अपने आराध्य को बचाने का आंदोलन हो गया खत्म, लेकिन अभियान अभी भी है जारी

अपने आराध्य को बचाने का आंदोलन हो गया खत्म, लेकिन अभियान अभी भी है जारी

Badal Dewangan | Updated: 14 Jun 2019, 11:45:14 AM (IST) Dantewada, Dantewada, Chhattisgarh, India

आंदोलन (Movement) की शुरुआत (Start) से अंत (End) तक पत्रिका ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए पाठकों को अंतिम समय तक अपडेट दिया। बाकी अखबारों को पीछे छोड़ते हुए हमने तीन दिन तक लगातार बैलाडीला और बचेली से लेट नाइट कवरेज दिया।

जगदलपुर. संयुक्त पंचायत संघर्ष समिति के अनुसार मांगें सरकार (Government) ने पूरी कर दी हैं, लेकिन त्वरित जांच पर सरकार (Government) राजी नहीं हुई। सरकार (Government) को उनके कहने पर 15 दिन का समय दिया गया है। अब अगर मांग पूरी नहीं हुई तो नए सिरे से आंदोलन (Movement) की रूपरेखा तय की जा सकती है। इस बीच दंतेवाड़ा कलक्टर (Collector) टोपेश्वर वर्मा ने गुरुवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि शासन के आदेश पर 11 तारीख को ही जांच दल गठित कर दिया गया था। जांच का काम आगे बढ़ गया है। एसडीएम (SDM) के नेतृत्व में ग्रामसभा की जांच की जा रही है। जो भी तथ्य ग्राम सभा से जुड़े होंगे, उन्हें सबके सामने लाया जाएगा। आंदोलन की नौबत नहीं आएगी।

आंदोलन के वो सात दिन ...
पहला दिन : 6 जून : पदयात्रा कर 200 गांवों से पहुंचे आदिवासी
आंदोलन का आगाज 7 जून को हुआ जब 200 गांवों के हजारों आदिवासी संयुक्त पंचायत संघर्ष समिति के आह्वान पर पदयात्रा कर बैलाडीला पहुंचे। इस दिन कोई प्रदर्शन नहीं हुआ पर प्रशासन को बड़े आंदोलन की भनक लग चुकी थी।

दूसरा दिन : 7 जून : भरी हुंकार- बोले आस्था से हो रहा खिलवाड़
बैलाडीला के हिरोली गेट को दूसरे दिन आंदोलनकारियों ने जाम कर दिया। उसके सामने ही पंडाल लगाकर धरना शुरू कर दिया और कहा कि अडानी को खदान देना गलत है ये हमारी आस्था से खिलवाड़ है।

तीसरा दिन : 8 जून : जोगी पहुंचे और आंदोलनकारियों में भरा जोश
तीसरे दिन आंदोलन से पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी भी जुड़ गए। उन्होंने सरकार को घेरते हुए आदिवासियों की आस्था से खिलवाड़ बंद करने की मांग की। जोगी के आंदोलन (Movememt) में शामिल होने से आदिवासियों में जोश बढ़ा।

चौथा दिन : 9 जून : खनन के लिए हजारों पेड़ों की कटाई
आंदोलन से जुड़े लोग पुलिस प्रशासन की मनाही के बावजूद अजीत जोगी के साथ नंदराज पर्वत (Nandiraj Pahadi) पर पहुंचे तो पाया कि यहां खनन के लिए हजारों पेड़ काटे जा चुके हैं। इसी के साथ एक बड़ा खुलासा हुआ।

पांचवा दिन : 10 जून : बढऩे लगी आंदोलनकारियों की परेशानी
आंदोलन के पांचवें दिन तक आदिवासियों (Tribals) की तकलीफ बढऩे लगी। सैकड़ों गर्मी की वजह से बीमार होकर अस्पताल में भर्ती हो चुके थे, वहीं जो बचे थे वे खाने, सोने और पानी की कमी से जूझ रहे थे।

छठवां दिन : 11 जून : मांग पूरी पर नहीं माने, बचेली पहुंचा आंदोलन
रायपुर में सांसद (Member Of Parliament) दीपक बैज के साथ जनप्रतिनिधियों की बैठक हुई। सीएम ने मांगें मान ली पर आदिवासी देर शाम फर्जी ग्राम सभा की जांच तीन दिन में कराने पर अड़ गए। रात १२ बजे तक आंदोलन खत्म करवाने का प्रयास होता रहा।

सातवां दिन : 12 जून : अल्टीमेटम पूरा पर देर रात नहीं हटे
दंतेवाड़ा जिला प्रशासन (Administration) ने रात १२ बजे से पहले आंदोलन स्थल छोडऩे का अल्टीमेटम दिया पर आदिवासी नहीं हटे। बैलाडीला और बचेली में देर रात भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया।

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