जानिए उस सांसद के बारे में जिसने पहली बार यूपी की इस सीट पर खिलाया ‘कमल’

Loksabha election 2019

देवरिया से बागी बलिया जिले तक विस्तारित सलेमपुर संसदीय क्षेत्र आजादी के बाद से कांग्रेसियों और मंडल आंदोलन के बाद से समाजवादियों का गढ़ रहा है। चार दशक तक कांग्रेस के गढ़ में तगड़ी लड़ाई लड़ने वाले समाजवादियों को वीपी सिंह के जनता लहर में ऐसी सफलता मिली तीन दशक तक उनके पास यह सीट रही। मोदी की लहर में समाजवादियों का प्रभाव थोड़ा मद्धिम पड़ा और पहली बार 2014 में इस लोकसभा क्षेत्र में कमल खिल सका। हालांकि, राजनीतिक विश्लेशक कहते हैं कि भाजपा को भी कमल खिलाने के लिए समाजवादी परिवार को जोड़ना पड़ा था। भाजपा का कमल खिलाने वाले रविंद्र कुशवाहा समाजवादी नेता हरिकेवल प्रसाद के सुपुत्र हैं। हरिकेवल प्रसाद चार बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। इस बार 2019 में भी भाजपा ने रविंद्र कुशवाहा पर ही दांव लगाया है।
वैसे, सलेमपुर संसदीय क्षेत्र की राजनीति को समझने के लिए यहां की जातिय गणित को भी समझना जरूरी है। परिसीमन के पहले तक सलेमपुर क्षेत्र में ब्राह्मण और कुशवाहा बिरादरी निर्णायक स्थिति में थी। इन दोनों जातियों के अलावा यहां राजभर, ठाकुर, यादव, दलित व मुसलमान यहां के विभिन्न विधानसभाओं में अच्छी खासी संख्या में हैं लेकिन बिना बहुलता वाली किसी एक बिरादरी के बिना वे निर्णायक भूमिका में नहीं आ सकते।

नए परिसीमन के बाद बदल गया जातिय समीकरण

राजनीतिक जानकार बताते हैं कि सलेमपुर संसदीय क्षेत्र में ब्राह्मण व कुशवाहा बिरादरी का प्रभाव रहा है। लेकिन ब्राह्मण वर्चस्व वाले बरहज क्षेत्र के नए परिसीमन में अलग हो जाने के बाद यह क्षेत्र पूरी तरह से पिछड़ों के वर्चस्व वाला संसदीय क्षेत्र बन चुका है।
हालांकि, अगर जातिय स्थिति की बात करें तो आज तक यहां सात बार कुशवाहा जाति को प्रतिनिधित्व मिला है तो पांच बार ब्राह्मण, दो बार राजभर जाति को, तो आजादी के बाद शुरूआती दिनों में भूमिहार जाति के कैंडिडेट ने बाजी मारी थी।


पांच विधानसभा क्षेत्र है सलेमपुर में
सलेमपुर संसदीय क्षेत्र में पांच विधानसभा सीटें हैं। देवरिया जिले की दो विधानसभा सीट भाटपाररानी और सलेमपुर अनुसूचित है। तो बलिया की बेल्थरा अनुसूचित, सिकंदरपुर व बांसडीह है।


चार दशकों तक कांग्रेस का रहा कब्जा

1957 में अस्तित्व में आए सलेमपुर लोकसभा क्षेत्र में पहली बार कांग्रेस के विश्वनाथ राय यहां से सांसद चुने गए। 1962 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के विश्वनाथ पांडेय सांसद बने। 1967 में भी विश्वनाथ पांडेय ने जीत हासिल की। 1971 के चुनाव में कांग्रेस के तारकेश्वर पांडेय ने इस सीट पर कांग्रेस का परचम लहराया। लेकिन 1977 में जेपी आंदोलन में यह सीट समाजवादियों के पास चली गई और बीकेडी के रामनरेश कुशवाहा को एकतरफा जीत हासिल हुई। लेकिन अगले चुनाव में जेपी के लोग बिखर गए और कांग्रेस के रामनगीना मिश्र ने इस सीट पर कांग्रेस का परचम लहराया। 1984 में भी रामनगीना मिश्र ने आसानी से यहां जीत हासिल कर ली।

