चेंजमेकर : 60 से अधिक अधिवक्ताओं ने बताया ऐसे करें स्वच्छ राजनीति, देखें VIDEO

चेंजमेकर : 60 से अधिक अधिवक्ताओं ने बताया ऐसे करें स्वच्छ राजनीति, देखें VIDEO

Rajesh Kumar Pandey | Publish: May, 18 2018 05:16:52 PM (IST) Damoh, Madhya Pradesh, India

235 अधिवक्ताओं की मौजूदगी में ढाई घंटे चली परिचर्चा, डेढ़ घंटे का फेसबुक लाइव देखते रहे

दमोह. दमोह शहर में पत्रिका द्वारा आयोजित परिचर्चाओं में पहली बार समाज के सितारों अधिवक्ताओं के संग अभियान राजनीति से रिश्ता जोड़ों कोर्ट परिसर के बार रूम में आयोजित किया। स्वच्छ करें राजनीति चेंजमेकर के नायक बनने के लिए 235 से अधिक एडवोकेट की उपस्थिति में करीब 60 से अधिक वक्ताओं ने अपनी बेबाक बातें रखी। गुरुवार की दोपहर 3 बजे से 5.30 तक चली इस लंबी परिचर्चा के दौरान करीब डेढ़ घंटे का पत्रिका सागर फेसबुक पर लाइव किया गया। जिसे अधिवक्तागण अपने-अपने मोबाइल पर देखते रहे।
परिचर्चा का शुभारंभ करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता चंद्र मोहन चंदा गुरु ने कहा कि व्यवस्था परिवर्तन के लिए हमें नेक इरादे वाले लोगों की आवश्यकता है। राज करने की नीति में इमानदारी की नितांत आवश्यकता है। तभी स्वच्छता और शुचित की बात हो सकती है।
अजय सींग ठाकुर ने कहा कि हमें अब ऐसे चेंजमेकर चाहिए जो जनहितैषी समस्याओं को हल कर सकें। सुचिता की बात सर्वोपरि है, इसके प्रयास अब हम जैसे बुद्धिजीवियों के दौरा समूह में करने की आवश्यकता है।
वरिष्ठ अधिवक्ता देवी सिंह राजपूत ने कहा कि आज राजनीतिक स्वच्छता की नितांत आवश्यकता लोकसभा से लेकर ग्राम पंचायत स्तर तक की है। देश को विकसित करने के लिए हमें ठोस योजनाओं की आवश्यकता है। जिसके लिए मंथन की आवश्यकता है।
जयप्रकाश श्रीवास्तव ने कहा कि राजनीतिक स्वच्छता को हम चुनाव आयोग की स्वच्छता से ही पूर्ण साकार रूप में देख सकते हैं। इसमें लिए हमें चुनाव आयोग को निष्पक्ष संस्था व कड़े चुनाव सुधार करने वाले इमानदार प्रशासनिक अधिकारियों की आवश्यकता है।
जलज हर्ष श्रीवास्तव ने कहा कि यदि सदाचार को जीवन में उतारने वाले लोग राजनीति में आएंगे तो निश्चित ही सुधार की गुजांइश है। अच्छी स्वच्छ राजनीति तभी सभी संभव है कि हम बदलेंगे तो युग बदलेगा, इसलिए मतदाताओं से लेकर जनप्रतिनिधियों में बदलाव की नितांत आवश्यकता महसूस की जा रही है।
अधिवक्ता संघ के जिलाध्यक्ष कमलेश भारद्वाज ने कहा कि राजनीतिक स्वच्छता के लिए हमें आवश्यकता है कि योग्य, सामाजिक कार्यों में सरोकार रखने वाले निर्वव्यवसनी लोगों के साथ हर व्यक्ति की पीड़ा समझने वाला हो। ऐसे लोगों को राजनीतिक रूप से आगे बढ़ाने का संकल्प लेना होगा तभी राजनीतिक सुचिता संभव है।
मणिशंकर गर्ग ने कहा कि लगातार हम देख रहे हैं कि सत्ता की सिंघासन महलों तक केंद्रित हो गई है, यह सत्ता कभी गरीब के झोपड़े तक नहीं पहुंची है। प्रजातंत्र रूपी चुनाव खर्चीले और आंडबर युक्त हो जाने से आज की स्थिति में राजनीति स्वच्छता बनाए रखना कठिन डगर है, लेकिन हम एक प्रयास तो कर सकते हैं।
मनीष नगाइच ने कहा कि पत्रिका की यह पहल अधिवक्ताओं के बीच शुरू इसलिए हुई है कि करीब 80 फीसदी अधिवक्ता ही पूर्व के राजनीतिक पदों पर रहे हैं। क्योंकि अधिवक्ता ही एक ऐसे पेशे से आता है, जिसको समाज का हर वर्ग से सीधा नाता रहता है और वह समाजसेवा के क्षेत्र में भी जुड़ा रहता है, इसलिए आज इनकी मुहिम हमारे बीच शुरू हुई है।
प्रशांत सिंह हजारी ने कहा कि राजनीति को स्वच्छता प्रदान करने के लिए सभी बुद्धिजीवी वर्गों के लोगों को आना होगा। रात डेढ़ बजे तक कर्नाटक का कल का नाटक सभी ने देखा ही है। लोकल मुद्दों पर बात की जाए, विकास योजनाओं पर बात की जाएं। युनिवर्सिटी से मेडिकल कॉलेज व स्टील प्लांट से लेकर अन्य बातें हमें करनी होगी और यह सवाल ज्वलंत करने होंगे।

