एक दिन छोड़कर एक दिन बुला रहे हैं स्टॉफ

जनजातिय विभाग में कुछ योजनाओं पर है वर्क फ्राम होम की गुंजाइश

By: Rajesh Kumar Pandey

Published: 16 May 2020, 06:06 AM IST

दमोह. वर्तमान में कलेक्ट्रेट के विभाग में 30 प्रतिशत कर्मचारियों से काम चलाया जा रहा है, जिसके लिए एक दिन छोड़कर कर्मचारियों को बुलाया जा रहा है। या जिस कर्मचारी की आवश्यकता होती है उसे कॉल कर ही बुलाया जा रहा है। कलेक्ट्रेट में जनजातिय विभाग में भी स्टॉफ को एक दिन छोड़कर बुलाया जा रहा है।
आदिम जाति कल्याण विभाग जिसे अब जनजातिय कार्य विभाग के नाम से जाना जाता है। इस विभाग का कार्य आदिवासियों की लिए संचालित योजनाओं का क्रियान्वयन, छात्रवृत्ति वितरण व हॉस्टल का संचालन करना है। वर्तमान में सभी हॉस्टल बंद हैं, छात्रवृत्ति सीधे खातों में पहुंचाई जाती है। इस विभाग के अमले की वॢकंग बजट के आधार पर होती है। आदिवासी योजनाओं पर जितना बजट आएगा उस पर कार्य किया जाएगा।
जिला कलेक्ट्रेट में स्थित जनजातिय कार्य विभाग में कुल 13 का स्टॉफ पदस्थ हैं, यहां एक दिन छोड़कर 3 या 5 कर्मचारी ही बुलाए जा रहे हैं। इस कार्यालय का पूरा वर्क फाइलों की नस्ती व पेपर वर्क है। कम्प्यूटर पर केवल डाटा तैयार होता है। सांख्यिकी जानकारी, लेटर टाइप किए जाते हैं। इस विभाग के कर्मचारियों के अनुसार वर्क फ्रॉम होम की जो बात चल रही है, वह इस विभाग में संभव नहीं है। क्योंकि हर दस्तावेज पर साइन होते हैं। बिल संबंधी कार्य ऑफिस से ही किए जा सकते हैं। छात्रावासों अन्य योजनाओं के बिल के लिए कार्यालय ही सबसे अच्छा साधन है।
कुछ योजनाओं में वर्क फ्राम होम की गुंजाइश
जनजातिय कार्य योजनाओं के क्रियान्वयन में अब ऑनलाइन वर्किंग शुरू हो गई है। आदिवासी क्षेत्र के लिए एमपी टॉस्क प्रोग्राम दिया गया है, इसकी वर्किंग ऑनलाइन कम्प्यूटर व लैपटाप पर की जा रही है। लेकिन इसके लिए भी कुछ जरुरी कार्यों के लिए ऑफिस आना ही पड़ेगा।

 
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