दौसा जिला - नगर निकायों में महिलाओं का रहेगा दबदबा

Dausa district - women will dominate the civic bodies.....निकाय प्रमुखों की लॉटरी: जिले में चेयरमैन की चारों सीट नारी शक्ति के हवाले

दौसा. नगर निकाय संस्थाओं के अध्यक्ष पद को लेकर रविवार शाम जयपुर में निकाली गई लॉटरी में दौसा जिले की सभी निकाय प्रमुखों की सीट महिलाओं के लिए आरक्षित हुई। दौसा नगर परिषद अध्यक्ष पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित हुआ। वहीं लालसोट में सामान्य महिला, बांदीकुई में एससी महिला व महुवा सीट ओबीसी महिला वर्ग के लिए नगर पालिका अध्यक्ष पद रिजर्व हुई। दौसा जिले के महुवा में इसी वर्ष तथा शेष निकायों में अगले साल चुनाव प्रस्तावित हैं। इधर, लॉटरी निकलने के साथ ही राजनीतिक गहमा-गहमी बढ़ गई।

Dausa district - women will dominate the civic bodies.... आरक्षण के अनुसार कईदावेदारों के चेहरे मुरझा गए तो कई उत्साहित हो गए। सामान्य सीटों पर तो अधिकतर दावेदार खुश होकर समीकरणों पर चर्चा तक करने लगे। जिले के सभी प्रमुख पद पर महिलाओं का दबदबा रहने से अब नेता अपनी महिला परिजनों के नाम आगे करने की सोच रहे हैं।
Dausa district - women will dominate the civic bodies..... डेढ़ दशक बाद फिर सामान्य महिला के लिए सीट आरक्षित
दौसा नगर परिषद में सभापति का पद 15 वर्षबाद फिर से सामान्य महिला के आरक्षित हुआ है। वर्ष 2005 में भाजपा की पुष्पा घोषी अध्यक्ष बनी थी। हालांकि बाद में अविश्वास प्रस्ताव लाकर शांतिदेवी मिश्र अध्यक्ष पद पर काबिज हुई। इसके बाद 2010 में जनता ने अध्यक्ष पद पर सीधा मतदान कर चुनाव किया था। तब सीट ओबीसी आरक्षित थी तथा भाजपा के राजकुमार जायसवाल ने जीत दर्ज की। इसके बाद 2015 में सामान्य सीट पर भी भाजपा के ही राजकुमार जायसवाल ने सफलता पाई। वर्ष 2000 में अध्यक्ष पद एससी महिला के लिए आरक्षित था। तब बार-बार उठापटक चली थी। वर्ष 1990 में सामान्य सीट पर सुरेश घोषी अध्यक्ष पद पर निर्वाचित हुए थे। इसके बाद अविश्वास प्रस्ताव आने पर कांग्रेस के सत्यनारायण चौधरी अध्यक्ष बने। 1980 में भी दौसा सीट सामान्य थी। तब बाबूलाल जैन व लक्ष्मणस्वरूप शर्मा आदि चेयरमैन बने थे। 1985 से 90 तक चुनाव नहीं हुए तथा उपखण्ड अधिकारी प्रशासक नियुक्त रहे।
चलती है उठापटक
दौसा निकाय में दशकों से उठापटक का इतिहास रहा है। 2010 से 15 तक ही एक ही चेयरमैन रहे, अन्यथा बार-बार अविश्वास प्रस्ताव लाकर बदलाव होता रहा। निकाय चुनाव दलों के बंधन से भी परे रहा है। राजनीतिक दल बहुमत में होने के बाद भी विरोधी सत्ता से बेदखल करने में कामयाब रहे। निर्दलीयों भी अपना अहम रोल अदा करते हैं।

Dausa district - women will dominate the civic bodies.....बांदीकुई में धरे रह गए नेताओं के अरमान
बांदीकुई . स्थानीय निकाय चेयरमैन सीट अनुसूचित जाति महिला वर्ग के लिए आरक्षित होने के साथ ही राजनीतिक हलचल शुरू हो गई है। सीट महिला वर्ग के लिए आरक्षित हो जाने से काफी समय से चेयरमैन की सीट हथियाने के लिए टकटकी लगाकर बैठे कई नेताओं के अरमानों पर भी पानी फिर गया है। हालांकि यह सीट 2015 में सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित हुई थी। जिस पर लक्ष्मी जायसवाल चेयरमैन की सीट पर काबिज हुई। इससे पहले 2010 में पालिका सीट अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित हुई थी। जिस पर रमेशचंद बैरवा प्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा चुनाव जीतकर पालिका चेयरमैन की सीट पर काबिज हुए थे। पालिका में वर्ष 2000 से 2004 तक कमला देवी वर्मा, 19 फरवरी 2004 से 7 जुलाई 2004 तक विद्या देवी सलोटिया, 8 जुलाई 2004 से 1 अगस्त 2004 तक जगदीशनारायण सेठी, 2 अगस्त 2004 से 26 अगस्त 2005 तक विद्या देवी सलोटिया, 27 अगस्त 2005 से 2 दिसम्बर 2006 तक प्रभुदयाल डंगायच, 2 दिसम्बर से 29 दिसम्बर 2006 तक सावित्री देवी गुर्जर, 29 दिसम्बर 2006 से 20 अगस्त 2010 तक सत्यनारायण शाहरा एवं 26 अगस्त 2010 से 2015 तक रमेशचंद बैरवा एवं 2015 में लक्ष्मी जायसवाल चेयरमैन के लिए निर्वाचित हुई। अब आगामी अगस्त 2020 में होने वाली स्थानीय निकाय के चुनाव को लेकर लॉटरी निकलने के साथ ही राजनीतिक सरगर्मी शुरू हो गई है। नगरपालिका परिसीमन के तहत अब वार्ड भी बढकऱ 40 हो गए हैं। जबकि पहले 30 वार्ड थे।

