जिला चिकित्सालय की खराब लिफ्ट बनी मरीजों की परेशानी का सबब

स्ट्रेचर या फिर पीठ पर लाद के ले जाना पड़ रहा है मरीजों को

दतिया. जिला चिकित्सालय परिसर में भले ही मेटरनिटी विंग समेत अन्य विभागों के लिए नई बिल्डिंग का निर्माण कर दिया है। इस इमारत में मरीजों व अटेंडरों की सुविधा के लिए लिफ्ट भी लगाई गई थी, लेकिन वह करीब एक साल से खराब पड़ी है। मरीजों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। खास बात यह है कि इसी बिल्डिंग में मेटरनिटी, अस्थि, चिल्ड्रन समेत अन्य वॉर्ड हैं।


जिला चिकित्सालय में मेटरनिटी विंग अलग से बना दी गई है। भले ही ग्राउंड फ्लोर पर है, लेकिन इसके पहले माले, दूसरे और तीसरे माले पर चिल्ड्रन वार्ड, अस्थि रोग, फीमेल वार्ड समेत अन्य ऐसे विभाग हैं, जहां मरीजों को भर्ती किया जाता है। महिलाओं, बुजुर्गों और अस्थि रोग से पीडि़त लोगों को यहां भर्ती की सुविधा है। स्वास्थ्य प्रशासन ने यहां लिफ्ट लगाई थी, लेकिन यह लिफ्ट लंबे समय से खराब है। मरीजों को या तो रैंप के माध्यम से या फिर उन्हें अटेंडर स्ट्रेचर या पीठ पर लादकर ले जाने को मजबूर हैं। चाहे कितना भी भारी सामान हो अटेंडरों को पीठ पर लादकर ले जाना पड़ता है।

सामान्य लोग भी हांफ जाते हैं

लिफ्ट खराब होने से हो रही परेशानी की हकीकत जानने पत्रिका टीम मौके पर पहुंची। यहां पाया कि हड्डी रोग से पीडि़त लोग या फिर फीमेल वार्ड में भर्ती मरीज व उनके अटेंडरों को तीन मंजिल तक सीढिय़ों के माध्यम से चढऩा पड़ता है। मरीज तो परेशान होते ही हैं बुजुर्ग महिलाएं सामान्य अटेंडर भी हांफ जाते हैं। पत्रिका टीम ने पाया कि मरीज आकाश अपने भर्ती कराने के लिए सामान पीठ पर लेकर जा रहा है। उसे लेकर बिना लिफ्ट के ही ऊपर चढऩा पड़ा। यही हाल उदगवां से आए प्रकाश को रैंप के माध्यम से अपने परिजन को ऊपर ले जाना पड़ा।


जल्द ठीक कराई जाएगी

जिला चिकित्सालय की एक लिफ्ट खराब हुई है उसको जल्दी ही ठीक करा दिया जाएगा। इसके लिए करीब पौने चार लाख रुपए स्वीकृत हो चुके हैं।
डॉ. एसएन उदयपुरिया, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी

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महेंद्र राजोरे Desk
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