इस हार के बाद कांग्रेस जीत के लिए आज भी तरस रही

1989 के वीपी सिंह की जनता लहर में सलेमपुर भी पूरे देश के साथ जनादेश देने में साथ रहा। इस सीट पर जनता दल के हरिकेवल प्रसाद ने जीत हासिल की। हरिकेवल प्रसाद ने कांग्रेस के दो बार के अजेय सांसद रामनगीना मिश्र को पटखनी दी थी। इमरजेंसी के बाद 1977 के बाद कांग्रेस की यह पहली हार थी जिसके बाद कांग्रेस इस सीट पर जीत के लिए तरस गई। 1991 में दुबारा चुनाव हुए। पूरे देश में राममंदिर निर्माण की बयार बह रही थी। लेकिन जनता दल के हरिकेवल प्रसाद इस बार भी जीतने में सफल रहे। दूसरे नंबर पर रहे भाजपा के रामविलास। 1996 में समाजवादी पार्टी के हरिवंश सहाय ने जीत का परचम लहराया। लेकिन 1998 में समता पार्टी के हरिकेवल प्रसाद फिर यहां से सांसद बने।

1999 में टूटा ब्राह्मण-कुशवाहा वर्चस्व

1999 के लोकसभा चुनाव में सलेमपुर लोकसभा क्षेत्र में पहली बार कुशवाहा- ब्राह्मण वर्चस्व टूटा। यहां से राजभर समाज का प्रत्याशी सांसद बना। बहुजन समाज पार्टी ने बब्बन राजभर को मैदान में उतारा था। राजभर ने दलित वोटबैंक को साधा और सांसद बन गए। कुशवाहा बिरादरी के दोनों प्रत्याशियों सपा के हरिवंश सहाय, जदयू के हरिकेवल प्रसाद और ब्राह्मण बिरादरी के कांग्रेस प्रत्याशी भोला पांडेय को शिकस्त का सामना करना पड़ा। 2004 में एक बार फिर हरिकेवल प्रसाद सलेमपुर से सांसद बने। वह समाजवादी पार्टी प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे और चुनाव जीत गए। दूसरे नंबर पर कांग्रेस के भोला पांडेय रहे।
2009 में बसपा ने फिर से मास्टर दांव खेला। रमाशंकर विद्यार्थी को मैदान में उतारा। रमाशंकर विद्यार्थी सांसद बने जबकि कांग्रेस के डाॅ.भोला पांडेय दूसरे नंबर पर रहे। हरिकेवल प्रसाद तीसरे नंबर पर खिसक गए।

2014 में पहली बार खिला कमल

लड़ाई से कोसो दूर रहने वाली बीजेपी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में पूर्व सांसद हरिकेवल प्रसाद के सुपुत्र रविंद्र कुशवाहा पर दांव लगाया था। बसपा ने पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के भतीजा रविशंकर सिंह पप्पू को प्रत्याशी बनाया तो सपा ने अपने पुराने साथी पूर्व सांसद हरिवंश सहाय को मैदान में उतारा। कांग्रेस का हाथ डाॅ.भोला पांडेय ने थामा था। लेकिन मोदी लहर में पहली बार सलेमपुर क्षेत्र की जनता ने अपने चार बार सांसद रहे पूर्व सांसद समाजवादी नेता हरिकेवल प्रसाद के परिवार पर भरोसा जताया और भाजपा प्रत्याशी के रूप में उतरे पूर्व सांसद के पुत्र रविंद्र कुशवाहा को भारी मतों से चुनाव जीता दिया। रविंद्र कुशवाहा सांसद बनने के साथ ही पहली बार सलेमपुर में कमल खिला चुके थे। रविंद्र कुशवाहा को 392213 मत मिले तो दूसरे नंबर पर रहे बसपा के रविशंकर पप्पू 159871 मत तो सपा के हरिवंश सहाय को 159688 वोट मिले। कांग्रेस के डाॅ. भोला पांडेय का बुरा हश्र इस चुनाव में हुआ, जनता ने उनको महज 41839 वोट दिए।

2014 में सुहेलदेव भासपा ने भी काफी वोट काटे

2014 के लोकसभा चुनाव में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी ने भी प्रत्याशी उतारे थे। इस चुनाव में भासपा प्रत्याशी ओम प्रकाश राजभर को 66084 वोट मिले और वह चैथे नंबर पर रहे। उनको कांग्रेस प्रत्याशी से अधिक वोट मिले थे।

BJP
धीरेन्द्र विक्रमादित्य
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