नदियों के जलस्तर में तेजी से दहशत में ग्रामीण

नदियों के जलस्तर में तेजी से दहशत में ग्रामीण
River

नेपाल से सटे ज्यादातर जिलों में आगामी 48 घण्टों में भारी बारिश की चेतावनी जारी

देवरिया. मानसून की बारिश शुरू होते ही नदियों के जलस्तर में तेजी देखी जाने लगी है। नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश की सूचना मात्र से नदियों से सटे जिले के कई इलाकों के ग्रामीणों के बीच दहशत का माहौल व्याप्त हो गया है। वैसे तो प्रदेश की नई योगी सरकार ने अस्तित्व में आने के साथ ही बाढ़ से बचाव के उपायों के बारे चर्चा शुरू कर दी थी लेकिन बांधों के रख रखाव पर किए जाने वाले कार्यों में कोई तेजी नही देखी गयी।


जिले के तीन तहसील क्षेत्रों भाटपाररानी, बरहज और रुद्रपुर में बाढ़ की विभीषिका देखी जाती रही है। भाटपाररानी में छोटी गण्डक और खनवा नदी का प्रभाव दिखता है तो रुद्रपुर में गोर्रा और राप्ती अपने जल प्रभाव से ग्रामीणों को विचलित करती है। वहीं बरहज में विशालकाय रूप धारण करने वाली घाघरा और सरयू नदी का संगम स्थल है।


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नदियों के पुराने इतिहास पर नजर डालें तो पता चलता है कि भाटपाररानी में 1993, 1995 और 2003 में बाढ़ का ज्यादा प्रकोप था। 1995 में इस इलाके के लगभग 250 गांव में तबाही का मंजर था। रुद्रपुर की बात करें तो इलाके के कुल 116 गांव बाढ़ प्रभावित माने जाते हैं, जिनमे दोआब क्षेत्र के 52 और कछार क्षेत्र के 64 गांव शामिल हैं । यहां 1998 और फिर 2001 में नदियों के बढ़े जल स्तर के कारण बाढ़ का रौद्र रूप सामने आया था।


पिछले दिनों हुए तबाही में रुद्रपुर क्षेत्र का करहकोल, मांझा नारायण, पाण्डेय बाज़ार हाटा, मांझा राजभर, गायघाट आदि गांव को राप्ती नदी ने अपने आगोश में समेट लिया था, वहीं बरहज का कुरह परसिया गांव 2015 में नदी में समा गया। काफी दिनों तक गांव के लोगों को अपने सामानों के साथ बांधों और सरकारी स्कूलों में शरण लेना पड़ा था।


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वैसे तो सरकारी तौर पर हर साल बांधों के रखरखाव के बड़े बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन नदियों का जलस्तर बढ़ते ही सारा दावा पानी के दबाव में ही बह जाता है। बाढ़ के कंट्रोल रूम की भी स्थापना की गई है, लेकिन वहां किसी जिम्मेदार की नियुक्ति नही होने से बैठने वाला ऑपरेटर कोई महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध ही नहीं करा पाता है । फिलहाल नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश होने की सूचना प्राप्त हो रही है। मानसून विभाग ने पड़ोस के कुशीनगर सहित नेपाल से सटे ज्यादातर जिलों में आगामी 48 घण्टों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है । जिले में भी मानसूनी बारिश का प्रभाव देखने को मिल रहा है, ऐसे में यदि नेपाल अपने यहां होने वाली बारिश के पानी को नदियों में छोड़ता है तो निश्चित रूप से जिले के तीनों प्रभावित तहसील क्षेत्रों में बाढ़ का असर देखा जा सकता है। 
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