जानिए, आखिर क्यों स्कूल से घर आए बच्चे परेशान नजर आते हैं

जानिए, आखिर क्यों स्कूल से घर आए बच्चे परेशान नजर आते हैं
बच्चों को भारी बस्तों से निजात नहीं मिल पा रहा

Puspendra Tiwari | Publish: Oct, 12 2019 04:03:01 AM (IST) Damoh, Damoh, Madhya Pradesh, India

बच्चे ढो रहे अधिक वजनी स्कूली बस्ता

मुजीबुद्दीन कादरी बटियागढ़. सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत माध्यमिक व प्राथमिक स्तर के बच्चों को भारी बस्तों से निजात नहीं मिल पा रहा है। जबकि बच्चों की पीठ से यह वजन कम करने के लिए नवंबर 2018 में केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा गाइड लाइन जारी की गईं थीं। साथ ही एक माह पहले ही कलेक्टर तरुण राठी ने इस संबंध में आदेश भी जारी किया था। लेकिन जिले भर में आज तक जारी निर्देशों का पालन नहीं हो रहा है और इसके चलते आज भी जिले भर में स्कूली बच्चे अनावश्यक बोझ ढोने में लगे हुए हैं।
प्राइवेट स्कूलों में शिक्षा के नाम पर अनावश्यक किताबें बच्चों को स्कूल ले जानी पड़तीं हैं। जबकि इन किताबों से पढ़ाई पर कोई विशेष फर्क नहीं होता। शासन द्वारा जारी निर्देशों में साफ तौर पर बताया गया है कि कक्षा एक व दो के विद्यार्थियों को होमवर्क न दिया जाए। लेकिन स्कूलों में इन बच्चों को होमवर्क दिया जाता है। इसके अलावा कक्षा एक व दो के बच्चों को भाषा और गणित को छोड़कर किसी अन्य विषय को लिखवाने की इजाजत नहीं है। वहीं एनसीआरटी द्वारा निर्धारित कक्षा तीसरी व चौथी के छात्रों के लिए भाषा, ईवीएस व गणित विषय ही पढ़ाने का नियम है। लेकिन इसके उलट कोई भी स्कूल इसका पालन नहीं कर रहा है। अतिरिक्त किताबों की वजह से मासूम बच्चे आज भी घर से स्कूल तक तय नियम से पांच छह गुना अधिक वजन के किताबों से भरे बस्तों को ले जाते हैं। इससे बच्चों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ता है। सबसे ज्यादा परेशानी प्राइमरी स्कूल के बच्चों को होती है। अधिक वजन के कारण तीन से चार साल के मासूम बच्चों के कमर व पीठ में दर्द होने की शिकायतें भी सामने आतीं हैं। लेकिन स्कूल प्रशासन इसको लेकर गंभीर नहीं हैं। कई बच्चों के अभिभावक स्कूल छोडऩे खुद जाते हैं। तो सैकड़ों बच्चे खुद वजनी बैग लेकर स्कूल पहुंचते हैं।
मामले में डीपीसी केसी गौतम ने बताया कि जिले में प्राथमिक, माध्यमिक स्कूलों की संख्या तकरीबन २००० के लगभग है। इससे पता चलता है कि जिले भर में हजारों बच्चे परेशान हो रहे हैं।
कलेक्टर के निर्देश का नहीं करवाया पालन
पिछले माह कलेक्टर तरुण राठी ने बैठक के दौरान स्कूली बस्ते को लेकर डीइओ, डीपीसी को निर्देश जारी किए थे। बताया गया है कि निर्देशों में दिन के हिसाब से किताबें विषय तय किए गए थे। लेकिन अभी तक डीइओ व डीपीसी ने इस संबंध में निजी स्कूल प्रबंधकों को पत्र नहीं भेजे। हालांकि डीइओ का कहना है कि पूर्व में सभी स्कूलों को यह नियम पालन करने को कहा गया है।
ये हैं गाइड लाइस
नबंवर 2018 में मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा बस्तों में अधिक वजन को लेकर गाइडलाइन जारी की थी। जिनमें कक्षा पहली व दूसरी के बच्चों के बस्तों का वजन 1.05 किग्रा. तीसरी से पांचवीं तक के बच्चों के बस्ते का वजन दो से तीन किग्रा. छठवीं व सातवीं में चार किग्रा, कक्षा आठवीं और नौवीं में साढ़े चार किग्रा. और कक्षा दसवीं में बैग का वजन पांच किग्रा से अधिक नहीं होना चाहिए। इसके अलावा गाइड लाइन के अनुसार कक्षा पहली व दूसरी के बच्चों को होमवर्क न देने का नियम तय किया गया है। लेकिन इसे भी स्कूलों द्वारा ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

इनका कहना
सभी स्कूलों को जिस विषय की पढ़ाई हो उसकी ही किताब बच्चों को पढऩे दें और बच्चों का बैग और किताबें स्कूल में ही रखवाने को कहा है। यदि ऐसा नहीं हो रहा है तो दोबारा आदेश जारी करेंगे और सख्ती से कार्रवाई कराई जाएगी।
पीपी सिंह, डीइओ दमोह

अभी मैं मीटिंग में हूं। इस संबंध में जानकारी प्राप्त की जाएगी।
तरुण राठी, कलेक्टर

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