
फोटो सोर्स: सोशल मीडिया, DM देवरिया
देवरिया में फर्जी वरासत के जरिए सरकारी धन के दुरुपयोग का एक पुराना मामला जांच में सामने आया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए DM दिव्या मित्तल ने संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध FIR दर्ज कराने, विभागीय कार्रवाई करने और अनियमित रूप से प्राप्त धनराशि की वसूली के निर्देश दिए हैं।
यह मामला तहसील सलेमपुर क्षेत्र के ग्राम पडरी गजराज का है। अभिलेखों के अनुसार गाटा संख्या 34 और 25 के मूल खातेदार फेकू पुत्र सुखन थे, जिनकी लगभग 30 वर्ष पूर्व मृत्यु हो चुकी है और उनके कोई विधिक वारिस नहीं बताए गए हैं।
जांच में सामने आया कि फरवरी 2024 में अनुचित लाभ प्राप्त करने की नीयत से ग्राम प्रधान इंदू देवी के पति रामप्रताप द्वारा तत्कालीन लेखपाल अजय कुमार यादव और राजस्व निरीक्षक धर्मप्रकाश सिंह के माध्यम से मृतक फेकू की कथित पत्नी के रूप में माया देवी के नाम फर्जी तरीके से वरासत दर्ज करा दी गई।
इसके बाद उक्त भूमि में से 0.0245 हेक्टेयर जमीन पंचायत भवन निर्माण के लिए मुख्य विकास अधिकारी, देवरिया के नाम 66,67,920 रुपये में बैनामा कर दी गई। वहीं राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-727बी (नवलपुर–सिकंदरपुर) परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के तहत भी माया देवी को मुआवजा राशि मिली। इस प्रकार कुल 74,03,398 रुपये की धनराशि उनके खाते में पहुंची।
मामले की शिकायत मिलने पर जिलाधिकारी के निर्देश पर उपजिलाधिकारी सलेमपुर ने राजस्व टीम गठित कर 26 व 27 फरवरी 2026 को स्थल और अभिलेखीय जांच कराई। 9 मार्च 2026 को प्रस्तुत जांच रिपोर्ट में कई गंभी। अनियमितताएं सामने आईं।
जांच में पाया गया कि माया देवी के नाम दर्ज की गई वरासत बिना समुचित जांच के की गई, जबकि मामला विवादित था। इसके बावजूद तत्कालीन लेखपाल और राजस्व निरीक्षक द्वारा वरासत दर्ज कर दी गई। साथ ही वरासत का आवेदन ग्राम प्रधान पति रामप्रताप द्वारा किया गया था, जिससे उनकी संलिप्तता भी प्रथम दृष्टया सामने आई है।
जांच में यह भी सामने आया कि पंचायत भवन के लिए प्राप्त धनराशि में से 15 लाख रुपये ग्राम प्रधान पति रामप्रताप के खाते में तथा 8 लाख रुपये सफाईकर्मी रामराज प्रसाद के खाते में स्थानांतरित किए गए।
वहीं 7 लाख रुपये सफाईकर्मी के खाते से ग्राम प्रधान के पुत्र राहुल प्रताप सिंह के खाते में भेजे गए और 1 लाख रुपये नकद दिए जाने की भी पुष्टि हुई। इन लेन-देन के संबंध में कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया जा सका।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने 10 मार्च 2026 को पारित आदेश के तहत संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश डीपीआरओ को दिए हैं। साथ ही प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए तत्कालीन लेखपाल अजय कुमार यादव को निलंबित कर दिया गया है तथा राजस्व निरीक्षक धर्मप्रकाश सिंह के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की गई है।
इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के अंतर्गत प्राप्त 7,35,478 रुपये की मुआवजा राशि की वसूली माया देवी से किए जाने के निर्देश भी दिए गए हैं। साथ ही संबंधित भूमि को राज्य सरकार में निहित करने की प्रक्रिया शुरू करने को कहा गया है।
जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने स्पष्ट कहा कि सरकारी भूमि और धन से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
Updated on:
12 Mar 2026 02:45 pm
Published on:
12 Mar 2026 02:44 pm
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