खतरनाक साबित हो सकते हैं महानगरों से आने वाले मजदूर

नहीं हो रही बाहर से आने वाले लोगों की कोरोना वायरस की जांच

By: lamikant tiwari

Published: 14 Mar 2020, 09:01 PM IST

दमोह. देश भर में कोरोना वायरस को लेकर प्रशासन अलर्ट है, लेकिन जिले में केवल कागजी कार्रवाई में ही सुरक्षा दिखाई दे रही है। महानगरों में मजदूरी करने वाले लोग हर दिन बड़ी तादाद में वापस अपने गावों में लौट रहे हैं। लेकिन उनकी जांच नहीं होने से कोरोना वायरस का खतरा बना हुआ है। जिला अस्पताल में भले ही कोरोना वायरस को लेकर डॉक्टर्स ने तमाम तरह से उपचार की सुविधाएं कर लीं हों, लेकिन जांच नहीं होने से कोरोना का खतरा बना हुआ है।
जिले के प्रत्येक ब्लॉक के कई ग्रामीण अंचलों से अभी भी बड़ी तादाद में लोग गांव में रोजगार नहीं मिलने से बाहर मजदूरी करने जाते हैं। जो होली पर्व के बाद से लगातार वापस गांवों में लौट रहे हैं। जिनके स्वास्थ्य का परीक्षण नहीं हो पा रहा है।
पंचायतों से 30 फीसदी लोगों का हो रहा आना-जाना
जिले की ४८९ पंचायतों में से करीब ३० फीसदी लोग अभी भी बाहर जाकर मजदूरी करने के लिए विवश हैं। ग्रामीण अंचलों में देखने मिल रहा है कि ३० फीसदी आदिवासी, व बंजारा सहित दलित वर्ग के लोग गांव में काम नहीं मिलने से महानगरों में मजदूरी करने जाते हैं। इनमें से अधिकांशत: दिल्ली, राजस्थान में जयपुर तथा पंजाब में मजदूरी करने जाते हैं। जिसमें दिल्ली में जाने वाले मजदूरों की संख्या सबसे अधिक होती है। जिले के कनकपुरा, बर्धा, चौरइया, रजपुरा, नारायणपुरा, पटेरा क्षेत्र के देवडोंगरा, सगौनी, पटेरिया, जबेरा क्षेत्र में माला, सिंगपुर, सिंग्रामपुर, पथरिया में जेरठ सहित तेंदूखेड़ा व अन्य क्षेत्रों में ऐसे कई गांव हैं जहां के ग्रामीणजन मजदूरी के लिए बाहर गए हुए हैं जो बड़ी तादाद में कोरोना के भय से वापस लौटने लगे हैं। बर्धा के पूर्व सरपंच प्रदीप गुप्ता का कहना है कि पंचायतों से करीब १ हजार ग्रामीणजन बाहर गए हुए हैं। जिसमें से पिछले ८ दिनों के भीतर करीब ३० लोग लौट आए हैं और वह गांव में ही रहने लगे हैं। हालांकि उनमें कोराना के लक्षण दिखाई नहीं दे रहे। लेकिन यदि अन्य लोग जो वापस आ रहे हैं अगर उनके स्वास्थ्य परीक्षण पर प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया तो निश्चित ही किसी बड़ी आपदा को आने से रोक पाना मुश्किल हो जाएगा।

प्रशासन को ध्यान रखना जरूरी -
डॉ. दिवाकर पटैल का कहना है कि कोरोना वायरस हर किसी के लिए खतरनाक है। बाहर से आने वाले मजदूर वर्ग के लोग जो महानगरों से अपने घरों में वापस लौट रहे हैं। सबसे पहले उन पर नजर रखना जरूरी है। यदि कहीं धोखे से एक मरीज भी जिले में आ गया और उसका स्वास्थ्य परीक्षण नहीं किया गया तो यह तय मानकर चलिए कि उससे काफी नुकसान हो सकता है। क्योंकि इसमें अभी तक कोई अलग से दवा का आविष्कार नहीं हो सका है। जिससे नियंत्रण किया जा सके। केवल बचाव ही इलाज होता है। इसमें बाहर से आने वालों का एक बार टेस्ट होना जरूरी है। उसके बाद ही उन्हें गांवों में प्रवेश दिया जाए तो बेहतर होगा।

ऐसे करें बचाव -
आरएमओ डॉ. दिवाकर पटैल ने बताया कि भले ही जिले में अभी तक एक भी मरीज नहीं पाया गया है। लेकिन लोगों को सर्तकता बरतना जरुरी है। सबसे पहले तो हाथ मिलाना बंद करें। किसी से भी बात करने के दौरान एक मीटर का फासला रखें। हर ३० मिनट बाद हाथ धोएं। अल्कोहल वाले सेनिटाइजर से बचाव इस्तेमाल करें। खांसने, छींकने के दौरान टिश्यू या फिर रुमाल का उपयोग करें। जुखाम वाले व्यक्ति से दूर रहें। मास्क का उपयोग करें, किसी के मिलने बात करने के दौरान नरुमाल, तौलिया बगैरह से हमेशा नाक मुंह को ढंककर रखें।

तैयार है किट -
जिला अस्पताल में कोरोना वायरस की किट डॉक्टर्स व कर्मचारियों को पहनने के लिए पर्याप्त हैं। अगर कोई रोगी आता है तो जांच के दौरान पहनी जाने वाली किट सहित मॉकड्रिल की गई है। जिससे अगर कोई मरीज आता है तो किस तरह से उसकी जांच के दौरान सावधानियां रखना होंगी। लोगों को जुखाम होने पर तुरंत ही सतर्कता बरतना चाहिए। हालांकि पहले की अपेक्षा अब सामान्य सी सर्दी होने पर भी लोग जिला अस्पताल में आकर जांच करा रहे हैं यह अच्छी बात है। क्योंकि अगर एक भी मरीज शहर में आ गया तो संख्या बढऩे में वक्त नहीं लगेगा।
डॉ. दिवाकर पटैल - आरएमओ जिला अस्पताल

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