दो पल भी सुकून के मयस्सर नहीं

मनरेगा कार्यस्थल पर नहीं छाया के इंतजाम

By: Rajendra Jain

Published: 25 Apr 2018, 10:28 AM IST

दौसा. कुण्डल. ग्रामीणों को पलायन रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने पर सरकार करोड़ों रुपए खर्च कर मनरेगा योजना तो संचालित कर रही है, लेकिन पर्याप्त बजट के अभाव में टेण्टों की खरीद नहीं होने से श्रमिक भीषण गर्मी की तपती धूप सहने को मजबूर है। ऐसे में कई बार श्रमिकों की तबीयत तक खराब हो जाती है। खास बात तो यह है कि जिन स्थानों पर मनरेगा कार्य होता है, वहां पेड़ों की छांव भी नसीब नहीं पाती है। ऐसे में उन्हें दोपहर का भोजन व बच्चों की देखरेख करना भी मुश्किल हो जाती है।


जानकारी के अनुसार वित्तीय वर्ष 2018-19 में जिले की 234 ग्राम पंचायतों में से 159 में मनरेगा के तहत कार्य चल रहा है। इन ग्राम पंचायतों में करीब 1300 स्थानों पर 8 हजार से अधिक श्रमिक भी कार्यरत हैं, लेकिन अधिकांश स्थलों पर श्रमिकों की छाया के बंदोबस्त नहीं है।
कई वर्ष पहले आए टेण्ट भी फटेहाल हो गए है। ऐसे में छाया की व्यवस्था नहीं होने से मजदूरों को काम के बाद सुस्ताने के लिए जगह नहीं मिलने से पेड़ों की छाव तलाशनी पड़ती है।


खास बात यह है कि पंचायत समितियों की ओर से भी टेण्टों के लिए जिला परिषद को अवगत कराया गया है। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। गौरतलब है कि जिले में मनरेगा की शुरुआत एक अप्रेल 2008 को हुई थी।

समय बदले तो मिले राहत
श्रमिकों का कहना है कि काम का समय सुबह 9 से शाम 6 बजे तक निर्धारित है। जबकि टॉस्क (करीब 40 मण मिट्टी खुदाई) दो से तीन घण्टे में ही पूरी कर लेते हैं, लेकिन उसके बाद भी सारा दिन कार्यस्थल पर ही गुजारना पड़ता है।

शीघ्र कराएंगे उपलब्ध
मनरेगा श्रमिकों के लिए जहां टेण्ट की व्यवस्था नहीं है। ऐसे स्थानों की जानकारी लेकर शीघ्र ही टेण्ट उपलब्ध कराए जाएंगे। टेण्टों की खरीद के लिए विभागीय स्तर पर मार्गदर्शन मांगा गया है।
राजेन्द्रप्रसाद चतुर्वेदी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद दौसा

करा दिया अवगत
छाया के लिए कई बार उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया है, लेकिन अभी कोई व्यवस्था नहीं हुई है। टॉस्क का कार्य पूरा होने के बाद भी मजदूरों को पूरे समय तक रहना आवश्यक है।
आरती देवी जांगिड़, मेट, मनरेगा कार्य, ग्राम पंचायत कालोता। छाया का प्रबन्ध नहीं

मनरेगा कार्य स्थल पर छाया के लिए कोई प्रबंध नहीं है। श्रमिक कार्य पूरा करने के बाद पेड़ों की छाव में जैसे-तैसे करके तपन भरी धूप में तपते हुए बैठे रहते हैं।
रामबल गुर्जर, मेट, मनरेगा कार्य, ग्राम पंचायत कालोता।

Rajendra Jain
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