स्कूल में बच्चों को नहीं पोषाहार, बर्तन उठाकर किया प्रदर्शन

स्कूल में बच्चों को नहीं पोषाहार, बर्तन उठाकर किया प्रदर्शन

Mahesh Jain | Updated: 04 Jul 2019, 07:46:18 PM (IST) Dausa, Dausa, Rajasthan, India

-राजकीय प्राथमिक विद्यालय अरनिया का मामला

 

दौसा. गुढ़लिया-अरनिया
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय अरनिया के अन्तर्गत प्राथमिक स्तर पर संचालित विद्यालय में चार दिन से पोषाहार नहीं बन रहा है। इसके चलते छात्रों को निराश लौटना पड़ रहा है, लेकिन शिक्षा विभागीय अधिकारियों का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। इसको लेकर गुरुवार को छात्रों का आक्रोश फूट पड़ा और मुख्य द्वार के बाहर नारे लगाकर विरोध-प्रदर्शन किया। बाद में उपसरपंच प्रेमकुमार गुप्ता व पंचायत प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी बाबूलाल विजय ने पहुंच समझाइश की और शीघ्र पोषाहार व्यवस्था सुचारू कराने का भरोसा देकर मामला शांत किया। वहीं उपसरपंच ने पानी के लिए टैंकर डलवाने का भरोसा दिलाया।


जानकारी के अनुसार विद्यालय में नया सत्र शुरू होने के साथ ही 1 जुलाई से ही पोषाहार नहीं है। विद्यालय में करीब 110 छात्र अध्ययनरत हैं। मजबूरन छात्रों को घर से टिफिन लेकर आना पड़ रहा है या फिर विश्राम के समय घर जाकर खाना खाकर आना पड़ रहा है। वहीं विद्यालय में पानी की सुविधा नहीं है। इसके चलते छात्रो ंको आधा किलोमीटर दूर जाकर कण्ठ तर करने के लिए पानी पीकर आना पड़ता है। हालांकि विद्यालय में पानी की टंकी रखी हुई है और नल कनेक्शन भी है, लेकिन पानी नहीं आता है। इसके चलते नामाकंन भी घटता जा रहा है। शौचालय भी जर्जर हो चुका है।

पोषाहार प्रभारी हीरालाल गुर्जर ने बताया कि मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी एवं सप्लायर्स को पोषाहार खत्म होने के बारे में अवगत करा दिया, लेकिन अभी तक सप्लाई नहीं हुआ है। आस-पास की विद्यालयों में पोषाहार की जानकारी की तो वहां भी अतिरिक्त स्टॉक नहीं मिला। इस मौके पर चैनसिंह गुर्जर व महेन्द्र जोनवाल ने भी पहुंच समझाइश की।

कुटी विद्यालय में जताया विरोध
बांदीकुई. राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय कुटी को क्रमोन्नत कराने एवं विषय अध्यापकों के रिक्त पद भरने की मांग को लेकर गुरुवार को लोगों ने श्यालावास कलां सरपंच अनिल नागर के नेतृत्व में विद्यालय के मुख्य द्वार पर नारे लगाकर विरोध-प्रदर्शन किया।

सरपंच ने बताया कि देश आजाद होने के साथ ही इस विद्यालय की स्थापना 1947 में प्राथमिक स्तर के विद्यालय के रूप में हुई। इसके बाद यह विद्यालय 1970 में उच्च प्राथमिक विद्यालय के रूप में क्रमोन्नत हो गया। नामांकन भी करीब 150 है। विद्यालय को माध्यमिक स्तर पर क्रमोन्नत कराने के लिए लम्बे समय से मांग करते आ रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

यहां आस-पास उच्च शिक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में छात्रों को श्यालावास कलां या फिर चार किलोमीटर दूर बांदीकुई जाना पड़ता है। मजबूरन छात्राएं तो आठवीं तक पढ़ाई करने के बाद छोड़ देती हैं। ऐसे में विद्यालय को क्रमोन्नत कर दिया जाए तो स्थानीय स्तर पर उच्च शिक्षा की सुविधा मुहैया हो सकती है।

विद्यालय के लिए करीब पौने तीन बीघा भूमि का खेल मैदान के लिए आवंटन भी हो चुका है। ऐसे में यह विद्यालय क्रमोन्नत होने के सभी मापदण्ड पूरा करती है। विद्यालय में गणित एवं अंग्रेजी विषय के अध्यापकों के पद लम्बे समय से रिक्त हैं। कई बार शिक्षा विभागीय अधिकारियों का अवगत करा चुके हैं, लेकिन इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

इस मौके पर प्रदीप नागर, विजयसिंह प्रजापत, अशोक कुण्डारा, हुकमचंद, सुरेश मधुकर, नंदकिशोर बिरला, अजय जारवाल, मनोज कुमार एवं कमलसिंह ने भी विरोध प्रदर्शन किया।

स्कूल में बच्चों को नहीं पोषाहार, बर्तन उठाकर किया प्रदर्शन

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