Video: मौत के मुहाने पर मदद को मोहताज

Video: मौत के मुहाने पर मदद को मोहताज

Mahesh Jain | Publish: Mar, 14 2018 09:03:00 AM (IST) Dausa, Rajasthan, India

जांच की गाज गरीब पर, अब तक 71 की मौत, चार माह बाद भी नहीं कोई मेडिकल शिविर, डेढ़ सौ से अधिक पीडि़तों के नहीं बन रहे सर्टिफिकेट

महेश कुमार जैन. दौसा. जब बराबर 'कमीशन' मिले तो लीक से बढ़कर करोड़ों की मदद की होड़ लग गई और जब जांच के बाद पोल खुली व 'कमीशनÓ बंद हो गया तो पीडि़तों को जीते-जी मरने को छोड़ दिया। बात दौसा जिले में सिलिकोसिस पीडि़तों की है। इनके साथ बड़ा छलावा हो रहा है। राज्य सरकार ने पीडि़तों को जीते जी इलाज के लिएएक लाख रुपए व मरने के बाद उनके परिजनों को 3 लाख रुपए की मदद का प्रावधान किया गया था। लेकिन दुखद है कि गत अक्टूबर, 17 के बाद से ना तो कोई मेडिकल शिविर लगाया गया और ना कोई पीडि़त को मदद दी गई। इससे उनके सर्टिफिकेट नहीं बन पा रहे हैं। स्थिति यह है कि सैकड़ों मरीज मौत के मुहाने पर अपने हक को मोहताज हैं, लेकिन जांच के नाम पर मात्र अधिकारियों द्वारा कार्यस्थल का निरीक्षण कर औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।

 

 

ढाई वर्ष पहले लागू किया था मदद का प्रावधान

अगस्त 2015 से राज्य सरकार ने सिलिकोसिस पीडि़तों को सहायता का प्रावधान लागू किया। फरवरी 2018 तक जिले के औद्योगिक क्षेत्र एवं सिकंदरा में मूर्ति व्यवसाय व पत्थर व्यवसाय से 6 15 सिलिकोसिस पीडि़तों का रजिस्ट्रेशन हुआ है। इसमें से 544 सिलिकोसिस से बीमार थे। 71 लोगों की सिलिकोसिस से मौत हो गई। उल्लेखनीय है कि बीमार को 1 लाख व मृतक परिजन को 3 लाख रुपए की सहायता देने का प्रावधान है।

 

 

तब टपक रही थी 'कमीशन की लार ', की थी साढ़े सात करोड़ की मदद


सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था। मदद की होड़ मची हुई थी। शुरुआती ढाई वर्ष में ही करीबन 7.57 करोड़ रुपए की आर्थिक मदद की गई थी। सिलिकोसिस पीडि़तों व मृतक आश्रितों की मदद में से डॉक्टर, दलाल, ईमित्र तक सबको अपना अपना हिस्सा मिल रहा था। 'बीमारÓ को देख कर हरेक के कमीशन की 'लारÓटपक रही थी। फर्जीवाड़े का मामला उजागर होने पर गत वर्ष अक्टूबर में जयपुर से मेडिकल टीम ने जांच की। जांच में 112 सिलिकोसिस फर्जी पाए गए। 28 9 पीडि़त सही पाए गए। लेकिन इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में पड़ गया। दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। अक्टूबर माह के बाद से ही मेडिकल केम्प, मदद आदि बंद हो गए।

 

 

फैक्ट फाइल


28 9 सिलिकोसिस पीडि़त मेडिकल जांच में सही पाए गए।
97 सिलिकोसिस पीडि़त जांच के भय व अन्य कारणों से मेडिकल शिविर में आएही नहीं
मेडिकल जांच में 71 सिलिकोसिस पीडि़त फर्जी पाए गए।

 


ये लगे मेडिकल शिविर


2017 फरवरी
2017 मई
2017 अगस्त
2017 अक्टूबर

 

 

 

पीडि़तों ने बयां किया दर्द

 


केस -1

निहालपुरा गांव के खानपुर ढाणी निवासी रामकिशोर सैनी पिछले चार साल से बीमार है। परिजन जयपुर सहित कई बड़े शहरों के अस्पतालों में लाखों रुपए खर्च कर उपचार करा चुके हैं। लेकिन चिकित्सकों ने भी अब हाथ खड़े कर दिए। इसके बाद से परिजन रामकिशोर का घर पर ही उपचार करा रहे हैं। बीमारी के बाद उपचार में लाखों रुपए खर्च होने से रामकिशोर का परिवार आर्थिक तंगहाली में है। पढऩे की उम्र में रामकिशोर के लड़के निजी कार्य कर रोजी रोटी कमाने में लगे हैं। रामकिशोर के बेटे बिल्लू ने बताया कि अब तक पिता के इलाज में करीब दस लाख रुपए खर्च हो चुके हैं। लेकिन पर्याप्त राशि नहीं मिल रही है।

 


केस -2


सरुण्डला निवासी सीताराम सैनी पिछले छह साल से सिलिकोसिस बीमारी से पीडि़त है। सीताराम को सरकार की ओर से उपचार के लिए एक लाख रुपये की सहायता राशि तो मिली है, लेकिन परिजन उपचार में अब तक कर्ज कर करीब 7 से 8 लाख रुपए खर्च कर चुके हैं। इससे परिवार की हालत दयनीय है। परिवार में एक मात्र कमाने वाला होने के कारण बीमारी से ग्रसित होने के बाद भी सीताराम सैण्ड स्टोन दुकान पर 7 हजार रुपए मासिक वेतन पर देखरेख का कार्य करता है।

 

 

दे रहे हैं मदद
मौके पर जाकर निरीक्षण कर रहे हैं। सिलिकोसिस पीडि़तों को सहायता दी जा रही है। उनको सावधानी बरतने के निर्देश दिए जा रहे हैं। मेडिकल केंप नहीं लग पा रहे हैं।पहले जो जांच हुई, उसकी पूरी जानकारी नहीं है। अभी नया चार्ज है।
विक्रम सिंह, जिला श्रम कल्याण अधिकारी दौसा

 

नहीं लगे केंप
सिलिकोसिस पीडि़त फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद अक्टूबर माह से कोई मेडिकल केंप नहीं लगा है।इससे चार माह से डेढ़ सौ से अधिक श्रमिकों को सर्टिफिकेट नहीं मिले हैं। पुरानों को मदद मिल रही है। मेडिकल जांच व कार्रवाई का मामला उच्च स्तर का है।
आर.आई. मीना तत्कालीन श्रम कल्याण अधिकारी दौसा

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

Ad Block is Banned