बाजरे के भाव कमजोर, सरसों के लिए डीएपी की कमी

किसानों की बढ़ती मुसीबतें: बिजली की कटौती भी कोढ़ में खाज बनी

By: Rajendra Jain

Published: 11 Oct 2021, 07:17 AM IST

दौसा. जिले में किसानों को बाजरे के पर्याप्त भाव नहीं मिल रहे हैं। वहीं सरसों की बुवाई के डीएपी नहीं मिल रहा है। साथ ही देश में कोयले की कमी से हुए बिजली संकट का सामने भी करना पड़ रहा है। ऐसे में एक साथ तीन मुसीबतों से किसानों को जूझना पड़ रहा है।
जिला मुख्यालय स्थित मानगंज में रविवार को पुलिस की मौजूदगी में डीएपी का वितरण कराया गया, फिर भी कई किसानों को नहीं मिल सका। जिनको मिला उनके लिए वह पर्याप्त साबित नहीं हुआ।
जिले में इस वर्ष डीएपी खाद की किल्लत के कारण किसानों को सरसों की बुवाई में परेशानी आ रही है। जहां भी डीएपी वितरण की सूचना मिलती है तो किसानों की भीड़ उमड़ पड़ती है। कृषि विभाग डीएपी के विकल्प के रूप में किसानों को सिंगल सुपर फास्टेट का उपयोग करने की सलाह दे रहा है, लेकिन किसानों को यह रास नहीं आ रही। यही कारण है कि जिले में इस बार सरसों की बुवाई मात्र 25 हजार हैक्टेयर भूमि में हो सकी है, जबकि 63 हजार हैक्टेयर का लक्ष्य है।

चहेतों को वितरण का आरोप
मानगंज में रविवार को डीएपी लेने के लिए गहमा-गहमी रही। किसानों की भीड़ को देखते हुए पुलिस को बुलाया गया। कृषि उप निदेशक ने टीम के साथ मोर्चा संभाला, इसके बाद भी हालात काबू में नहीं रहे। किसानों ने आरोप लगाया कि चहेतों को ही डीएपी दिया जा रहा है। वितरण की कोई पारदर्शी व्यवस्था नहीं है। प्रेमपुरा के रामखिलाड़ी मीना ने बताया कि वह पांच दिन से चक्कर लगा रहा है, लेकिन डीएपी नहीं मिल रहा। महेश्वरा कलां के विजेन्द्र गुर्जर ने कहा कि उनका आधार कार्ड ही नहीं ले रहे। राधाकिशन मीना, कल्याणसहाय मीना सहित अन्य किसानों ने वितरण में भेदभाव का आरोप लगाया।

चार फर्मों को नोटिस
जिले में खाद-बीज के चार लाइसेंसधारी दुकानदारों को डीएपी वितरण में शिकायत एवं रिकॉर्ड नहीं बताने के मामले में कृषि विभाग ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
कृषि विभाग के उपनिदेशक शंकरलाल मीना ने बताया कि रावत एग्रो फर्म कुण्डल, राजकुमार खाद बीज भण्डार भाण्डारेज तथा लोकेश खादबीज भण्डार व श्रीकृष्ण खादबीज भण्डार महुवा को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। उपनिदेशक ने बताया कि यदि इन्होंने संतोषपूर्वक जवाब नहीं दिया तो लाइसेंस निरस्त किया जाएगा।


एमएसपी 2250, मिल रहे 1500
इन दिनों किसान मंडी में बाजरे को बेच रहे हैं, लेकिन भाव कम मिलने से मायूस हैं। सरकार ने कहने को तो न्यूनतम समर्थन मूल्य 2250 रुपए तय कर रखा है, लेकिन सरकारी खरीद नहीं हो रही। ऐसे में खरीद केन्द्रों पर ताले लटके देखकर किसान लौट जाते हैं। वहीं बाजार में 1300 से अधिकतम 1800 का भाव मिल रहा है। महंगे डीजल के दौर में भावों की कमी से किसान मायूस हंै।

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