हड़ताल पर चिकित्सक, झोलाछापों की मौज

गत 6 नवम्बर से हड़ताल पर चिकित्सक

By: gaurav khandelwal

Published: 12 Nov 2017, 08:23 PM IST

दौसा. जिले में सेवारत चिकित्सकों की हड़ताल सातवें दिन भी जारी रही। ऐसे झोलाझाप एवं नीम हकीम भी मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाकर अच्छी खासी रकम ऐंठ रहे हैं, लेकिन इन पर लगाम लगाने वाला कोई नजर नहीं आ रहा है। दूसरी ओर हड़ताल पर चल रहा एक चिकित्सक रविवार को काम पर आ गया।

 


जानकारी के अनुसार सेवारत चिकित्सकों के हड़ताल पर होने से 201 में से केवल दस ही काम पर आए। हालांकि रविवार को मण्डावरी अस्पताल में डॉ. संजय पामेचा के ज्वॉइन करने से हड़ताल पर रहने वाले चिकित्सकों की संख्या 191 रह गई है। शनिवार को दो चिकित्सकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी, लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में चिकित्सकों के हड़ताल पर रहने से मरीजों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। गौरतलब है कि अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ की ओर से गत 6 नवम्बर से 33 सूत्री मांगों को लेकर हड़ताल की जा रही है।

 


तीन सौ सक्रिय


जिले में तीन सौ से अधिक झोलाझाप एवं नीम हकीम सक्रिय हैं। ऐसे में मजबूरी में मरीज इनके पास उपचार के लिए जा रहे हैं। मौसम परिवर्तन होने के कारण साधारण खांसी-जुकाम में भी ये तीन सौ से पांच सौ रुपए तक वसूल कर रहे हैं। इसके बावजूद चिकित्सा विभाग के अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।


प्रसव भी कम हुए


जिला अस्पताल में पहले रोजाना 30 से 40 महिलाओं के प्रसव होते थे, लेकिन वर्तमान में करीब एक दर्जन महिलाओं के ही प्रसव हो रहे हैं। सिजेरियन डिलेवरी तो हो ही नहीं रही है। ऐसे मामलों को रैफर किया जा रहा है।

 

पुलिस को नहीं मिल रहे चिकित्सक, गुप्त स्थानों पर गए चिकित्सक


दौसा. हड़ताल पर गए चिकित्सकों के खिलाफ रेस्मा लागू होने के बाद गिरफ्तारी के भय से गुप्त स्थानों पर गए चिकित्सकों में से पुलिस को रविवार तक कोई भी चिकित्सक नहीं मिल पाया है। इधर पुलिस की सख्ती से जो चिकित्सक जिले में थे, वे भी फरार हो गए। जिले के सभी थाना प्रभारी अपने-अपने इलाकों के चिकित्सालयों के चिकित्सकों के मोबाइल नम्बर जुटा रहे हैं। पुलिस ने अपने- अपने इलाकों में चिकित्सकों की गिरफ्तारी के लिए मुखबिर भी लगा रखे हैं, लेकिन अभी तक कोई कामयाबी नहीं मिल पाई है।


पुलिस अधीक्षक योगेश यादव ने बताया कि पुलिस को यदि कोई चिकित्सक को मिलता है तो पहले उसे ड्यूटी ज्वॉइन करने के लिए समझाया जाएगा। फिर भी नहीं मानने पर रेस्मा के तहत कार्रवाई की जाएगी। उल्लेखनीय है कि हड़ताल के बाद रेस्मा लागू होते ही चिकित्सक भूमिगत हो गए हैं। जिन चिकित्सकों के चैम्बरों एवं उनके आवासों पर मरीजों की कतार लगी रहती थी, वहां पर अब कोई दिखाई नहीं दे रहा है।

 


चिकित्सक के आते ही बढऩे लगा आउटडोर


लवाण. सेवारत चिकित्सकों के हड़ताल पर चले जाने से मरीज अस्पताल में आना ही भूल गए थे, लेकिन रविवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र लवाण में महिला चिकित्सक के बैठने मरीजों का आना जाना शुरू हो गया है। चिकित्सा प्रभारी विभा खण्डाल ने बताया कि पहले मात्र 10 से 15 मरीज ही आ रहे थे। रविवार को 40 से 50 मरीजों का आउटडोर रहा। केन्द्र में आने वाले मरीजों को इलाज के बिना नहीं जाने दिया जा रहा है। गौरतलब है कि जिला कलक्टर ने चिकित्सकों के हड़ताल पर चले जाने से जयपुर से विभा खण्डाल को लवाण सीएचसी में लगाया गया है। नायब तहसीलदार महेशचंद शर्मा ने बताया कि कस्बे में स्थिति में सुधार है। खानवास पीएचसी में भी चिकित्सक की व्यवस्था कराई जाएगी।

gaurav khandelwal Desk
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