काम करेंगे तो दाम भी मिलेगा

कारखाने खुलने पर मजदूरों को मिलेगा रोजगार: 500 कारखानों में 8-10 हजार मजदूर करते हैं काम

By: Rajendra Jain

Published: 18 Apr 2020, 09:56 AM IST

दौसा. कोरोना वायरस के संक्रमण के खतरे से बचने के लिए पिछले कई दिनों से लागू लॉकडाउन के दौरान जिले में संचालित रीको इंडस्ट्रीज इलाकों, ईंट भट़्टों एवं छोटे- बड़े उद्योगों के करीब 500 कारखानों में काम करने वाले जिले करीब 8 से 10 हजार मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा है। अब सरकार ने इनके 21 अप्रेल से चालू करने की घोषणा की है तो मजदूरों में आस जग गई है। कारखाने बंद होने से बाहर के कई मजदूर यहीं फंसे हुए हैं। अब काम चालू होने से इनको रोजगार के साथ मेहनताना भी मिलेगा। हालत यह है कि इस वक्त मजदूरों के सामने आर्थिक संकट खड़ा है।
जानकारी के अनुसार जिले में जिला मुख्यालय, बापी, बांदीकुई के कौलाना व लालसोट के डिडवाना में फैक्ट्रियां, लवाण में दर्जनों दरियों के कारखाने एवं जिले में करीब दो दर्जन ईंट भट्टों, व छोटे बड़े करीब 500 कल कारखानों में 8 से 10 हजार मजदूर काम करते हैं। इन मजदूरों को काम मिलने से इनका पलायन भी थम जाएगा।

यहां इतनी फैक्ट्रियां
जानकारी के अनुसार जिले में सबसे अधिक फैक्ट्रियां बापी इलाके में करीब 200 हैं। इसी प्रकार करीब बांदीकुई के कौलाना में 50, लालसोट के डिडवाना में 40, व 2 दर्जन दौसा मुख्यालय में संचालित है। इसी प्रकार जिले में करीब 2 दर्जन ईंट भट्टे संचालित हैं। लवाण में भी करीब एक दर्जन दरी फक्ट्रियां है। इसी प्रकार अन्य छोटे-मोटे करीब पांच सौ से अधिक कल कारखाने संचालित हंै। रीको इण्डस्ट्रीज इलाकों में संचालित करीब साढ़े तीन सौ फैक्ट्रियों में ही करीब 4 हजार मजदूर जुड़े हुए हैं। एक ईंट भट्टे पर 125 से 150 तक मजदूर काम करते हैं। ऐसे में करीब 3 हजार मजदूर ईंट भट्टों पर काम करते हैं। इनके अलावा छोटे बड़े अन्य प्रकार के कारखानों में भी 1500 से 2000 तक मजदूर काम करते हैं। ऐसे में जिले में करीब 10 हजार मजदूर काम करते हैं।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने बांटे मास्क
राहुवास. तहसील मुख्यालय सहित आस के क्षेत्र में ग्राम पंचायत की ओर से उपलब्ध कराए गए मास्क को आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने घर-घ जाकर बांटे। साथ लोगों को सोशल डिस्टेंस की पालना करने, बार-बार हाथ धोने की नसीहत देने के साथ ही बेवजह घरों से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी। इसके अलावा राशन डीलरों द्वारा भी घर-घर राशन सामग्री मुहैया कराई गई।

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