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गेंग रेप के दो आरोपियों को 10 वर्ष का कठोर कारावास

गेंग रेप के दो आरोपियों को 10 वर्ष का कठोर कारावास – पीडि़ता ने राजीनामा किया था पेश, डीएनए रिपोर्ट से हुई थी घटना की पुष्टि

दमोहJun 22, 2024 / 07:27 pm

Samved Jain

दमोह. अपर सत्र न्यायाधीश संतोष कुमार गुप्ता ने दुराचार के एक मामले में दो आरोपियों को दस-दस वर्ष के कठोर कारावास व पन्द्रह सौ रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। मामले में शासन की ओर से पैरवी शासकीय अभिभाषक राजीव बद्री सिंह ठाकुर द्वारा की है। बताया गया है कि दमोह देहात अंतर्गत निवासी एक महिला 8 अक्टूबर २०२२ को रात में घर पर अकेली थी, तो आरोपी रवि अहिरवार निवासी ग्राम चौरई व मुकेश यादव निवासी दमयंती पुरम न्यू दमोह घर पर आए और जबरदस्ती घर के अंदर घुसकर महिला के साथ मारपीट करते हुए उसके साथ रात भर बार-बार बलात्कार किया।
आरोपियों के जाने के बाद महिला ने घटना के बारे में अपने भाई व मायके वालों को बताया। महिला के लिखित आवेदन पर से थाना दमोह देहात में आरोपीगण के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया। पुलिस ने घटनास्थल से बिस्तर की चादर व वारदात के समय पहनी हुई साड़ी डीएनए परीक्षण के लिए जब्त की। पुलिस ने दूसरे दिन आरोपियों को गिरफ्तार कर डीएनए परीक्षण के लिए उनका रक्त नमूना व वीर्य नमूना अस्पताल से प्राप्त कर एफ एसएल सागर भेजा और आरोपियों को न्यायालय पेश किया। मामले में न्यायालय मे अभियोजन द्वारा साक्षियों का परीक्षण कराया गया। प्रकरण के चलते दौरान पीडि़ता द्वारा राजीनामा न्यायालय में पेश किया गया।

डीएनए रिपोर्ट में घटना के समय पहनी हुई पीडि़ता की साड़ी और बिस्तर की चादर पर आरोपी रवि के वीर्य पाए जाने का निष्कर्ष निकला। गवाही के पश्चात आरोपी के ओर से न्यायालय में तर्क प्रस्तुत किए गए कि महिला और आरोपी के प्रेम संबंध थे एवं सहमति से उनके द्वारा शारीरिक संबंध बनाए गए थे, लेकिन महिला के पति को इनके संबंध में जानकारी मिल गई थी और इस कारण पति उसे छोड़ ना दे इसलिए आरोपियों को प्रकरण में में झूठा फंसाया गया है। न्यायालय द्वारा अपने निर्णय में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्णित प्रकरण स्टेट ऑफ पंजाब विरुद्ध गुरमीत सिंह व अन्य के मामले का उल्लेख करते हुए लिखा कि न्यायालय पीडि़ता की साक्ष्य पर बिना उसकी पुष्टि के भी भरोसा कर सकता है।

न्यायालय को सिर्फ यह देखना होता है कि क्या पीडि़ता के बयान स्वाभाविक एवं विश्वनीय है या नहीं। न्यायालय द्वारा निर्णय में आगे लिखा गया कि पीडि़ता के साथ हुई बलात्कार की पुष्टि चिकित्सक की साक्ष्य व डीएनए रिपोर्ट से भी हो रही है। ऐसे में आरोपियों के द्वारा किए गए कृत्य व समाज में बढ़ती बलात्कार की घटनाओं और उसका महिलाओं पर पडऩे वाले प्रभाव को देखते हुए आरोपियों को भादवि की धारा 376 में 10-10 वर्ष के कठोर कारावास व धारा 450 और 323 में भी दंडित किया जाता है। साथ ही आरोपियों पर पंद्रह सौ का जुर्माना भी अधिरोपित किया जाता है।

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