सड़कें बनी खून की प्यासी

पत्रिका अभियान: जिलेभर में तीन वर्ष में सवा छह सौ लोगों की सड़क दुघर्टनाओं में मौत।

By: gaurav khandelwal

Published: 18 Aug 2017, 08:27 AM IST

दौसा. सड़क निर्माण एजेंसी की तकनीकी खामी माने या फिर वाहन चालकों की लापरवाही या फिर पुलिस व परिवहन विभाग की लचर कार्रवाई। कारण जो भी हो, लेकिन जिले में बीते तीन वर्ष में सौ या दो सौ नहीं बल्कि १४०२ सड़क हादसे हो चुके हैं। इन सड़क हादसों में ६३० जिंदगियां लील गई है। इन सड़क हादसों में मृतकों के परिजन आज भी सदमा नहीं भुला पा रहे हैं तो गम्भीर घायलों के जख्म भी अभी तक हरे ही हैं।

 


इसलिए होते हैं हादसे


राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहन दुर्घटना हर जगह नहीं हो रही है। बल्कि अधिकांश सड़क दुघर्टनाएं वहां हो रही है, जहां पर निर्माण कम्पनी ने गांवों के लिए आने-जाने के लिए कट बना रखे हैं। ग्रामीण इलाकों से आने वाले लोग जब कट पर एक साइड से घूम कर दूसरी साइड घूमते हैं तो सामने या पीछे से तेजगति में आ रहे वाहन की चपेट में आ जाते हैं और हादसा हो जाता है। खासकर भाण्डारेज मोड़, कालाखोह, सिकंदरा, मानपुर, पाटोली, पीपलखेड़ा एवं अन्य वे कट जहां पर हाइवे पर एप्रोच रोड है। गांवों से लोग वाहनों से सीधे हाइवे पर आते हैं तो वे तेजगति में आ रहे वाहन की चपेट में आ जाते हैं। इसी प्रकार गांवों की सड़कों में भी कहीं ना कहीं निर्माण में तकनीकी खामी रखी गई है।


नहीं रखते सफेद पट्टी का ध्यान


हाइवे पर निर्माण कम्पनी ने हर जगह स्पीड ब्रेकर नहीं बना रखे हैं। सफेद पट्टियां बना रखी है। हाइवे पर चलने वाले वाहन चालकों में अधिकांश वाहन चालक सफेद पट्टी का ध्यान कम रखते हैं, ऐसे में सामने आ रहे उसकी चपेट में आ जाता है। यदि स्पीड ब्रेकर हो तो चालक वाहन की गति को कम कर लेता है। इसी प्रकार ग्रामीण इलाकों में लोगों ने बिना जरूरत के ही विभाग की अनुमति के बिना ही जगह-जगह स्पीड ब्रेकर बना रखे हंै। इनसे भी कई लोग चोटिल हो चुके हैं।


इन विभागों को देना होगा ध्यान


1. पुलिस- हाइवे सहित अन्य सड़कों से गुजरने वाले ओवरलोड वाहनों के खिलाफ कार्रवाही बहुत कम हो रही है। नाकाबंदी में भी ऐसे वाहनों को रोका नहीं जाता है।
2. प्रशासन- सरकार ने जिला कलक्टर एवं पुलिस अधीक्षक को बड़ी सड़क दुघर्टनाओं पर मौके पर जाने के आदेश दे रखे हैं, लेकिन प्रशासनिक अधिकारी ध्यान नहीं देते हैं और हादसे के कारणों की भी गम्भीरता से जांच नहीं कराते हैं।
3. परिवहन विभाग- परिवहन विभाग न ओरवलोड वाहनों के खिलाफ कोई कार्रवाई करता है और नहीं वाहनों की फिटनेस पर ध्यान देता है। कहने को तो हाइवे किनारे जगह-जगह प्रदूषण नियंत्रण के लिए कार खड़ी रखी है, लेकिन वे शोपीस ही बनी हुई है।
4. एनएचआई या साविनि- हाइवे पर कहां पर अधिक हादसे हो रहे हैं उन प्वाइंटों पर होने वाले हादसों के कारण तलाश कर उनका समाधान करना होगा। लेकिन विभाग ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया है।

 

निर्माण में ही है खामी


हाइवे या ग्रामीण सड़कों के निर्माण में तकनीकी खामी है। कई ऐसे प्वाइंट हैं, जहां पर सर्वाधिक सड़क हादसे होते हैं। पुलिस तो फिर भी अपने-अपने थाना इलाकों में पूरी सतर्कता रखती है।
प्रकाश कुमार शर्मा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दौसा

gaurav khandelwal Desk
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