अनिल धगट ने कहा कि स्वच्छ राजनीति की बाद ऐसे समय की जा रही है, जब राजनीति मूल्यों में गिरावट आ रही है। नेता चुनाव को युद्ध के तरह लडऩे लगे हैं, लेकिन इसमें भाईचारे व सदाचार का पैमाना गायब हो गया है, समाजसेवा भी दूर होकर स्वयंसेवा का रूप ले लिया है। वोटरों में उत्साह घटने लगा है। जिससे राजनीति अस्वच्छता बढ़ गई है।
श्यामबिहारी खरे ने कहा कि पत्रिका द्वारा शुरू किए गए अभियान को हमें गांव की चौपाल तक ले जाना होगा। तब जाकर लोग सुचिता की बात करेंगे और इस अभियान से जुड़ेंगे।
पूर्व विधायक व अधिवक्ता आनंद श्रीवास्तव ने कहा कि वर्तमान में राजनीति पूंजीपतियों की दासता पत्नी बन गई है। हम राजनीतिक स्वच्छता की बात वहीं से करें तो पाएंगे कि राजनीति समाजसेवा बन जाएगी और लोगों का वास्तविक कल्याण होने लगेगा।
पंकज खरे ने कहा कि मतदाताओं को सोच बदलनी होगी। अच्छे और सदाचारी प्रत्याशियों को वोट करना होगा। चुनाव लडऩे वाले बदलाव के जो वास्तविक नायक हैं, जनता को उन पर भरोसा जताना चाहिए, चाहे वह कहीं से भी खड़े हो।
वीरेंद्र दुबे का कहना है कि आज के राजनीतिक दौर में जो सबसे ज्यादा बेइमान हैं, वहीं समाज के सबसे बड़े इमानदार बने बैठे हैं। देश को चलाने वाले राजनेता 100 फीसदी बेइमान है, लेकिन वह इमानदारी का लबादा ओड़े हैं। ऐसा नहीं की जनता जानती नहीं है, सब जानती है, लेकिन वह विरोध नहीं करती है। अब उसे अपनी चुप्पी तोडऩे की आवश्यकता है।
आलोक श्रीवास्तव ने कहा कि पत्रिका आज चाहती है कि अधिवक्ता अपना पेशा छोड़ राजनीति में कूदे, हां वह यही चाहते है कि पहले के दौर में अच्छे बुद्धिजीवियों को जनता चुनाव लड़ाती थी, उन्हें अपने कांधे पर बिठाती थी, लेकिन आज के राजनेता पुलिसवालों के कांधे पर चढ़ते हैं। चाहे वह कांग्रेस के हों, या भाजपा के। अच्छे समाजसेवकों को राजनीति में लाना होगा, तभी राजनीतिक सुचिता की बात संभव है।
अरविंद शर्मा का कहना है कि हमें स्वच्छ राजनीतिक पिलर युवा पीढ़ी के माध्यम से खड़े करना होंगे। आज आवश्यकता है कि अच्छे युवाओं का प्रोत्साहन किया जाए और उन्हें राजनीति में लाया जाए तभी सुधार की कुछ गुजाइंश बनती है।
