कार्रवाई के विरोध में लामबंद हुए पत्थर व्यापारी, 500 मशीनों के थमे चक्के

कार्रवाई के विरोध में लामबंद हुए पत्थर व्यापारी, 500 मशीनों के थमे चक्के

Mahesh Jain | Updated: 20 Jul 2019, 06:58:42 PM (IST) Dausa, Dausa, Rajasthan, India

सिकंदरा के पत्थर बाजार में पसरा रहा सन्नाटा, एसडीएम द्वारा सात पत्थर इकाइयों को सीज करने से बढ़ा आक्रोश

दौसा. सिकंदरा. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल नई दिल्ली व राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के आदेश पर जिला प्रशासन द्वारा सिकंदरा में सात पत्थर इकाइयों को सीज कर विद्युत कनेक्शन काटने के बाद पत्थर व्यापारी प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ लामबंद हो गए हैं। प्रशासनिक अधिकारियों की कार्रवाई के विरोध में शनिवार को सिकंदरा व मानपुर में करीब पांच सौ पत्थर इकाइयों के चक्के थम गए। व्यापारियों ने सिकंदरा व मानपुर में बाजार बंद कर बैठक आयोजित कर प्रशासन की कार्रवाई की निंदा की है। साथ ही उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि प्रशासनिक अधिकारी इसी तरह पत्थर इकाइयों को बंद करते रहे तो व्यापारियों को मजबूरन आंदोलन करना पड़ेगा।


बैठक में प्रशासन द्वारा इकाइयों को सीज करने की कार्रवाई रोकने के लिए सोमवार को जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंपने का निर्णय किया है। व्यापारियों के बंद के आह्वान के बाद पत्थर बाजार में सन्नाटा पसरा रहा तथा इकाइयां सूनी नजर आई। चौराहे के नदी वाले बालाजी पर मिंटूराम सैनी की अध्यक्षता में आयोजित हुई बैठक में बड़ी संख्या में पत्थर व्यापारी व श्रमिकों ने भाग लिया। इस दौरान व्यापारियों ने प्रशासन द्वारा की कार्रवाई के खिलाफ रोष प्रकट किया।


ऐसे तो चौपट हो जाएगा व्यवसाय-
बैठक में सैण्ड स्टोन समिति अध्यक्ष आरपी सैनी ने कहा कि यदि प्रशासन इसी तरह इकाइयों को बंद करता रहा तो आने वाले दिनों में सिकंदरा में पत्थर का कार्य पूर्णतया बंद करना पड़ेगा। इससे हजारों श्रमिक बेरोजगार तथा व्यापारियों का धंधा चौपट हो जाएगा। ऐसे में सरकार को व्यापारियों की पीड़ा को सुनना चाहिए। मिंटूराम सैनी ने कहा कि पत्थर व्यवसाय पर पहले से ही सिलिकोसिस बीमारी का ग्रहण लगा हुआ है। सैकड़ों श्रमिकों की सिलिकोसिस बीमारी से मौत होने से श्रमिक पत्थर कार्य करने से कतराने लगे हैं। इसके बाद प्रशासन द्वारा की जा रही कार्रवाई से व्यवसाय पूरी तरह ठप हो जाएगा।


नदी में स्लरी डालना मजबूरी

सैनी समाज के जिलाध्यक्ष कैलाश सैनी ने कहा कि सिकंदरा व मानपुर में पत्थर इकाइयों के लिए सरकार को स्टोन मार्ट बनाकर सुविधा उपलब्ध करानी चाहिए। जिससे यह व्यवसाय आगे बढ़ सके। व्यापारियों के पास इकाइयों के लिए निजी भूमि नहीं होने के कारण कटर मशीन से निकलने वाले डस्ट को चरागाह व नदी भूमि में डालना मजबूरी है। सरकार नदी में स्लरी डालने पर पर्यावरण प्रदूषण का हवाला देकर इकाइयों को बंद करा रही है। ऐसे में पत्थर व्यापार पूरी तरह ठप हो जाएगा।


ज्ञापन सौंपकर चेताएंगे सरकार को
बैठक में व्यापारियों ने एक स्वर में प्रशासन की कार्रवाई के खिलाफ आंदोलन का निर्णय लिया है। सैण्ड स्टोन समिति पदाधिकारियों ने 22 जुलाई को सामूहिक रूप से जिला कलक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपने का निर्णय किया। उन्होंने बताया कि इसके बाद भी प्रशासन की कार्रवाई नहीं रुकी तो व्यापारी आंदोलन के लिए सड़कों पर उतरेंगे।


यह है मामला
सिकराय एसडीएम हरिताभ आदित्य ने बताया कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल नई दिल्ली में लंबित प्रकरण के तहत सिकंदरा में पत्थर इकाइयों से निकलने वाली स्लरी (पत्थर कटर मशीन से निकलने वाला मलबा) से पर्यावरण को खतरा बताया है। यहा पत्थर इकाई से निकलने वाली स्लरी को टैंकरों के जरिए नदी व चारागाह भूमि में डाला जा रहा था। इससे पत्थर का मलबा नदी बहाव क्षेत्र में जम गया था तथा पर्यावरण दूषित होने का खतरा बना हुआ है। इसको लेकर सात इकाई संचालकों को पूर्व में नोटिस भी जारी किए थे। नोटिस की पालना नहीं करने पर 18 जुलाई को राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के आदेश पर एसडीओ के नेतृत्व में विद्युत व जलदाय विभाग के साथ संयुक्त कार्रवाई करते हुए नामजद सात पत्थर इकाइयों को सीज कर विद्युत कनेक्शन काटे दिए। साथ ही प्रशासन ने इकाई संचालकों को मशीनें चालू नहीं करने के लिए पाबंद भी किया।

 

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