दक्षिण बस्तर में मिला काले सिर वाला दुर्लभ प्रजाति का सांप, 2011 में यहीं तक्षक नाग भी दिखा था

- दुर्लभ प्रजाति के डूमेरिल्स ब्लैक हेडेड स्नैक के तौर पर की इसकी पहचान
- दुर्लभ सांप को जार्डन्स मेनी टूथ्ड स्नैक के नाम से भी जाना जाता

By: Ashish Gupta

Published: 09 Jan 2021, 08:08 PM IST

दंतेवाड़ा/शैलेन्द्र ठाकुर. जैव विविधता के लिए मशहूर दक्षिण बस्तर में काले सिर वाला दुर्लभ प्रजाति का सर्प मिला। शक्तिपीठ दंतेश्वरी मन्दिर परिसर में मिले इस सर्प को स्थानीय स्टाफ ने पहले तो नाग का सपोला समझा और इसे सुरक्षित निकालने के लिए सर्प विशेषज्ञ अक्षय मिश्रा को बुलाया। अक्षय व उनकी टीम ने आकर सर्प को देखा तो इसकी पहचान दुर्लभ प्रजाति के डूमेरिल्स ब्लैक हेडेड स्नैक के तौर पर की।

अक्षय के मुताबिक इसे जार्डन्स मेनी टूथ्ड स्नैक के नाम से भी जाना जाता है। ये विषहीन होते हैं और छिपकली, गिरगिट व अन्य छोटे सांपों का शिकार करते है। इसकी लंबाई 30 सेमी तक होती है। अक्षय के मुताबिक दंतेवाड़ा के जंगल जीवों की विविध प्रजातियों से भरे पड़े हैं, पर शोध की कमी के कारण राष्ट्रीय स्तर पर जिले का नाम नहीं आ पाता। यह सर्प आम जनजीवन में बहुत कम देखने को मिलते हैं। इससे पहले इसे जनवरी 2019 में देखा गया था।

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चकमा देने में महारत हासिल
अपनी सुरक्षा के लिए ये इंडियन कोरल स्नेक की नकल करते हैं। कोरल स्नेक विषेला सांप होता है और उसकी नकल करके ये शिकारियों को चकमा दे पाते हैं।

2011 में दुर्लभ प्रजाति का तक्षक नाग भी दिखा था
बैलाडीला की पहाड़ियों में दुर्लभ प्रजाति के जीव जंतुओं की भरमार है। यहां का प्राकृतिक पर्यावास जीव जंतुओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। ज्ञात हो कि तक्षक नाग जिसे काला जीन सुंदरी नाग के नाम से भी जाना जाता है, को वर्ष 2011 में सरीसृप विज्ञानी डॉ. एचकेएस गजेन्द्र ने बैलाडीला के जंगलों में खोजा था। आपको बता दे कि 'तक्षक नाग' का भारतीय मिथक कोष में भी उल्लेख है कि राजा परीक्षित की मौत इसी सर्प के काटने से हुई थी। मौत के तीसरे दिन विधवा महारानी द्वारा सांप को श्रापित किया गया कि मेरे सुहाग के पांचों रंग तुम्हें लग जाय।

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इस तरह से सिंदूर, बिंदिया, महावर, काजल, चूड़ी का रंग तक्षक नाग को लग जाने के कारण बहुत ही आकर्षक व सुन्दर दिखता है। ऐसा माना जाता है कि ये सर्प बेहद विषेला होता है। परन्तु अध्ययन के पश्चात पाया गया कि यह मध्यम वर्गीय विषैला है। इन सांपो का रहवासी क्षेत्र में दिखना चिंता का विषय है।

वनों और पहाड़ी क्षेत्रों की हो रही अंधाधुंध कटाई ने इनके जीवन पर संकट खड़ा कर दिया है। वक्त रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो इस प्रजाति को लुप्त होने में समय नहीं लगेगा। जरूरत है कि शोधकर्ता इस ओर ध्यान देकर इन दुर्लभ जीवों के विषय में जानकारी प्राप्त कर संरक्षण के प्रति कोई कदम उठाए।

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