जिसने की थी छोटे भाई के गुम होने की रिपोर्ट वही निकला खुद के सगे भाई का हत्यारा

दो साल तक हत्या का आरोपी दमोह व पटेरा पुलिस को बनाता रहा मामू

दमोह. ढाई साल बाद पुलिस ने एक 17 वर्षीय नाबालिग की हत्याकांड का बुधवार को पर्दाफाश कर दिया है। यह हत्याकांड में हैरत वाली यह बात सामने आई कि जिसने अपने सगे छोटे भाई के गुम होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी वह ढाई साल तक पुलिस को गुमराह करता रहा। लेकिन कहते हैं कि हत्यारा कितनी ही सफाई से घटना को अंजाम दे लेकिन कोई न कोई गलती कर बैठता है। इस मामले में भी ठीक ऐसा ही हुआ और रिपोर्ट दर्ज कराने वाला बड़ा भाई ही अपने छोटे सगे भाई का हत्यारा निकला। पुलिस पूछताछ पर आरोपी ने हत्या की वजह के संबंध में कहा कि उसकी पत्नी द्वारा कहा गया था कि छोटा भाई छेड़छाड़ करता है।

मामले के संबंध में दमोह एसपी विवेक सिंह ने बताया है कि पटेरा थाना क्षेत्र के छेवला दुबे गांव निवासी आरोपी बलीराम पिता रतिराम अठ्या ने 24 जून 2017 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि रिपोर्ट के एक दिन पहले 23 जून को उसका 17 वर्षीय भाई पटेरा के हटा तिराहा से गुम हो गया है। रिपोर्ट पर पुलिस ने धारा ३६३ के तहत प्रकरण दर्ज कर अपह्त बालक की तलाश शुरु कर दी थी। जिस दिन रिपोर्ट दर्ज हुई थी उसी दिन पुलिस को दमोह के सागर नाका रेलवे ट्रेक पर एक बालक का शव बरामद हुआ था। जिसकी पहचान अपह्त बालक के रुप में की गई थी। पुलिस द्वारा जब इस मामले की खोजबीन की गई तो बालक की हत्या होना सामने आई और मामले में की विवेचना धारा 302 के तहत शुरु कर दी गई। पिछले ढाई साल से इस हत्या की गुत्थी को नहीं सुलझा पाई थी। जबकि पुलिस द्वारा कई बार फरियादी बलीराम व अन्य गवाहों से पूछताछ की गई। बार बार हुई पूछताछ पर फरियादी और गवाहों के बयानों में अंतर आ गया। यही वह पहला सुराग सामने आया जिसके चलते पुलिस ने मृतक के भाई से सख्ती से पूछताछ शुरु कर दी। आखिरकार आरोपी बलीराम ने खुद के भाई की हत्या करना पुलिस के समक्ष स्वीकार कर लिया।
हत्या को रेल एक्सीडेंट दिखाने की थी मंशा
आरोपी ने सोची समझी साजिश के तहत हत्या को अंजाम दिया था। खुद पर किसी तरह का शक न हो पाए इसलिए आरोपी ने भाई के शव को रेलवे ट्रेक पर फेंक दिया था। आरोपी की मंशा थी कि मृतक का शव बरामद होने के बाद यह रेल एक्सीडेंट के रुप में सामने आए। उधर आरोपी रिपोर्टकर्ता बनकर बकायदा पुलिस के संपर्क में बना रहा और पुलिस को गुमराह करते हुए होने वाली कार्रवाइयों पर नजर रखे हुए था।
बहरहाल पुलिस ने आरोपी को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर बुधवार को न्यायालय में पेश किया जहां से उसे जेल भेज दिया गया है। बताया गया है कि पुलिस ने इस अंधे हत्याकांड के आरोपी तक पहुंचने के लिए दस हजार का ईनाम रखा था। लेकिन लंबे समय तक पुलिस यह नहीं समझ पाई थी कि जो उनके साथ साथ है वही अपने भाई का हत्यारा है।

घटना के चांैकाने वाले बिंदु
-आरोपी अपने भाई को खुद के ऑटो से पटेरा से हिंडोरिया लाया था।
- रास्ते में आरोपी ने भाई के सिर पर लोहे की रॉड से हमला कर हत्या कर दी।
- छोटे भाई के शव को ऑटो में रखकर दमोह शहर के आगे रेलवे ट्रेक पर फेंक दिया।
- आरोपी घटना को रेल एक्सीडेंट दिखाना चाहता था।
- पुलिस को शक न हो इसलिए आरोपी ने भाई के गुम होने की रिपोर्ट दर्ज कराई और खुद फरयादी बन गया था।
- ढाई साल तक पुलिस के सामने था आरोपी, लेकिन पुलिस नहीं पहचान पाई थी।

वर्जन
अंधे हत्याकांड का पर्दाफाश करने में काफी समय लगा। लेकिन आखिरकार पुलिस आरोपी तक पहुंच गई। फरियादी और गवाहों के बयानों में हुए विरोधाभाष को गंभीरता से लिया गया और हत्या की गुत्थी सुलझ गई।
विवेक सिंह, एसपी दमोह

pushpendra tiwari
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