इस रेलवे स्टेशन पर नहीं मिलती रेल यात्रा की टिकट

बगैर टिकट के ही अगले स्टेशन की यात्रा करते हैं रेल यात्री

By: Rajesh Kumar Pandey

Published: 10 Jun 2021, 11:59 AM IST

दमोह/ घटेरा. कटनी-बीना रेल सेक्शन के सगौनी व सलैया रेलवे स्टेशनों के बीच घनघोर जंगल में रतनगांव रेलवे स्टेशन है। जिसकी सीमा तीन जिलों पन्ना, कटनी व दमोह से लगी है। इस स्टेशन के कारण यह कहा जाता है कि पन्ना जिले की सीमा से भी रेल गुजरती है। तीन जिलों को जोडऩे वाले स्टेशन पर आज तक टिकट नहीं मिलती है। न ही यहां कोई टिकट काउंटर बनाया गया है।
सगौनी व सलैया रेलवे स्टेशनों के बीच 18 किलोमीटर की लंबी दूरी होने के कारण रेल प्रशासन के द्वारा रतन गांव को रेलवे स्टेशन बनाया गया है, लेकिन इस स्टेशन से कटनी से दमोह सागर बीना की ओर यात्रा करने वाले यात्रियों को आज भी बगैर टिकट यात्रा करनी पड़ती है।
स्टेशन के आसपास बसे गांवों के लिए पहले दो पैंसेजर ट्रेनों की सुविधा थी, वर्तमान में मेमू ट्रेन यहां रुक रही है। रेलवे स्टेशन से 4 किमी दूर नयागांव कटनी जिले में आता है। 3 किमी दूर जामुन ढाक पन्ना जिले की सीमा में बसा हुआ है। हुए हैं वही स्टेशन से 5 किलोमीटर दूर मझौली व 10 किलोमीटर दूर कालाकोट गांव घनघोर जंगल के बीच बसे हुए हैं। इसी गांव के नाम से रेल पुल भुजा का नाम रखा गया है। इन तीन जिले दमोह कटनी, पन्ना के लोगों का रतन गांव स्टेशन से पैसेंजर ट्रेन से सफर करने के लिए आने.जाने का एकमात्र साधन है। आज तक किसी भी मुख्य सड़क मार्ग से इन गांवों को नहीं जोड़ा गया।
जामुन डाल गांव के मिलन सिंह व दरबारी सिंह ने बताया कि रेलवे स्टेशन से गांव तक जाने वाले रास्ते पगडंडी तो हैं ही साथ ही घनघोर जंगल के बीच में बने हुए। जिससे इस जंगल में रीछ तेंदुआ सहित हिंसक प्रजाति के वन्यजीव रहते है। मझौली गांव के गणेश, बिहारी सिंह, रामू, बिरजू, हल्लू आदिवासी ने बताया कि आने जाने के लिए सिर्फ और सिर्फ पैसेंजर ट्रेनों का ही सहारा हैं। मजदूर वर्ग के लोग जंगल से लकडिय़ां काटकर पैसेंजर ट्रेनों से ले जाकर कटनी-दमोह ले जाकर बेचते हैं।
सलैया या सगौनी से लेते हैं टिकट
रतन गांव स्टेशन से बगैर टिकट चढऩे वाले यात्री दमोह या कटनी में पकड़े जाने के डर से सगौनी या सलैया स्टेशन पर ट्रेन से उतरकर दौड़ लगाकर टिकट लेने जाते हैं। जो टिकट नहीं ले पाते हैं वह पकड़े जाते हैं तो उन्हें जुर्माना भरना पड़ता है।
टिकट सेवा शुरू की गई थी
रेल कर्मचारी बताते हैं कि यहां एक बार टिकट सेवा शुरू की गई थी, लेकिन उसका खर्च भी नहीं निकल रहा था, जिससे टिकट सुविधा बंद कर दी गई है।

 
Rajesh Kumar Pandey Desk
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