पुलिस ने किया यह बेहतर काम, तो मिल गए ढाइ सौ बिछड़े परिवार

250 बिछड़े परिवारों का बसा बिखरा जीवन, छोटी-छोटी बातों पर हुए विवाद
महिला परामर्श केंद्र में दी गई समझाइस

By: Pushpendra pandey

Published: 30 Dec 2018, 07:05 AM IST

लक्ष्मीकान्त तिवारी

दमोह. ऐसे परिवार बहुत ही कम होते हैं जिनमें किसी न किसी बात को लेकर विवाद न हुआ हो। हर परिवार में छोटी बड़ी बातों पर विवाद होता है। लेकिन कुछ परिवार ऐसे होते हैं। जिनमें बहुत ही छोटी-छोटी बातों पर विवाद होने पर वह पुलिस थानों तक पहुंच जाते हैं। इसमें महिला पुलिस थानों व महिला परामर्श केंद्रों में भी निराकरण नहीं होने पर लोग न्यायालय की शरण में पहुंच जाते हैं। जिसके बाद बिखरे परिवार को बसा पाना बहुत ही मुश्किल हो जाता है। हालांकि वर्ष २०१८ बिखरे परिवारों के लिए अच्छा रहा। इस वर्ष बिखरे ३५० से अधिक परिवारों में से करीब २५० परिवारों को मिलाने में महिला परामर्श केंद्र सफल रहा। जिसमें आए काउंसलरों की सक्रियता व पुलिस अधिकारियों का मार्गदर्शन सभी के लिए एक अच्छा संदेश देने वाला रहा। जिससे ७० फीसदी लोग बिछडऩे के बाद एक होकर नए जीवन की शुरूआत कर सके।

करीब ३५० प्रकरण आए सामने -
वर्ष २०१८ में महिला परामर्श केंद्र में करीब ३५४ प्रकरण पहुंचे। जिसमें से करीब आधा दर्जन आवेदनों पर खातमा लगाने के बाद शेष बचे ३४८ प्रकरण में से २५० में समझौता कराया गया। अन्य एक सैकड़ा मामलों में दोनों पक्षों में सहमति नहीं बनने पर वह न्यायालय की शरण में पहुंचे।

नए जीवन की शुरूआत की -
वर्ष २०१८ में आए प्रकरणों में करीब दो सौ से अधिक प्रकरण ऐसे रहे जो हर परिवार में सामने आते हैं। लेकिन कुछ दंपति आक्रोश में आकर एक दूसरे पर इतने खफा हुए कि उन्होंने पुलिस की शरण ले ली। बाद में पुलिस अधीक्षक ने बिछड़े परिवारों को बिखरने से बचाने के लिए मामले महिला परामर्श में प्रकरणों को भेजा। जिससे दोनों परिवारों को मिलाया, जिससे दोनों बिछड़ रहे परिवार एक होकर नए जीवन की शुरूआत की और अब बेहतर तरीके से जीवन बसर कर रहे हैं।

प्रेम विवाह नहीं रहे सक्सेज -
महिला परामर्श केंद्र में आने वाले मामलों में दंपति के बीच हुए विवादों में प्रेम विवाह वाले मामले ऐसे रहे जिसमें दंपति की शादी के कुछ दिन बाद से ही दोनो में विवाद होने लगे थे। लेकिन काउंसलर की समझाइस के बाद दोनों को एक किया गया। इसके अलावा काउंसलर डॉ. प्रेमलता नीलम ने बताया कि पति-पत्नी के बीच में शक को लेकर अधिक मामले सामने आए, सास-बहू में छोटी-छोटी बातों को लेकर विवाद, बेटा का पक्ष लेने पर बहू को बुरा लगा, बेटी मायका बार-बार जाना चाहती है जिसे मना करने पर विवाद हुआ। एक पति के बाद दूसरे पति के घर आने के बाद विवाह के कुछ समय बाद ही दंपति में अनबन हुई, एक दूसरे की संपत्ति पर विवाद, बच्चों को लेकर हुई मारपीट को लेकर कई मामले सामने आए। जिसमें दोनों पक्षों को समझाइ दी गई कि दंपति अपने बच्चों में संस्कार देकर उनके भविष्य का ध्यान रखें। कई मामले ऐसे भी देखने मिले जिसमें मजदूर वर्ग जो महिलाओं को छोड़कर बाहर मजदूरी करने चले जाते हैं। इसको लेकर भी विवाद होना पाए गए। लेकिन सभी पक्षों को समझाइस देकर एक किया गया। इसमें खास बात यह देखने मिली कि अशिक्षित वर्ग की अपेक्षा शिक्षित वर्ग में छोटी-छोटी बातों को लेकर अधिक विवाद सामने आए। लेकिन काउंसलर टीम ने जब उन्हें बिठाकर भविष्य को लेकर चिंता जताई तो दोनों पक्षों में राजीनामा हुआ और वह खुशी-खुशी एक होकर वापस घर पहुुंचे।

प्रयास किए जाते हैं कि परिवार न बिछड़े -
महिला परामर्श केंद्र की स्थापना का जो उद्देश्य है, उसे पूरा करने के लिए पुलिस पूरा प्रयास करती है। काउंसलर के लिए भी दंपति को एक करने में समझाइस देने के लिए नियुक्त किया जाता है। सभी काउंसलर ने बेहरत कार्य किया। जिससे अधिकांश परिवार एक हो सके, इसमें स्टॉफ ने भी अच्छा कार्य किया।

Pushpendra pandey Desk
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