वरिष्ठ अधिवक्ता गजेंद्र चौबे ने कहा कि पिछले कई दशकों से अच्छे राजनीतिकों की कमी सभी दलों में महसूस की जा रही है, क्योंकि निम्नस्तर के राजनीतिक चरणामृत के माध्यम से टिकट ले आते हैं और जो अच्छे व सदाचारी है, वह कतार में खड़े-खड़े थककर बैठ जाते हैं। जिससे वर्तमान में केवल राजनीतिक अस्वच्छता का बोलबाला है। जिससे जमीन से जुड़े कार्यकर्ता और नेताओं का राजनीतिक कैरियर खत्म हो चुका है।
अधिवक्ता परषोत्तम चौबे का कहना है कि राजनीतिक स्वच्छता के लिए संविधान में संशोधनों की आवश्यकता है। कड़े चुनाव सुधार व चुनाव लडऩे की कड़ी आर्हताएं लागू किया जाना आवश्यक होने के साथ शिक्षा का स्तर रखना आवश्यक है। जब एक चतुर्थ श्रेणी की पोस्ट के लिए योग्यता मांगी जाती है तो हम पर पांच साल राज करने वाले की योग्यता के मापदंड भी होना चाहिए। तभी राजनीति स्वच्छ हो सकती है।
मुख्तार जाफरी ने कहा कि जब हम वस्तुओं यहां तक अखबारों का चुनाव देखपरख करते हैं तो हमें विधायक, सांसद सहित अन्य निर्वाचित होने वाले जनप्रतिनिधियों का चुनाव भी इसी तरह करना चाहिए। तभी जाकर हम स्वच्छ राजनीति के उद्देश्य प्राप्त कर सकते हैं।
कुलदीप मिश्रा का कहना है कि वर्तमान की राजनीति में सैकड़ों धनानंद हो गए हैं, जिनके पतन के लिए अब चाणक्य की आवश्यकता है। तभी जाकर हम चंद्रगुप्त जैसे सीधे सच्चे को सत्ता पर बैठा सकते हैं।
अरविंद तिवारी ने कहा कि राजनीतिक स्वच्छता और सदाचार के लिए समाज में फैली कुरीतियों से भी पार पाना होगा। राजनीति से धन, बल, शराब सहित अन्य व्यसनों से दूरी बनाने वालों को चुनना होगा। इनके अलावा हेमंत पाठक, योगेंद्र राठौर, अनिल कुमार अहिरवार, शरद प्यासी, सौरभ अयाची ने भी संबोधित किया।
इनकी रही मौजूदगी
अब्दुल करीम, नितिन मिश्रा, कपिल नायक, मदन जैन, सुधीर पांडेय, बाबूलाल अहिरवार, ओमप्रकाश रैकवार, राकेश कुमार शर्मा, द्वारका प्रसाद पटेल, खुमान सिंह, नरेंद्र शुक्ला, राजीव नेमा, डीआर रौतेला, अजय राय, कपिल सोनी, राजुल श्रीवास्तव, अमान साहू, धर्मेंद्र सिंह राजपूत, पवन चौराहा, मुरारी खरे, नितेश तिवारी, अमित विश्वकर्मा, नरेंद्र कुमार दाहिया, शिवशंकर राय, कृष्ण कुमार श्रीवास्तव, विनोद कुमार अग्रवाल, कमल सिंह ठाकुर, कौशलेंद्र पांडेय, विनोद असाटी, राजेंद्र प्रसाद श्रीवास्तव, मदन कुमार जैन, मृत्युंजय हजारी, इरशाद खान, आनंद श्रीवास्तव, आनंद श्रीवास्तव, लक्ष्मण सिंह, अब्दुल जहीर कुरैशी, सुधीर दुबे, मुकेश जैन सहित करीब 235 अधिवक्ताओं की मौजूदगी रही।

MP/CG लाइव टीवी

Ad Block is Banned