ताक पर कोरोना गाइडलाइन रख सड़कों पर दौड़ रहे वाहन

न सोशल डिस्टेंसिंग का पालन और न ही किए जा रहे मास्क चैक

दतिया. कोरोना संक्रमण लगातार फैल रहा है। जिले में भी ऐहतियायत के तौर पर धारा 144 लगी हुई है पर इस धारा के प्रावधानों को बस व ट्रक ऑपरेटर ताक पर रखे हुए हैं। न तो यात्री बसों में कोरोना गाइडलाइन का पालन किया जा रहा है न ही अन्य वाहनों में। दो गज दूरी-मास्क है जरूरी, जुमले केवल कागजों या फिर मुनादी में सिमट कर रह गए हैं। इसी लापरवाही का नतीजा है कि जिले में कोरोना के मरीज बढ़ रहे हैं।


जिले में कोरोना के संक्रमित लगातार बढ़ रहे हैं पर संक्रमण को रोकने के लिए जो प्रयास किए जा रहे हैं वे नाकाफी साबित हो रहे हैं। शहर या अन्य हिस्सों में कोरोना गाइडलाइन का पालन किया जा रहा या नहीं इसके बारे में जानने के लिए पत्रिका की टीम ने सड़कों पर जाकर जायजा लिया तो पाया कि अधिकांश स्थलों पर कोरोना गाइडलाइन को ताक पर रखा हुआ है। न तो यात्री बसों में गाइडलाइन पर सख्ती है न ही अन्य वाहनों में। यात्री बसों में लोग इस तरह बैठाए जा रहे हैं कि कोरोना नाम का कोई वायरस सक्रिय है ही नहीं, जबकि देश व प्रदेश में संक्रमण को लेकर लोग चिंता में डूबे जा रहे हैं। किसी भी रूट पर देखा जाए अधिकांश मामलों में बसों या अन्य यात्री वाहनों में कोरोना गाइडलाइन का पालन नहीं किया जा रहा है।


करीब दो हफ्ते पहले से लगी हुई धारा

कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए कलेक्टर संजय कुमार ने करीब दो हफ्ते पहलेे धारा 144 लगाई थी। जिम्मेदारों को ताकीद किया था कि वे संक्रमण फैलने से रोकने के लिए कारगर प्रयास करें। बिना मास्क वालों को पकड़ें। रोको-टोको अभियाम चलाएं पर अधिकांश हालात में न तो किसी को रोका जा रहा है न ही कोरोना गाइडलाइन का पालन करने टोका जा रहा है। यात्री बसों में क्षमता से ज्यादा सवारियां बैठाने के बारे में बात करने जब जिला परिवहन अधिकारी स्वाति पाठक से बात करनी चाही तो कई बार कॉल करने पर भी रिसीव नहीं किया गया।


दृष्य-1


यात्री बसों में बस ऑपरेटर किस तरह से कोरोना गाइडलाइन की धज्जियां उड़ा रहे हैं। यह जानने के लिए पत्रिका टीम बुधवार की शाम झांसी चुंगी के पास जा पहुंची। यहां एक यात्री बस में अंदर झांका तो पाया कि बस में सारी सीटें भरी हुई हैं। यात्री एक दूसरे से सटकर तो बैठे ही हैं। गैलरी में भी यात्री खड़े हुए हैं। न तो दो यात्रियों के बीच में दो गज की दूरी है न ही अधिकांश के मुंह पर मास्क है। यही नहीं बस के गेट पर लटककर भी लोग यात्रा कर रहे हैं। कंडक्टर उसी अकड़ में टिकट काट रहा है।


दृष्य-2


पत्रिका की टीम ने शहर के बस स्टैंड पर जाकर देखा तो पाया कि एक ट्रक मजदूरों को भूसे की तरह भरकर ले जा रहा है। सड़क पर आने-जाने वाले हर जिम्मेदार के सामने यह दृष्य आता है पर कोरोना गाइडलाइन का पालन कराने वालों को वाहनों में भरे क्षमता से ज्यादा लोग नहीं दिख रहे। साफ देखा गया कि न तो इस ट्रक में बैठे मजदूरों के बीच दूरी है न ही किसी के मुंह पर मास्क है।

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महेंद्र राजोरे Desk
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