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दौसा

विभागीय लापरवाही : शारीरिक रूप से नहीं… यहां ऑनलाइन हुआ बच्चे का जन्म, इसके बाद की कहानी तो और भी है अद्भुत

विभागीय लापरवाही ने एक बच्चे का ऑनलाइन जन्म करा दिया। मामला दौसा जिले के सिकराय उपखंड के पीलोदी गांव का है। यह पूरा मामला रोचक तक हो गया जब बच्चे का ऑनलाइन जन्म के 6 महीने बाद बच्चे की मृत्यु की एंट्री कर दी।

दौसाMay 25, 2024 / 05:49 pm

Suman Saurabh

online birth of baby dausa rajasthan

दौसा। राजस्थान के दौसा से आया एक आश्चर्यजनक मामला चर्चा में है। यहां विभागीय लापरवाही ने एक बच्चे का ऑनलाइन जन्म करा दिया। जब महिला और उसके परिवार को इसकी जानकारी हुई तो हैरान रह गए। इसके बाद, परिजनों ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को शिकायत दर्ज कराई, जिसकी जांच चल रही है। मामला दौसा जिले के सिकराय उपखंड के पीलोदी गांव का है। इस गांव में रहने वाली प्रियंका मीना और कमल मीणा ने विवाह के बाद 2018 में एक बेटे को जन्म दिया। जिसके बाद महिला इच्छापूर्वक कभी गर्भवती नहीं हुई, वह अपने इकलौते बच्चे के साथ खुशी-खुशी रह रहे थे। इस दौरान उनके पति, जो कि बैंक में सरकारी कर्मचारी हैं, के विभागीय पीटीएस सॉफ्टवेयर में ऑनलाइन रिकॉर्ड में फेरबदल किया गया, जिससे सेवा रिकॉर्ड में एक की जगह दो बच्चे दिखाई देने लगे।

बच्चे का ऑनलाइन जन्म और 6 महीने के बाद दिखाया मृत्यु

दरअसल, यह पूरा मामला रोचक तक हो गया जब बच्चे का ऑनलाइन जन्म के 6 महीने बाद बच्चे की मृत्यु की एंट्री कर दी। ऑनलाइन रिकार्ड के मुताबिक, पीड़िता प्रियंका मीना को 23 दिसंबर 2022 को गर्भवती के रूप में पंजीकृत किया गया था, जिसकी अपेक्षित डिलीवरी तिथि 23 जुलाई 2023 थी। हालांकि विभाग ने प्रियंका की डिलीवरी 14 जुलाई को दोपहर 2:03 बजे दर्ज की। रिकॉर्ड में यह भी कहा गया कि महिला का पहला बच्चा 3 जनवरी 2018 को पैदा हुआ था। इसके अलावा, विभाग ने नियमानुसार नवजात को 6 महीने के भीतर लगने वाले सभी टीके भी ऑनलाइन दर्ज कराया गया। जिसके बाद, हैरानी तब हुई जब जन्म के 6 माह 4 दिन बाद ही ऑनलाइन जन्मी बच्ची को मृत घोषित कर दिया।

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विभागीय लापरवाही के बाद खड़े हुए सवाल

मामला चर्चा में आने के बाद लोगों ने चिकित्सा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। इस मामले में ब्लॉक सीएमएचओ डॉक्टर भोलाराम गुर्जर ने जांच के बाद दोषी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की बात कही है। इस मामले में एएनएम हेमलता शर्मा का नाम सामने आया है। हालांकि उन्होंने पल्ला झाड़ते हुए कहा कि उनका इस मामले से कुछ लेना- देना नहीं है। वहीं सीएमएचओ भोलाराम गुर्जर ने बताया कि गर्भवती होने के बारे में एएनएम हेमलता वर्मा और आशा सहयोगिनी सुशीला शर्मा द्वारा डेटा अंकित किया गया है।

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