ओडीएफ में मदद नहीं करने वालों पर दर्ज होगी एफआईआर

सक्षम होने के बाद भी नहीं बनवा रहे शौचालय

By: monu sahu

Published: 09 Dec 2017, 10:59 PM IST

दतिया. चार साल से ज्यादा गुजर जाने के बाद भी जिले के सभी गांव खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) नहीं हो सके। गरीब तबके के लोगों को तो सरकार ने पैसा दिया और वे शौचालय बनवा रहे हैं। लेकिन जिले के करीब डेढ़ हजार लोग अपने घरों में सक्षम होने के बाद भी शौचालय नहीं बनवाना चाहते, ऐसे लोगों के खिलाफ जल्द ही सख्त कार्रवाई होने वाली है। पहले तो उन्हें समझाइश दी जाएगी और न मानने पर नोटिस और फिर जुर्माना और इसके बाद भी न माने तो थाने में एफआईआर कराई जाएगी। ताकि उन्हें शासन की मदद न करने के जुर्म में सजा दी जा सके।

पिछले करीब चार साल से स्वच्छ भारत मिशन चल रहा है। इसके तहत हर गांव को खुले में शौच से मुक्त करने का लक्ष्य केन्द्र सरकार ने रखा है। इसी के चलते राज्य सरकारों को भी जिम्मेदारी दी गई है कि वे अपने राज्य के सभी जिलों के हर गांव को ओडीएफ बनाए। इसके लिए ग्रामीण विकास विभाग लगातार मशक्कत भी कर रहा है लेकिन गांव के दबंग और सक्षम किस्म के लोग इसमें बाधा बने हुए हैं। पैसा होने के बाद भी वे अपने घरों में शौचालय नहीं बनवाना चाहते। इसके पीछे राजनीतिक प्रतिद्वंदता सामने आ रही है। जो प्रत्याशी सरपंच पद पर जीत गया उसके विरोधी शौचालय नहीं बनवाना चाह रहे ताकि जीते हुए सरपंच का लक्ष्य पूरा न हो और उसे परेशानी का सामना करना पड़े। इस तरह के जिले में करीब डेढ़ हजार लोग हैं, जिनकी खेती हो रही है, गाडिय़ां चल रही है, लेकिन घर में शौचालय नहीं बनवाना चाहते।

तीन महीने में हासिल करना है लक्ष्य

केन्द्र सरकार के निर्देश पर राज्य सरकार को लक्ष्य प्राप्त हुआ है कि मार्च 2018 तक जिले का हर गांव ओडीएफ हो जाये। इसके लिए ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक पिछले साल से इस काम में लगे हुए हैं। स्वच्छता मिशन के तहत जो लोग सरकारी मदद के पात्र हैं उन्हें तो १२-१२ हजार रुपए शौचालय बनाने के लिए दिए और काफी हद तक उन्होंने शौचालय बनवाये भी। लेकिन ऐसे लोग शौचालय नहीं बनवाना चाह रहे हैं जो गरीबी के दायरे में नहीं आते हैं और खुद शौचालय बनवाने में सक्षम हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ जल्द ही विभाग मुहिम चलाने वाला है। पहले तो उन्हें समझाइश दी जाएगी, न मानने पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।

दतिया की हालत बदतर

जिले के तीन ब्लॉकों में से दतिया की हालत सबसे ज्यादा खराब है। यहां 598 अपात्र लोगों ने शौचालय नहीं बनवाए हैं। भाण्डेर में यह संख्या 184 है। वहीं सेंवढ़ा में 758 लोगों ने शौचालय नहीं बनवाये हैं। अंदाजा लगाया जा सकता है कि गाड़ी चलाने के लिए और सैर-सपाटे के लिए इन लोगों के पास पैसा है। लेकिन घर की बहु-बेटियां शौच के लिए, खेतों में जाये इसे रोकने के लिए इनके पास पैसा नहीं हैं। यह सरपंचों के प्रति केवल राजनीतिक प्रतिद्वंदता है।

जिले में करीब डेढ़ हजार लोग ऐसे हैं जो शासकीय योजना के तहत राशि लेने के पात्र नहीं है, यानि शौचालय बनवाने में खुद ही सक्षम हैंं। बावजूद इसके उन्होंने शौचालय नहीं बनवाए हैं। पहले तो उन्हें समझाइश दी जाएगी, न मानने पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।

संदीप माकिन, सीईओ, जिला पंचायत दतिया

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