हिमालय दिवस पर CM ने बताया- 'कैसे बचेंगे पर्वतराज, संरक्षण की जिम्मेदारी किसकी'

हिमालय दिवस पर CM ने बताया- 'कैसे बचेंगे पर्वतराज, संरक्षण की जिम्मेदारी किसकी'
हिमालय दिवस पर CM ने बताया- 'कैसे बचेंगे पर्वतराज, संरक्षण की जिम्मेदारी किसकी'

Prateek Saini | Updated: 09 Sep 2019, 06:59:22 PM (IST) Dehradun, Dehradun, Uttarakhand, India

Himalaya Day 2019: हिमालय पर्वत जो देश को उत्तर की ओर आने वाली हानीकारक ठंडी हवाओं को बचाता है, इसके साथ पर्वतराज आयुर्वेदिक औषधियों का भंडार है, इसका भी संरक्षण आवश्यक है, सीएम ( Uttarakhand CM ) ने बताया कि...

(देहरादून,हर्षित सिंह): हिमालय के संरक्षण की जिम्मेदारी हम सबकी है। इसके लिए यहां की संस्कृति , नदियों, वनों का संरक्षण जरूरी है। जल संरक्षण व संवर्धन राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। हिमालय दिवस के अवसर पर सर्वे रोड़ स्थित डूंगा हाउस में आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने यह बात कही।


उत्तराखंड में पॉलीथीन के प्रयोग को सख्ती से रोका जाएगा। इसके साथ ही सिंगल यूज प्लास्टिक के प्रयोग को रोका जाएगा। हिमालय के संरक्षण के लिए उत्तराखंड सरकार संकल्पित है। हिमालयन यूनिटी मिशन, उत्तराखण्ड विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान केंद्र और विज्ञान भारती, उत्तराखण्ड द्वारा संयुक्त रूप से ‘‘हिमालय- विज्ञान, चिंतन व विवेचना’’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने हिमालय दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि हिमालय का राज्य देश के लिए नहीं अपितु पूरी दुनिया के महत्वपूर्ण हैं।

 

कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि जलसंरक्षण के लिए रिस्पना टू ऋषिपर्णा व कोसी नदी का पुनर्जीवन अभियान चलाए गए। इसमें बड़ों से लेकर बच्चों तक ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। इसके अलावा हर एक जिले में जिलाधिकारियों को वाटरशेड विकसित करने के निर्देश दिए गए। इस दौरान सीएम ने कहा कि पानी से पेड़ नहीं बल्कि पेड़ से पानी होता है। अगर पेड़ नहीं होंगे तो पानी भी नहीं होगा।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि आरगेनिक व प्राकृतिक खेती आज की आवश्यकता है। विगत में आयोजित हिमालयन कान्क्लेव में मसूरी संकल्प पारित किया गया था। इसमें सभी हिमालयी राज्यों ने हिमालय के पर्यावरण के संरक्षण का संकल्प लिया था।

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