कोरोना महामारी के खात्मे व विश्वशांति के लिए महायज्ञ हुआ


108 मंडली भक्तामर महामंडल विधान एवं पिच्छी परिवर्तन हुआ

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By: संजय तोमर

Published: 23 Nov 2020, 12:25 AM IST

दतिया. जीवन में एक बार किसी साधु व आर्यिका की पुरानी पिच्छी लेने का प्रयास जरूर करना क्योंकि ये पुरानी पिच्छी ही जीवन के अंत तक नई पिच्छी बनकर हमारे हाथ में आयेगी। पुरानी पिच्छी लेने वाला श्रावक होता है तो नई पिच्छी लेने वाला आर्यिका व साधु होती है। यह बात मुनिश्री प्रतीक सागर महाराज ने रविवार को सोनागिर स्थित विशाल धर्मशाला में दिगंबर जैन जागरण युवा संघ रजिस्टर मुंबई के तत्वाधान में आयोजित भक्तंामर महा विधान एवं पिच्छी परिवर्तन समारोह में धर्मसभा कोसंबोधित करते हुए व्यक्त कही।

मुनिश्री ने आगे कहा कि मेरी पिच्छी का परिवर्तन आपके जीवन के परिवतज़्न का कारण बने। मुझे मेरे गुरूदेव आचार्यश्री पुष्पदंत सागर महाराज ने मेरे हाथों में पिच्छी देकर मेरा जीवन ही बदल दिया या यॅू कहॅू कि उन्होने पिच्छी देकर मेरा जीवन अनमोल बना दिया। आज ये पिच्छी ही मेरी पहचान है। ये पिच्छी ही जैन धर्म के जिन शासन की शान है।

इन्हें मिली मुनिश्री की पुरानी पिच्छिका
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन आदर्श कलम ने बताया कि मुनिश्री प्रतीक सागर महाराज की नवीन एवं पुरानी पिच्छी लेने का सौभाग्य महेंद्र कुमार अकित जैन दतिया परिवार को मिला। आचार्यश्री धर्मभूषणसागर महाराज की नवीन पिच्छी मुकेश जैन शिवपुरी को एवं पुरानी संतोष जैन इटारसी परिवार को प्राप्त हुई। राजस्थान पाली के संगीत पार्टी महेंद्र जैन ने जब भजन पिच्छी रे पिच्छी इतना बता तूने कौन सा पुण्य किया है जो गुरूवर ने हाथो में थाम लिया है...यह भजन सुनाया तो सभागार में जैन समाज के लोग झूम उठे साथ ही सजी हुई नवनिर्मित पिच्छी को सिर पर रखकर नृत्य किया।

हुई शांतिधारा
भगवान आदिनाथ का अभिषेक अनेक श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से किया। इस अवसर पर विश्वशांति के लिए शांतिधारा की गई। कार्यक्रम में मुनिश्री प्रतीक सागर महाराज ने मंत्रोच्चारण किया।
5400 सौ श्रीफल से रचाया भक्तामर विधान
जैन समाज प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि भक्तामर महामंडल महाअर्चना विधान में सौधर्म इंद्र के लिए मुख्य भक्तामर मंढना सहित 108 परिवारो के इंद्र-इंद्राणियो ने केशरिया वस्त्र धारण कर अष्ट्रद्रव्य से भक्तामर महाअर्चना विधान की महिमा का गुणगान कर पूजा अर्चना करते हुए मुनिश्री ने मंत्र उच्चारण कर भगवान आदिनाथ के चरणों में 108 महाअघ्र्य मढऩे पर समर्पित किए। विधान में 5400 सौ श्रीफल समर्पित किए गए। शाम को 1008 दीपों से आरती के साथ डांडिया ग्रुप नृत्य किया गया।

संजय तोमर Desk
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