बार-बार बदलती योजना, नहीं पड़ रही पार

बार-बार बदलती योजना, नहीं पड़ रही पार
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Mukesh Kumar Sharma | Publish: Feb, 09 2016 11:19:00 PM (IST) Dausa, Rajasthan, India

रोडवेज की आय बढ़ाने व कर्मचारियों को कार्य के प्रति जागरूक करने के लिए रोडवेज प्रशासन की ओर से चलाई

दौसा।रोडवेज की आय बढ़ाने व कर्मचारियों को कार्य के प्रति जागरूक करने के लिए रोडवेज प्रशासन की ओर से चलाई जाने वाली कोई भी योजना कारगर साबित नहीं हो रही है। इसके कारण योजना चलाने के कुछ माह या सालभर बाद ही रोडवेज को योजनाएं बंद करनी पड़ती पड़ती है। प्रशासन की ओर से आय बढ़ाने के लिए कर्मचारियों को हर तरह का प्रलोभन देने के बाद भी रोडवेज का घाटा कम नहीं हो रहा है।

यही कारण है कि आय बढ़ाने के लिए गत जनवरी माह से शुरू की गई 'मेरी बस मेरा रूट योजनाÓ भी औंधे मुंह गिर गई है। रोडवेज प्रशासन ने महज एक माह में ही योजना को बंद कर दिया है। ऐसे में अब रोडवेज ने मुख्यालय स्तर से ही कर्मचारियों का मार्ग निर्धारित करने का निर्णय किया है। इस निर्णय से रोडवेज को लाभ होता है या नहीं, यह तो योजना के शुरू होने के बाद पता चलेगा, लेकिन अभी तक चलाई गई योजनाएं रोडवेज का घाटा पाटने में कारगर साबित नहीं हुई है।

यह थी मेरी बस, मेरा रूट योजना


योजना के तहत प्रत्येक आगार स्तर पर एक समिति बनाई गई थी। इस समिति ने 75 प्रतिशत से कम यात्री भार वाले मार्गों के लिए यात्री भार व प्रति किलोमीटर आय का लक्ष्य निर्धारित कर परिचालकों से आवेदन मांगे थे। इसके बाद मांगानुसार मार्गों का वितरण किया गया था।  इच्छानुसार मार्ग लेने के बाद भी लक्ष्य प्राप्त नहीं करने पर आवंटित लक्ष्य से कम रही राशि परिचालक को अपनी जेब से चुकानी थी। ऐसे में यह योजना परिचालकों के लिए फायदे का कम तथा घाटे का सौदा अधिक साबित हुई।  परिचालकों ने इसमें रुचि नहीं दिखाई और योजना एक माह भी नहीं चल पाई।

यह भी है कारण

रोडवेज सूत्रों के अनुसार मनपसंद मार्ग लेने के बाद परिचालक उस मार्ग पर यात्रीभार व राजस्व बढ़ाने की ओर ज्यादा ध्यान नहीं दे रहे थे। उस मार्ग पर उन्हें यात्रीभार का पता था और वो उसी हिसाब से कार्य कर रहे थे। इसके अलावा जाने-पहचाने मार्ग पर बिना टिकट सवारी ले जाने पर भी नियंत्रण नहीं लग पा रहा था। ऐसे में मुख्यालय ने मनपसंद मार्ग देने के स्थान पर अब रोस्टर प्रणाली के आधार पर मुख्यालय पर स्तर से ही मार्ग निर्धारित करने का निर्णय किया है।

इन योजनाओं की भी हुई हालत खराब

रोडवेज प्रशासन ने घाटा कम करने के लिए जुलाई 2013 में निगमकर्मी नवीन प्रोत्साहन योजना शुरू की थी। इसमें मुख्यालय स्तर पर सम्बन्धित आगार के प्रत्येक मार्ग की अपेक्षित आय निर्धारित की गई थी। निर्धारित आय से अधिक राजस्व आय एकत्रित करने वाले चालक-परिचालकों सहित अन्य कर्मचारियों को 1 से 2 हजार रुपए तक प्रोत्साहन राशि दी जाती थी। इसी प्रकार आगार के मासिक राजस्व लक्ष्य व डीजल औसत में वृद्धि करने पर जोन मैनेजर सहित सम्बन्धित आगार अधिकारियों को भी प्रोत्साहन राशि का लाभ दिया जाता था। इसके अलावा लक्ष्य अर्जित नहीं करने वाले कर्मचारियों का पहले मार्ग बदला जाना था और उसके बाद भी काम नहीं करने पर दूसरे आगार में तबादला किया जाना था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कर्मचारियों के काम नहीं करने पर मुख्यालय ने पहले तबादला नीति को बदल दिया, लेकिन इसका भी कर्मचारियों पर असर नहीं पड़ा। ऐसे में मुख्यालय को यह योजना भी बंद करनी पड़ी।

मुख्यालय का निर्णय

 मेरी बस, मेरा रूट योजना में कर्मचारी पूरी मेहनत से कार्य कर रहे थे, लेकिन मुख्यालय ने आय को और अधिक बढ़ाने के लिए मुख्यालय स्तर से ही मार्ग निर्धारित करने का निर्णय किया है।  
भरतसिंह गुर्जर मुख्य प्रबंधक, दौसा आगार

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