चौथमाता व पालेमाता मंदिर है पापड़दा कस्बे की शान

आजादी से पहले ही खुल गया था आठवीं तक का स्कूल

By: Rajendra Jain

Published: 05 Apr 2021, 12:24 PM IST

दौसा. जिला के बड़े कस्बे में शुमार पापड़दा कस्बा विकास की चाल में बहुत ही धीमा रहा। इससे छोटे कस्बों को तहसील एवं उपखण्ड मुख्यालयों का दर्जा मिल गया, लेकिन आज भी पापड़दा का नक्शा गांव जैसा ही है। इस वर्ष जरूर कस्बे को उप तहसील बनाने की घोषण हुई है। पानी की कमी विकास में बाधक है।
आजादी से पहले ही खुल गया था आठवीं तक का स्कूल
कस्बे में 1925 में प्राथमिक एवं 1945 आठवीं एवं 1975 में माध्यमिक विद्यालय खुल गया था और दो दशक पहले प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में क्रमोन्नत हो गया, लेकिन अब जाकर कस्बे को उप तहसील का दर्जा मिला है। फिर भी गांव में कई मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। यहां कहने को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र हैं, लेकिन सुविधाएं कुछ भी नहीं है। प्रथम श्रेणी का पशु चिकित्सालय होने के बावजूद भी पशु चिकित्सालय भवन तक नहीं है। आवागमन के वाहनों का अभाव है। कस्बे में होकर एमडीआर गुजर रहा है, लेकिन ग्रामीण सड़क से भी बदतर है। छात्राओं के लिए कॉलेज होनी चाहिए थी, लेकिन दसवीं से अधिक भी क्रमोन्नत नहीं हो रहा है।
चौथ का बरवाड़ा के बाद दूसरा बड़ा चौथमाता का मंदिर : कस्बे में चौथमाता विशाल मंदिर है। कस्बेवासियों का कहना है कि यहां का चौथमाता का मंदिर चौथ का बरवाड़ा के बाद दूसरा सबसे बड़ा मंदिर है। कस्बेवासियों को माने तो यह मंदिर कस्बे में सैंकड़ों वर्ष पुराना है। मंदिर की रंगाई - पुताई नहीं होने के कारण यह पुराना दिखाई देता है। इस मंदिर में चौथ के व्रत के दिन पापड़दा कस्बे के अलावा आसपास के करीब आधा दर्जन गांवों की महिलाएं पूजा-अर्चना करने आती है। पुजारी गिर्राज मिश्रा ने बताया कि मंदिर करीब तीन सौ वर्ष पुराना है। इसी प्रकार कस्बे में मीना समाज के बैपलावत गौत्र की कुलदेवी पाले माता का विशाल मंदिर है। पापड़दा निवासी कल्ली पटेल ने बताया कि इस मंदिर के जीर्णोद्वार में करीब दो करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। विभिन्न प्रकार के नक्काशीवाले पत्थरों से बना इतना भव्य मंदिर लोगों की आस्था का केन्द्र बना है।
किदंवतियों के अनुसार मीना समाज के बैपलावत गौत्र के लोग जहां भी बसे हुए हंै। उनका निकास पापड़दा से ही है। हालांकि मीणा समाज का बैपलावत गोत्र का बड़ा गांव मलवास भी है। यहां भी पाले माता का विशाल मंदिर है।

कचहरी में होता था न्याय
आजादी से पहले कुछ - कुछ बड़े गांवों में ही न्यायालय हुआ करते थे। कस्बे के बीचोंबीच कचहरी बनी हुई है।
इसी भवन में न्यायालय चलता था। जिसमें पंच - पटेल एवं न्यायाधीश न्याय करते थे। हालांकि यह भवन आज भी मौजूद है, लेकिन मरम्मत के अभाव में जीर्ण-शीर्ण हो चुका है। यदि इस भवन की मरम्मत हो जाए तो यह किसी भी विभाग के काम आ सकता है। हालांकि कुछ वर्षों पहले तो इसमें स्कूल चला करती थी।

चारो कौनों में हैं बालाजी व शिव मंदिर
पापड़दा एक ऐसा कस्बा है, जिसके चारों कौनों में बालाजी के मंदिर एवं उनमें शिवालय है। इन मंदिरों का नाम अलग अलग है। कस्बे के उत्तरी दिशा में वीर हनुमान मंदिर, पश्चिमी दिशा में बड़ा बालाजी मंदिर, पूर्वी दिशा में मंदिर तिबारेवाला, दक्षिण में छतरीवाला बालाजी मंदिर है। चौथ माता मंदिर के सामने भी दुश्मन पछाड़ मंदिर है। हालांकि कस्बे में अन्य भी करीब दो दर्जन मंदिर हैं।

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