अरे...ये क्या दक्षिण बस्तर में लोगों के साथ साथ जवान भी हो रहे इस बीमारी का शिकार

अंदरूनी इलाको के जवानो अच्छे दिन अभी तक नहीं आए है। कभी जवान नक्सलियों द्वारा शहीद कर दिए जाते है या कभी खुद ही आत्म हत्या कर लेते है।

By: ajay shrivastav

Published: 18 Aug 2017, 03:49 PM IST

दंतेवाड़ा. जिले भर में स्वाइन फ्लू की दहशत पिछले एक पखवाड़े से कायम है। दहशत का कम होने की बजाय लगातार बढ़ती ही जा रही है। आलम यह है कि डॉक्टर भी रिस्क लेने की बजाय मरीजों को रेफर कर रहे हैं। इधर एक स्कूल की शिक्षिका की विशाखापटनम के लैब से निगेटिव रिर्पोट आई है। इसकी पुष्टि अधिकारी कर रहे हैं। वहीं मेकॉज भेजे गए जवान और बंदी की रिपोर्ट का इंतजार हैं।

स्वाइन फ्लू की सी- केटेगरी का मरीज बताकर
दो दिन में दो नए मरीजों को मेकॉज रेफर किया गया। दोनों ही मरीजों को स्वाइन फ्लू होने की आशंका जताई जा रही है। बुधवार की शाम एक बंदी और गुरुवार को सीएएफ कैंप के एक जवान को स्वाइन फ्लू की सी- केटेगरी का मरीज बताकर मेकॉज रेफर किया गया।

स्वाइन फ्लू से एक मौत की अफवाह
इधर लगातार स्वाइन फ्लू की दहशत बढऩे से जिला प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है। स्वास्थ्य अमला को पूरी सतर्कता बरतने की हिदायत दी गई है। स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए रियायत दर पर टीकाकरण करने की तैयारी भी स्वास्थ विभाग कर रहा है। स्वाइन फ्लू से एक मौत की अफवाह के बाद स्वास्थ्य अमला किरंदुल को टारगेट कर रहा था।

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पूरे जिले में जागरूकता शिविर लगाने के साथ
जागरूकता और स्वास्थ्य शिविर लगा कर इससे बचाव के उपाय लोगों को बताए जा रहे हैं। इस दौरान स्वाइन फ्लू के संदिग्ध भी मिल रहे हैं। स्वास्थ्य टीम किरंदुल सहित पूरे जिले में जागरूकता शिविर लगाने के साथ बचाव के दवा बांट रहा है। कलक्टर सौरभ कुमार का कहना है कि किरंदुल सहित जिले के चिन्हित स्थलों पर रियायती दर पर स्वाइन फ्लू का टीकाकरण कराया जाएगा। किरंदुल से रायुपर रेफर किए गए भाई-बहन में से एक में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। रायपुर में उपचार के बाद उसे स्वस्थ्य बताया जा रहा है।

गायब मरीज को खुद खोजने गए थे अधिकारी
स्वाइन फ्लू की दहशत का आलम यह है कि स्वास्थ्य विभाग भी कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। बिना डिस्चार्ज के हॉस्पिटल से गायब मरीज को खोजने गुरुवार को टीम उसके गांव पहुंच गई। बताया गया कि टिकनपाल के लक्ष्मण सर्दी-जुकाम और बुखार के चलते हॉस्पिटल में भर्ती था। 14 अगस्त को वह स्टॉफ को जानकारी दिए बिना ही घर चला गया। इसके बाद हॉस्पिटल प्रबंधन की चिंता बढ़ गई और उसे खोजने गुरुवार को सीएचएमओ डॉ. एचएल ठाकुर कर्मचारियों के साथ खुद उसके गांव पहुंचे। वहीं सीएस की टीम भी टिकनपाल गई थी। आखिर लक्ष्मण मिला तो पता चला कि वह टीबी मरीज है।

सुअरों की धरपकड़ होगी
जिला प्रशासन ने स्वच्छता और सुअरों की धरपकड़ के लिए नगरीय प्रशासकों को निर्देशित किया गया है। किरंदुल की दो बहनों में से एक पॉजीटिव पाई गई थी, लेकिन अब वह स्वस्थ है। टेमीफ्लू के टेबलेट मंगवा लिए गए हैं। किरंदुल नगर
में ही नहीं आस-पास के ग्रामीण इलाकों में भी जिला प्रशासन स्वास्थ कैंप लगाने का दावा कर रहा है।

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