कैम्परों एवं टैंकरों के भरोसे है पेयजल व्यवस्था

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By: gaurav khandelwal

Published: 19 Jan 2019, 08:39 AM IST

दौसा. जिला मुख्यालय पर बसने वाले लोगों को जलदाय विभाग के नलों में तीन-चार दिन में एक बार पानी मिल रहा है, ऐसे में यहां के लोगों की पेयजल व्यवस्था निजी कैम्पर व टैंकरों के भरोसे चल रही है। उल्लेखनीय है कि जलदाय विभाग के अधिकारियों की मानें तो दौसा शहर में विभाग प्रतिदिन 1 करोड़ 20 लाख लीटर पानी की प्रतिदिन की आवश्यकता बता रहा है, जबकि प्रतिदिन उत्पादन मात्र 45 लाख लीटर ही हो रहा है। ऐसे में शेष पानी की पूर्ति लोग निजी टैंकरों, कैम्परों एवं बोरवेलों से कर रहे हैं। पानी धड़ल्ले से 20 रुपए प्रति कैम्पर बेचा जा रहा है।

 


इन गांवों से आते हैं टैंकर


जिला मुख्यालय पर प्रतिदिन आसपास के गांव छतरीवाली ढाणी, सीर्रा ढाणी, महेश्वरा, सूरजपुरा, राजपुरा, नामोलाव, डगलाव सहित कई गांवों से लोग टैंकरों में पानी भर कर सुबह ही आ जाते हैं। यह टैंकर आधिकांशतया शहर के उन इलाकों में बिकने जाते हैं जिन कॉलोनियों में जलदाय विभाग की पाइप लाइनें नहीं है। कई लोगों ने तो अपने कुओं से टैंकरों में पानी भर कर उसको शहर में बेचने को रोजगार का जरिया बना लिया है। ये लोग एक टैंकर को ढाई सौ से तीन सौ रुपए के बीच में बेच रहे हैं। कोई टैंकर चालक दो तो कोई तीन चक्कर लगा रहा है।

 

 

सादा पानी को ठण्डा कर कैम्परों में बेच रहे


शहर में सुबह-सुबह लोडिंग वाहनों में टंकियों में ठण्डा पानी भर कर उसमें से दस लीटर के कैम्परों में ठण्डा पानी भर कर दुकानों एवं मकानों पर बेचने का कारोबार भी दौसा में पिछले कई दिनों से चल रहा है। कहने को तो यह पानी फिल्टर कर कैम्परों में भरा जाता है, लेकिन इस पानी की न कभी जलदाय विभाग ने जांच कराई और न ही स्वास्थ्य विभाग ने। जबकि यह पानी धड़ल्ले से 20 रुपए प्रति कैम्पर बेचा जा रहा है।

gaurav khandelwal Desk
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