फिर लापरवाही, कोरोना का नहीं खौफ, सब्जी मण्डी में उमड़ी भीड़

बांदीकुई में तीन घंटे दुकानें खुलने के बाद लोग एक साथ पहुंचे बाजार, अब बदला समय, सुबह सात से शाम 5 बजे तक कर सकेंगे खरीदारी

Mahesh Jain

26 Mar 2020, 08:54 PM IST

बांदीकुई (दौसा)Negligence again, not afraid of Corona, crowd gathered in vegetable market देश में आगामी 14 अप्रेल तक लॉक डाउन किया हुआ है, लेकिन गत बुधवार को राशन व सब्जी की दुकानें बंद रहने से गुरुवार को प्रशासन ने सुबह 7 से 10 बजे तक दुकानें खुलवा दी। ऐसे में सब्जी व राशन सामग्री खरीदने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। सब्जी मण्डी के तो हालात ये हो गए कि लोगों को पैर रखने के लिए जगह तक नहीं मिली। जगह की कमी के चलते लोग धक्का-मुक्की तक करते दिखाई दिए। जबकि लोगों को कोरोना की लड़ाई को लडऩे के लिए में ऐसा नहीं करना चाहिए। सरकार के सोशल डिस्टेंस की पालना करनी होगी।

तभी इस महामारी के संकट से देश उबरेगा। राशन की दुकानों पर भी लोगों की भीड़ जमा रही। पालिका, पुलिस व प्रशासन को सोशल डिस्टेंस की पालना करने के लिए कठोर कदम उठाने चाहिए। इसके लिए राशन सामग्री की दुकानों पर सोशल डिस्टेंस की व्यवस्था के लिए एक-एक मीटर की मार्किंग करानी चाहिए। जहां सामग्री की सूची व्यापारी को सौंप दें। व्यापारी पैकिंग कर सामान सम्बंधित व्यक्ति को दे सके। बालाजी मंदिर के सामने स्थित व बसवा रोड सब्जी मण्डी में जगह की कमी है।

ऐसे में प्रशासन को सब्जी मण्डी को भी दुकानों की संख्या के हिसाब से 6 मार्गों पर अलग-अलग जगह निर्धारित दूरी में खुले में जगह मुहैया कराकर दुकानें शिफ्ट करनी चाहिए। इससे पूरे शहर के लोग एक जगह एकत्र नहीं हो सकें। तभी लॉक डाउन के परिणाम सार्थक आ सकेंगे। इसके लिए पालिका प्रशासन वार्डवार पार्षदों को भी जिम्मेदारी दें कि वे अपने वार्ड व मोहल्ले के लोगों को सोशल डिस्टेंस के लिए जागरुक करें।

आटा पहुंच गया 32 सौ रुपए प्रति क्विंटल
राशन सामग्री की कुछ दुकानों पर आटा-चीनी सहित अन्य राशन सामग्री ब्लैक में बेची जा रही है। बाजार में आटा 32 सौ रुपए प्रति क्विंटल बेचा जा रहा है। इसमें 50 किलो का कट्टा 16 सौ रुपए में बिक रहा है। जबकि आटे की व्यापारी मांग के अनुरूप आपूर्ति तक नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में प्रशासन को भी समय रहते गेहूं व आटे की व्यवस्था करनी चाहिए। जबकि चीनी भी 40 रुपए से अधिक भाव में बेची जा रही है। जबकि तेल भी सौ रुपए प्रति किलोग्राम बेचा जा रहा है।

दाल भी 120 रुपए किलोग्राम तक पहुंच गई है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर व जरुरतमंद लोगों की पहुंच से राशन सामग्री दूर होती दिखाई दे रही है। जबकि प्रशासन को राशन विक्रेताओं को पाबंद किया जाना चाहिए कि वे राशन सामग्री की सूची दुकान के बाहर चस्पा करें। पालिका व रसद विभाग भी राशन से जुड़ी दुकानों की प्रभावी मॉनिटरिंग करें। इससे आमजन को भी राहत मिल सके। इसके अलावा दूध पर भी अतिरिक्त राशि वसूली जा रही है। लोग राशन सामग्री का स्टॉक भी करने लगे हैं। जबकि लोगों को देश में चल रही महामारी को समझना चाहिए कि बाजार जब खुल रहा है तो जरुरत के हिसाब से ही सामान खरीदना चाहिए।

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Mahesh Jain Bureau Incharge
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