करोड़ों का बजट ठिकाने लगाने पर भी नहीं हो रहे कण्ठ तर

Even after setting a budget base of crores, there are no gusts-कागजों में संचालित पेयजल योजना मौके पर पड़ी हैं बंद

By: gaurav khandelwal

Published: 30 Jun 2020, 08:29 PM IST

बांदीकुई. जलदाय विभाग ने ग्रामीण क्षेत्र में लोगों के कण्ठ तर करने के लिए पेयजल योजनाओं के निर्माण पर करोड़ों रुपए खर्च कर दिए, लेकिन अधिकांश पेयजल योजनाएं बंद पड़ी होने से टंकियां सूखी पड़ी हुई हैं। ये योजनाएं कहीं अधूरी पड़ी हैं तो कहीं बंद पड़ी हैं। कई जगह तो ऐसी हैं जहां पाइप लाइन क्षतिग्रस्त होने से टंकियों में पानी नहीं पहुंच पा रहा है, लेकिन इन योजनाओं की सुध लेने वाला कोई नहीं है।
लोगों को बंूद-बूंद पानी के लिए तरसना पड़ रहा है।

Even after setting a budget base of crores, there are no gusts

कण्ठ तर करने के लिए मजबूरन जेब ढीली कर ही पानी खरीदकर घरेलू काम निपटाने पड़ रहे हैं। ऐसा लगता है कि जलदाय विभाग योजनाओं का निर्माण कराकर चालू करना ही भूल गया। जबकि अब तक ग्रामीण क्षेत्र में करोड़ों रुपए पेयजल पर खर्च हो चुके हैं, लेकिन इन योजनाओं के लाभ से ग्रामीण कोसों दूर हैं। इसके चलते जलदाय विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।


विभाग की लापरवाही कोढ़ में बनी खाज


जलदाय विभाग की ओर से वर्ष 2008 में गुढ़ाकटला में करीब 40 लाख की पेयजल योजना स्वीकृत कर नलकूप व टंकियों का निर्माण कराकर बिजली कनेक्शन भी कर दिया गया, लेकिन पाइप लाइन का नलकूप से टंकी तक जोडऩे का कार्य नहीं करने से यह योजना धूल फांक रही है। जबकि वर्ष 2009-10 में 25-25 लाख रुपए की लागत से द्वारापुरा, देलाड़ी, मानोता, मानोत्या की ढाणी अरनिया एवं मितरवाड़ी में टंकी एवं नलकूपों का निर्माण किया गया, लेकिन कहीं नलकूपों में पानी सूख गया। कहीं पाइप लाइन नहीं बिछाई गई। इससे टंकियां सूखी पड़ी हैं। जबकि विभाग ने वर्ष 2017 में टंकियों की कागजों में सफाई कराना दिखाया है और टंकियों में गत 5 वर्ष से पानी नहीं आ रहा है। ग्राम पंचायत गुल्लाना, केसरीसिंहपुरा, पंडितपुरा, गुल्लाना की थड़ी, बिवाई, ऊनबड़ा गांव-पामाड़ी, सुधारनपाड़ा-नांगल झामरवाड़ा में भी टंकियां सूखी पड़ी हुई हंै। ऐसे में ये टंकियां कोढ़ में खाज बनी हुई हैं।

आरओ प्लांट भी पड़े हैं बंद
जलदाय विभाग की ओर से लोगों को फ्लोराइडयुक्त पानी से निजात दिलाने के लिए वर्ष 2017 में बिवाई, बास बिवाई, उरवाड़ी, गुल्लाना एवं पीचूपाड़ा खुर्द सहित 15 जगहों पर आरओ प्लांट लगाए थे। इन प्लांट पर नलकूप निर्माण, मशीन, मोटर एवं टंकी लगाए जाने पर प्रति प्लांट 10 से 12 लाख रुपए खर्च किए गए। ऐसे में इन आरओ प्लांटों पर करीब डेढ़ करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, लेकिन अधिकांश प्लांट खराब पड़े हैं। इससे लोगों को खारा एवं फ्लोराइड युक्त पानी पीना पड़ रहा है। (प.सं.)

सुधार के किए जाएंगे प्रयास
जहां से भी पेयजल योजनाएं बंद होने की शिकायत आती है तो मौके पर जाकर जांच करते हैं। यदि कहीं पाइप लाइन क्षतिग्रस्त है या अन्य कमी है तो मरम्मत कराकर टंकियों में पानी पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे आमजन को राहत मिल सके। कुछ जगहों पर तो भूजल स्तर गिर जाने से नलकूप सूखने से टंकियां सूखी हैं। अब नए जलस्त्रोतों का निर्माण कराकर पानी सप्लाई में सुधार करने का प्रयास किया जाएगा।
-राजेश कुमार शर्मा, सहायक अभियंता बांदीकुई

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