समय पर होती समीक्षा तो असमय नहीं होती मौतें

पत्रिका टिप्पणी-अगर ऐसी तत्परता, गंभीरता मौत से पहले समय पर दिखाई होती तो असमय हमारी सात जिंदगियां मौत के आगोश में न समाती।

By: Mahesh Jain

Published: 11 Dec 2017, 09:27 AM IST

महेशकुमार जैन
ज यपुर आगरा नेशनल हाइवे पर भाण्डारेज मोड़ के निकट सडक़ हादसे में एक साथ सात मौत। शनिवार को जो हादसा हुआ वह दिल दहला देने वाला था। चार जनों की दौसा में मौत व अन्य तीन में से एक ने रास्ते में तो दो ने जयपुर में दम तोड़ दिया। भीषण हादसे के बाद रक्त रंजित हुए हाईवे से चिकित्सालय तक चीख-चित्कार थी। हादसा कई परिवारों को कभी ना भरने वाला ताजिंदगी का जख्म दे गया। दौसा जिले में हादसे तो वैसे आए दिन हो रहे हैं। कभी जिम्मेदारों की अनदेखी से ओवरलोड के कारण, कभी तेज गति में वाहन चलाने से तो कभी गलत साइड में ओवरटेक के चलते। लेकिन भाण्डारेज मोड़ के निकट हाइवे पर जो हादसा हुआ उसके पीछे हाइवे प्राधिकरण निर्माण कंपनी की कार्यशैली भी जिम्मेदार है।

 

कंपनी की लापरवाही व अनदेखी कई सवाल खड़े कर गई है। किसके आदेश से दौसा बायपास से खेड़ली मोड़ तक लगभग 6 किमी तक हाईवे पर एक ही साइड पर दोनों तरफ से वाहनों के आने व जाने की छूट दे दी गई। यह व्यवस्था गत 2 दिसंबर से कर रखी थी। जिस साइड से दोनों तरफ से वाहन गुजारे जा रहे थे उस पर न डिवाइडर की व्यवस्था की गई और ना ही कोई संकेतक लगाए गए हैं। इससे वाहन चालकों को दुर्घटना का अंदेशा सदैव बना हुआ है।

 

हाइवे को मौत का 'वेÓ बना दिया गया। निर्माण कंपनी द्वारा कार्य भी धीमी गति से किया जा रहा है। जो कार्य तीन दिन में पूरा होना था, वह सात दिन बाद भी पूरा नहीं हुआ। कार्य पूरा होने पर वन वे की सीमा भी घटाई जानी चाहिए वह नहीं घटाई, जबकि वनवे की सीमा आगे बढ़ा दी गई। हादसे के बाद लोगों का गुस्सा फूटा तो निर्माण कंपनी के अधिकारी व मजदूर सब भाग छूटे। पुलिस ने चार जनों को हिरासत में भी लिया है पूछताछ जारी है।

 

दूसरे दिन पुलिस अधीक्षक, नेशनल हाइवे, यातायात, प्रशासनिक सहित कई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचे और मौत के कारणों की समीक्षा की। प्रशासन ने भी आज आपात बैठक बुलाई है। अच्छी बात है। लेकिन सवाल यही है कि हाईवे पर हजारों लोग अपने वाहनों से निकल रहे हैं, जरा वहां भी देख लेना चाहिए था कि जहां निर्माण या मरम्मत कार्य चल रहा है। वहां कोई लापरवाही तो नहीं हो रही। मापदण्डों के अनुसार कार्य तो हो रहा है या नहीं। अगर ऐसी तत्परता, गंभीरता मौत से पहले समय पर दिखाई होती तो असमय हमारी सात जिंदगियां मौत के आगोश में न समाती।

Mahesh Jain Bureau Incharge
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