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Video: दौसा सांसद की पहल, चार बालिका स्कूल बनेंगी रोल मॉडल

दौसा सांसद हरीशचंद्र मीना की पहल पर फ्लेगशिप प्रोग्राम 'बालिका विकास कार्यक्रम' का आगाज हुआ।
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दौसा

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Gaurav Kumar Khandelwal

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Updated: 11 Sep 2017, 9:15 PM IST

dausa mp education program

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दौसा. सांसद हरीशचंद्र मीना की पहल पर सोमवार को फ्लेगशिप प्रोग्राम 'बालिका विकास कार्यक्रमÓ का आगाज हुआ। इसके तहत सांसद ने जिले के 4 ब्लॉक से एक-एक राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय का चयन कर उनको मॉडल बनाने पर कार्य शुरू किया। कार्यक्रम का उद्देश्य बालिकाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य व पोषण पर समग्र रूप से कार्यकर उन्हें सक्षम बनाना है।


जिला कलक्ट्रेट सभागार में आयोजित कार्यक्रम में सांसद ने कहा कि राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय मंडावर, बसवा, मंडावरी व हापावास में 1 माह के भीतर विद्यालयों में जो भी जरूरतें हैं, उनको पूरा किया जाएगा।

बालिकाओं का हेल्थ कार्ड बनाया जाएगा। अभिभावक-अध्यापक बैठक होगी तथा साप्ताहिक टेस्ट से शिक्षा का स्तर देखा जाएगा। करीब 1 हजार बालिकाओं व उनके परिवारों को लाभान्वित किया जाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि ये चारों स्कूल रोल मॉडल बनेंगी तथा यहां की छात्राएं उच्च स्तर तक जाएंगी। बालिकाएं विकास का प्रतीक बनेंगी।


जिला कलक्टर नरेशकुमार शर्मा ने कहा कि सांसद के इस फ्लेगशिप कार्यक्रम में जिला प्रशासन पूरा सहयोग करेगा। जिले की शख्सियतों को भी विद्यालयों में ले जाकर बालिकाओं का मनोबल बढ़ाया जाएगा। विभागीय अधिकारी भी बार-बार स्कूलों में जाकर मॉनिटरिंग करेंगे। समारोह में जर्मनी से आई डायना, तीरंदाज खिलाड़ी राजंती मीना, एडवोकेट राजेश शर्मा ने भी विचार व्यक्त किए।

इस दौरान जिला परिषद सीईओ राजेन्द्रसिंह कविया, जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक डॉ. प्रेमवती शर्मा, सांसद की पत्नी पुनीत मीना, सीएमएचओ डॉ. पीआर मीना, महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यवाहक उपनिदेशक सरोज मीना, शिक्षाविद् डॉ. शंकरलाल शर्मा सहित चारों स्कूलों का स्टाफ, छात्राएं सहित कई प्रबुद्धजन मौजूद थे।

भाटी ने मलाला का वीडियो दिखाकर समझाया


कार्यक्रम में शिक्षा विशेषज्ञ महाराजा सवाईमानसिंह विद्यालय जयपुर की प्रिंसिपल कृष्णा भाटी ने कई उदाहरण देकर शिक्षा का महत्व समझाया। सबसे पहले उन्होंने नोबेल पुरस्कार विजेता पाकिस्तानी छात्रा मलाला युसुफजई का उदाहरण किया। भाटी ने बताया कि मलाला का वीडियो दिखाकर बताया कि किस तरह एक छात्रा ने अत्यंत विपरीत परिस्थितियों में शिक्षा पाई।

इसके अलावा उन्होंने मैरीकॉम, दो महिला सैन्य अधिकारी, दंगल गर्ल गीता फोगाट, झांसी की रानी लक्ष्मीबाई आदि का भी उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा की राह में आने वाली मुश्किलों से नहीं घबराकर छात्राओं को हिम्मत व हौंसला रखना चाहिए। भाटी ने कहा कि शिक्षा केवल किताबी ज्ञान के लिए नहीं, अपितु ऑलराउंड डवलपमेंट के लिए ग्रहण करनी चाहिए। अगर कोई पढऩे में कमजोर है तो वह खेल, वाकचातुर्य सहित अन्य कलाओं से आगे बढ़ सकती है।

संतुलित आहार की दी जानकारी


न्यूट्रीशियन डॉ. मेधावी गौतम ने कार्यक्रम में संतुलित आहार की जानकारी दी। उन्होंने छात्राओं को अंकुरित आहार, अनार ज्यूस, चकुंदर, हरी सब्जी, खट्टे फल, दूध, दही, पनीर, दाल, पोहा, बाजरा, गुड आदि के सेवन से होने वाले लाभ बताए। एनिमिया को रोकने के लिए मानव शरीर में आवश्यक तत्व बताए।

दौसा की हालत कमजोर


कार्यक्रम में सोशल एक्टिविस्ट अधिराज ने प्रोजेक्टर पर फ्लेगशिप कार्यक्रम की पूरी जानकारी दी। भारत की कई अन्य देशों से तुलना की। इस दौरान उन्होंने बताया कि दौसा ग्रामीण में 30.8 प्रतिशत महिलाएं कुपोषण का शिकार हैं। यह आंकड़ा पूरे देश के औसत से भी 8 प्रतिशत कम है। वहीं मात्र 22.9 प्रतिशत छात्राएं हैं तो दसवीं तक ही पढ़कर रह जाती हैं।

सैम्पल सर्वे के अनुसार उन्होंने बताया कि 80.7 प्रतिशत लड़कियों के भाई हैं, लेकिन 11.4 प्रतिशत ही पानी लेने जाने जैसे मामूली काम में सहयोग करते हैं। 61.3 प्रतिशत बालिकाएं पानी लेने जाती हैं। 72.8 प्रतिशत बालिकाओं ने 3 साल से पाठ्यपुस्तक के अलावा अन्य कोई पुस्तक नहीं पढ़ी है। मात्र 9.3 प्रतिशत लड़कियां कम्प्यूटर चलाना तथा 2.4 प्रतिशत ही इंटरनेट चलाना जानती हैं। 13 में से मात्र 3 स्कूल की बालिकाओं ने आयरन की गोली ली हैं। जुलाई व अगस्त में तो वितरण ही नहीं होना पाया गया। 60 प्रतिशत लड़कियां भविष्य में क्या करना चाहती हैं, ये भी नहीं बता पाई।