दमोह. शहर की सरस्वती कॉलोनी में श्रीमद् भागवत कथा का बृहद आयोजन किया गया है। सोमवार को कथा के प्रथम दिवस शहर के बूंदाबहू मंदिर से शोभायात्रा कथा स्थल तक निकाली गई। शोभायात्रा में सैकड़ों की संख्या में भक्त शामिल हुए। शोभायात्रा में कथा वाचक श्रवणानंद सरस्वती महाराज की भी मौजूदगी रही। प्रथम दिवस आयोजित कथा में श्रवणानंद महाराज ने बताया कि सत्कर्म ही परमात्मा का प्रमुख साधन है। उन्होंने श्रीमद् भागवत कथा के महत्व की व्याख्या की। उन्होंने बताया कि भगवान की कथा और भगवान अलग अलग नहीं हैं। साप्ताहिक भागवत कथा मोक्ष का साधन है। यह कथा देवताओं को भी दुर्लभ है। कथा पुण्य के आधार पर नहीं मिलती है। यदि पुण्य के आधार पर यह कथा प्राप्त होती तो देवताओं को भी मिल जाती। यह कथा रूपी अमृत तो सदगुरुदेव भगवान की कृपा से ही प्राप्त होती है। हम तो कथा में बैठते हैं लेकिन कथा हम में नहीं बैठती है। हम जीवन में ज्ञान भक्ति वैराग्य को चाहते हैं तो हम श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण करें। हमारा जीवन वृक्ष के समान होना चाहिए। वृक्षों का संपूर्ण जीवन दूसरों के लिए होता है। यदि भूत का पश्चाताप भविष्य का भय और वर्तमान के मोह से बचना चाहते हो तो श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण करें। जीवन में पूरुस्वार्थ और प्रार्थना दोनों की साथ साथ आवश्यकता है।
विदित हो कि इस कथा का आयोजन आनंद सत्संग मंडल दमोह के द्वारा किया जा रहा है।

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