विदेशी सैलानी ने काटा फीता, पहला टिकट मेघराज एवं ममता देवी ने लिया

Gaurav Kumar Khandelwal

Publish: May, 18 2019 08:40:02 AM (IST) | Updated: May, 18 2019 08:40:03 AM (IST)

Dausa, Dausa, Rajasthan, India

बांदीकुई/आभानेरी. चांदबावड़ी में प्रवेश पर शुल्क लागू किए जाने की योजना का आस्ट्रेलिया के विदेशी सैलानी ने फीता काटकर किया। इससे पहले सैलानी का तिलकर लगाकर एवं माला पहनाकर स्वागत किया गया। पहला टिकट गंगापुर निवासी मेघराज एवं ममता देवी ने लिया। सूत्रों के मुताबिक विदेशी सैलानियों से नगद राशि देने पर 300 रुपए एवं ऑनलाइन बुकिंग कराने पर 250 रुपए शुल्क वसूला जाएगा। इसके अलावा देेशी सैलानी के नगद राशि देने पर 25 एवं ऑनलाइन बुकिंग पर 20 रुपए शुल्क देना होगा। इससे ऑनलाइन बुकिंग होने से डिजीटल इण्डिया को भी बढ़ावा मिलेगा। सैलानियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 10 सुरक्ष गार्ड भी तैनात किए गए हैं। जबकि भानगढ़ में गत सोमवार से शुल्क लागू किया जा चुका है।

 


ग्रामीणों ने जताया विरोध


ग्रामीणों ने चांदबावड़ी में स्थानीय लोगों के प्रवेश पर भी शुल्क वसूले जाने का विरोध जताया। ग्रामीणों ने बताया कि स्थानीय लोगों के प्रवेश पर छूट देनी चाहिए। वही ंसुरक्षा गार्ड भी स्थानीय ही लगाए जाने चाहिए। इससे क्षेत्र के लोगों को रोजगार को बढ़ावा मिलता। उन्होंने कहा कि टिकट योजना लागू होने पर पर्यटन एवं पुरातत्व विभाग की ओर से ग्राम पंचायत प्रशासन की अनदेखी की गई है। सरपंच एवं किसी भी जनप्रतिनिधि को नहीं बुलाया गया है। जबकि पर्यटन स्थल के आस-पास साफ-सफाई की व्यवस्था पंचायत करती है।

 


ये है पर्यटन स्थल का इतिहास


चांदबावड़ी का निर्माण 8वीं-9वीं सदी में निकुंभ राजवंश के राजा चांद (चन्द्र) ने किया था। राजा चांद आभानगरी पर शासन करता था। इसके बाद इसका नाम आभानेरी पड़ गया। करीब19.5 मीटर गहरी यह बावड़ी योजना में वर्गाकार है। इसका प्रवेश द्वार उत्तर की ओर है। नीचे उतरने के लिए तीनों तरफ से दोहरे सोपान है। उत्तरी भाग में स्तम्भों पर बहुमंजिली दीर्घा बनाई गई है। इस दीर्घा में प्रक्षेपित दो मण्डपों में महिषासुर मर्दनी एवं गण्ेश की सुंदर प्रतिमाएं प्रतिष्ठित हैं। बावड़ी का प्रकार पाŸव बरामदे एवं प्रवेश मण्डप मूल योजना में नहीं था। ऐसे में इनका निर्माण बाद में किया गया।

 

 

लोगों का कहना है कि चांदबावड़ी को अंधेरे में उजाले की बावड़ी भी कहते हैं। क्योंकि चांदनी रात में यह बावड़ी सफेद दिखाई देती है। बावड़ी तक पहुंचने के लिए करीब साढ़े तीन हजार सीढियां है। इन सीढिय़ों को भूल भैलया सीढ़ी भी कहा जाता है। क्योंकि जिन सीढिय़ों से उतरते हैं। उन सीढिय़ों से वापस बावड़ी से बाहर आना मुश्किल होता है। बताया जाता है कि इस बावड़ी में सुरंगनुमा गुफा भी है और एक ही रात में इस बावड़ी का निर्माण किया गया था। (ए.सं.)

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