एनवीएसयू बंद, महिला व बच्चों के डॉक्टर नहीं होने से होती परेशानी

पत्रिका अभियान - अस्पतालों में सुविधाओं की जरूरत

भांडेर. नगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति चिंतनीय है। अस्पताल में न तो डॉक्टर हैं और न ही आवश्यक संसाधन। डॉक्टरों के अभाव में मरीजों को समुचित उपचार नहीं मिल पा रहा है। सबसे ज्यादा चिंताजनक हालत बाल एवं महिला रोग विभाग की है। दोनों ही विभागों में डॉक्टरों का अभाव है। इस अभाव को दूर करने के लिए शासन स्तर पर कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।


भांडेर विधानसभा चुनाव में हाल ही में विधानसभा उप निर्वाचन हुआ है। उप निर्वाचन के दौरान मुख्यमंत्री से लेकर भाजपा के नेताओं व मंत्रियों के दौरे हुए। मंच से भाषणों के दौरान मंचों से घोषणाएं की गई कि भांडेर का चहुंमुखी विकास होगा। चुनाव संपन्न होने के बाद स्थिति जस की तस है। भांडेर क्षेत्र के लोगों को सरकारी अस्पताल में सही ढंग से प्राथमिक उपचार भी नहीं मिल पा रहा है। अस्पताल में उपचार न मिलने की वजह से मरीजों को उपचार के लिए झांसी या फिर दतिया जाना पड़ता है।
उपचुनाव में आई थी महिला डॉक्टर
भांडेर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लंबे समय से महिला डॉक्टर पदस्थ किए जाने की मांग चल रही है। महिला चिकित्सक न होने से महिलाओं को परेशानी होती है। प्रसव के दौरान महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है। उपचुनाव के दौरान शासन ने यहां एक महिला चिकित्सक को पदस्थ किया गया था। हाल ही उक्त महिला चिकित्सक का भांडेर से स्थानांतरण हो गया है। महिला चिकित्सक का स्थानांतरण होने के बाद यह पद फिर खाली हो गया है।


एनवीएसयू में रहता है ताला


महिला चिकित्सक के साथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बच्चों का भी विशेषज्ञ डॉक्टर पदस्थ नहीं है। नवजात शिशुओं की देखभाल के लिए शासन ने यहां नवजात गहन शिशु चिकित्सा इकाई (एनवीएसयू) की स्थापना की है, लेकिन बाल रोग विशेषज्ञ न होने से इस इकाई में अक्सर ताला पड़ा रहता है। बाल रोग विशेषज्ञ न होने की बजह से गहन शिशु चिकित्सा इकाई इन दिनों कोरोना टीकाकरण के काम आ रही है।


दो डॉक्टरों के भरोसे है अस्पताल


सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों के छह पद स्वीकृत है। छह पदों के विरुद्ध वर्तमान में दो ही डॉक्टर कार्यरत हैं। एक डॉक्टर के पास ब्लॉक मेडिकल ऑफीसर का चार्ज होने की बजह से उनकी व्यस्तता ज्यादा रहती है। कई बार दुर्घटना हो जाने या किसी की मौत हो जाने पर पोस्टमार्टम के दौरान एक डॉक्टर के व्यस्त रहने या अवकाश पर रहने के दौरान पूरा अस्पताल एक ही डॉक्टर के भरोसे रहता है।


मरीजों की नहीं कोई सुरक्षा


भांडेर अस्पताल में मरीजों की सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। पहले अस्पताल में मरीजों की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगे हुए थे। यह सीसीटीवी कैमरे भी चोरी हो चुके हैं। उल्लेखनीय है कि अस्पताल में प्रतिदिन ओपीडी में 150-200 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं और मरीजों को भर्ती करने के लिए 30 बिस्तरों की सुविधा उपलब्ध है, लेकिन भर्ती मरीजों की सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है।


अस्पताल में स्टाफ का अभाव है। स्टाफ के अभाव में समस्या तो आती है। डॉक्टरों के पद भरे जाने के लिए समय-समय पर वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराते हैं और पत्र भी लिख चुके हैं।
डॉ. आरएस परिहार, ब्लॉक मेडिकल आफीसर भांडेर

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महेंद्र राजोरे Desk
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