Dausa district - women will dominate the civic bodies.... दस साल बाद सीट पर फिर महिला
लालसोट. आगामी वर्ष होने वाले पालिका चुनावों के लिए लालसोट नगर पालिका अध्यक्ष पद 15 साल बाद दोबारा सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षित हो गया है। गौरतलब है कि इससे पूर्व वर्ष 2005 में हुए चुनावों में भी पालिका अध्यक्ष पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित था। तब यहां भाजपा की उमा बोहरा पालिका अध्यक्ष पद पर वर्ष 2005 से 2010 तक काबिज रही थी। ऐसे में अब दस साल बाद फिर से सीट पर महिला काबिज होगी। वर्ष 2010 में यह पद सामान्य पुरुष के लिए आरक्षित हुआ तो कांग्रेस के दिग्गज नेता स्व. रामप्रसाद मिश्र निर्वाचित हुए और उनके निधन के बाद हुए उप चुनावों मेें उनके ही पुत्र दिनेश निर्वाचित हुए थेे। वर्ष 2015 में हुए चुनावों में यह पद ओबीसी पुरुष के लिए आरक्षित हुआ था और चुनावों में पालिका अध्यक्ष पद पर भाजपा के जगदीश सैनी काबिज हुए। उनका कार्यकाल आगामी वर्ष पूरा होगा। जिसके बाद होने वाले आगामी चुनावों के लिए यह लाटरी डाली गई है। दूसरी ओर पालिका चुनावों की लाटरी को लेकर दिन भर लोगों में भारी उत्सुकता बनी रही और लाटरी प्रक्रिया के बारे मेें टीवी व सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी प्राप्त करते नजर आए। (नि.प्र.)

Dausa district - women will dominate the civic bodies ...चेयरमैन की लॉटरी के बाद अब ओबीसी महिला आरक्षित 5 व 10 नंबर वार्ड पर निगाहें
महुवा. नगर पालिका चेयरमैन पद के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) महिला की सीट आरक्षित होने के बाद उपखंड मुख्यालय से चुनाव लडऩे की तैयारी कर रहे सामान्य, एसटी एवं एससी वर्ग के लिए प्रत्याशियों के सपनों पर पानी फिर गया। वहीं ओबीसी वर्ग के नेताओं में खुशी देखी गई। खास बात यह है कि महुवा नगर पालिका क्षेत्र में मात्र दो ही वार्ड ओबीसी महिला के लिए आरक्षित हैं। ये 5 व 10 नंबर वार्ड पर अब लोगों की खास निगाह रहेगी। यहां पार्षद बनने के लिए भी खासी मारामारी होने की उम्मीद है। हालांकि हाईब्रिड मॉडल से भी चेयरमैन बनाया जा सकता है, लेकिन फिलहाल शहर के दो वार्ड अब खास हो गए हैं।
महुवा नगरपालिका चेयरमैन चुनाव में मुख्यालय पर राजनीति से जुड़े हुए परिवारों के लोग अपनी- अपनी ताल ठोक कर दावेदारी पेश करने में लगे थे। दावेदार कई दिनों से जोड़-तोड़ बैठा रहे थे। अब उनको मायूसी हाथ लगी है। ओबीसी के दावेदारों में उत्साह का संचार हुआ है।
गौरतलब है कि 18 सितम्बर को निकाली गई वार्ड की लॉटरी में वार्ड संख्या 13, 14 एवं 25 को एससी के लिए आरक्षित किया गया। इसमें से वार्ड संख्या 13 एससी महिला के लिए आरक्षित है। इसी प्रकार अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए वार्ड संख्या 5, 6, 9, 10 व 19 आरक्षित है। इनमें से वार्ड संख्या 5 व 10 महिलाओं के लिए आरक्षित है। वहीं वार्ड संख्या 1,2,3,4, 7,8, 11, 12, 15, 16, 17, 18, 20, 21, 22, 23 व 24 वार्ड सामान्य हैं। इनमें से वार्ड संख्या 12, 16, 17,20 व 21 सामान्य महिलाओं के लिए आरक्षित है। महुवा में पहली बार नगरपालिका के चुनाव हो रहे हैं तथा कुल 25 वार्ड हैं। अब तक महुवा ग्राम पंचायत थी तथा सरपंच पद के चुनाव सामान्य आरक्षित सीट पर हुए थे।

Rajendra Jain
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