ODF SCAM:आंकड़ों की बाजीगरी से अधिकारी हो रहे हैं सम्मानित

ODF SCAM:आंकड़ों की बाजीगरी से अधिकारी हो रहे हैं सम्मानित

Rajesh Kumar Pandey | Publish: Jan, 14 2018 01:43:23 PM (IST) Damoh, Madhya Pradesh, India

आंकड़ों की बाजीगरी से अधिकारी हो रहे हैं सम्मानित

राजेश कुमार पांडेय @ दमोह. शौचालय निर्माण कार्य में करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाए गए हैं, लेकिन शौचालयों का उपयोग नहीं होने से ग्रामीणजन खुले में शौच के लिए जा रहे हैं। वहीं स्वच्छता अभियान में अच्छे कार्य की वाहवाही लूटने के लिए गांवों को ओडीएफ की श्रेणी में भी लाया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और हैं। पत्रिका ने जिले के ओडीएफ गांवों पर नजर डाली तो कई ओडीएफ गांव में शौचालय जर्जर वह अनुपयोगी हैं, फिर भी गांव को ओडीएफ श्रेणी में रखा गया है।
जिले में समग्र स्वच्छता अभियान के तहत 164 गांव को ओडीएफ श्रेणी में रखा गया था। जिनमें से केवल 72 गांव सत्यापित करते हुए ओडीएफ घोषित किए गए थे। जिनमें से बटियागढ़ में 6 गांव, दमोह में 9 गांव, हटा में ५ गांव, जबेरा में 10 गांव, पटेरा में 8 गांव, पथरिया में 4 गांव व तेंदूखेड़ा जनपद के 30 गांव ओडीएफ की सूची में शामिल किए गए हैं। इतना ही नहीं जनपद पंचायत पटेरा के दो अधिकारियों को शौचालयों के शत प्रतिशत लक्ष्य पूर्ण होने पर कलेक्टर द्वारा सम्मानित भी कर दिया गया था। पत्रिका ने जब पूरे जिले में ओडीएफ गांव की हकीकत जानी व सरकारी आंकड़ों का मिलान किया तो हकीकत सरकारी आंकड़ों में ही ओडीएफ की सच बयानी साबित कर रहे हैं।
बटियागढ़ जनपद की ग्राम पंचायत सगरोन में 379 परिवार है, जिनमें से 155 के शौचालय बने हैं, उनमें से 63 ही उपयोगी हैं। यही की ग्राम पंचायत पथरिया के गांव इमलिया में 15 परिवारों के लिए 15 शौचालय तो बना दिए गए, लेकिन उपयोगी महज 4 हैं। दलपतपुरा में 325 परिवार है, जिनमें से 53 का उपयोग हो रहा है, इसके बावजूद भी गांव ओडीएफ की सूची में शामिल हो गया है।
दमोह जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत हरदुआ मुडऱ के गांव खंचारीपटी में 180 परिवार हैं, जिनमें 91 के पास शौचालय हैं, जिनमें से 60 ही उपयोगी हैं। घाटपिपरिया का महुआखेड़ा गांव जिसमें कुल 6 परिवार हैं, 4 के पास शौचालय हैं। जिसका उपयोग निवासी भी नहीं कर रहे हैं। आनू का मडिय़ा गांव 44 परिवार हैं, जिनमें से सभी के पास शौचालय तो हैं, जिनमें से उपयोगी 14 हैं।
पथरिया जनपद पंचायत की रजवांस पंचायत का घोघरी गुलाल गांव में 88 परिवार निवासत हैं, जिनमें से 77 के शौचालय बनाए गए जिनमें से 41 का ही उपयोग हो रहा है। बेलखेड़ी के पिपरिया लुहार गांव में 30 परिवार हैं, 26 का उपयोग हो रहा है। झागर बालाकोट ग्राम पंचायत के डूमर बालाकोट गांव में 98 परिवार हैं, 82 के पास शौचालय हैं, जिनमें से 25 उपयोगी हैं।
पटेरा जनपद पंचायत की दतिया ग्राम पंचायत गांव के बेलखेड़ी गांव में 118 परिवार हैं, जिनमें से 44 घरों में शौचालय हैं, 4 उपयोगी हैं। पटेरा के रोड़ा ग्राम पंचायत के खेरीहरकिशन में 195 परिवार हैं, 178 के पास शौचालय जिनमें से 35 शौचालय उपयोगी हैं।
हटा जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत बरखेराचैन के शिवरामपुरा गांव में 37 परिवार हैं, 21 के यहां शौचालय हैं, जिसमें उपयोगी कोई नहीं है। दामोतिपुरा गांव में 141 परिवार हैं, 44 के पास शौचालय हैं, उपयोगी 6 हैं। हरदुआघुटरिया में 242 परिवार हैं, 64 के पास शौचालय हैं, उपयोगी एक भी नहीं है।
जबेरा जनपद पंचायत की अमदर पंचायत पटी मानगढ़ में 98 परिवार हैं, 37 परिवारों के शौचालय हैं, जिनमें से 5 ही उपयोगी हैं। चिलौद के सिमरी खुर्द में 250 परिवार में से 214 के यहां शौचालय हैं 59 का उपयोग हो रहा हैं, 33 में भी पानी की व्यवस्था भी नहीं हैं।
तेंदूखेड़ा जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत दिनारी का गांव दसौंदीमाल 126 परिवार 99 के पास शौचालय हैं, 96 उपयोगी हैं, तथा इसी पंचायत का पिपरिया टीकाराम गांव जहां शौचालय 94 के पास है, लेकिन उपयोगी 87 है। जामुन पंचायत में हनुमत बागों में 65 परिवार हैं, 48 के यहां शौचलय हैं तीन उपयोगी हैं। तेजगढ़ ग्राम पंचायत 823 परिवार निवास 802 के यहां शौचालय 654 उपयोगी हैं। इसके बावजूद गांव ओडीएफ हो गया।

शौचालयों को लेकर ग्रामीणों में बढ़ रहा आक्रोश
जिले में समग्र स्वच्छता अभियान के कर्ताधर्ताओं ने किस तरह पलीता लगाया है, इसका नजारा प्रत्येक ग्राम पंचायत में अनुपयोगी व जर्जर शौचालयों को देखकर किसी भी ग्राम पंचायत में लगाया जा सकता है। जिले की ऐसी कोई ग्राम पंचायत नहीं है, जहां के लोगों कलेक्टर की जनसुनवाई में शौचालय निर्माण मेें गड़बडिय़ों की शिकायत नहीं की हो, लेकिन भ्रष्ट अफसरों की जड़े मजबूत होने से समस्त शिकायतें दर किनार कर दी गईं। जिसका नतीजा हाल ही में गुबराकला में सामने आया था जहां जांच करने गए अधिकारियों को द्वारा सरपंच, सचिव व रोजगार सहायक का पक्ष किया गया तो ग्रामीणों ने सचिव व रोजगार सहायक की पिटाई कर दी थी। शौचालयों को लेकर ग्रामीणजनों में आक्रोश की स्थिति बन रही है। जिनकी नाराजगी का खामियाजा आगामी चुनावों में मौजूदा विधायकों को भुगतना पड़ सकता है। जिला पंचायत सीईओ एचएएस मीणा का कहना है कि ओडीएफ गांवों की रैकिंग के संदर्भ में यदि कहीं गड़बड़ी है तो जांच कराते हैं, मेरे कार्यकाल में कम शिकायतें पहुंची हैं।

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