथ सड़क की दरकरार बन गई है। लोगों को मिलने वाली सुविधा ही आज दुविधा के रुप में सामने आ रही है।


इनकी लापरवाही का खामयाजा भरेगा प्रत्याशी


जल वितरण तंत्र योजना के तहत किए जा रहे कार्य में प्रोजेक्ट संभाल रहे प्रशासनिक अमले ने भरपूर लापरवाही को उजागर किया है। शहर की जलापूर्ति के लिए तकरीबन ७० करोड़ की लागत से दो योजनाओं का क्रियांवयन काफी समय पहले शुरु कर दिया गया था। प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी संभाल रहे सब इंजीनियर मेघ तिवारी का भरोसा जो चुनाव के पहले कार्य को ७५ फीसदी पूरा करने का था वह आखिरकार खटाई में पड़ गया। इधर चुनाव सिर पर आ चुके हैं और २० प्रतिशत लोगों को भी नपा वैध नल कनेक्शन मुहैया नहीं करा पाई है। यहां खासबात यह है कि मंत्री द्वारा भी कार्य में तेजी लाने के लिए कई बार निर्देश दिए गए, लेकिन कार्य धु्रत गति नहीं पकड़ सका। अब जब मतदाताओं से वोट मांगने का समय आ गया है तो उजाड़ सड़कें और खाली कुप्पे खामयाजा उठाने की कहानी बखान रहे हैं।

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