शौचालय के लिये बहू ने छोड़ दिया पिया का घर

विदाई के लिेये थाने में हुई पंचायत, शौचालय निर्माण नहीं होने तक ससुराल मेंं कदम ना रखने की जिद पर अड़ी रही विवाहिता, जिलाधिकारी ने दिया जांच का आदेश

By: Ashish Shukla

Published: 12 Nov 2017, 06:37 PM IST

देवरिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वप्निल अभियान स्वच्छ भारत अभियान की सफलता के लिये देश एवं प्रदेश की सरकारें दावे तो खूब करती हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में हकीकत कुछ और ही है। प्रधानमंत्री मोदी एवं देश के सबसे बड़े सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जिस पूर्वांचल से चुनकर सदन में पहुंचते हैं, उस पूर्वांचल की जमीनी सच्चाई यही है कि आज भी ग्रामीण इलाकों में ऐसे परिवारों की बहुतायात है जिनके घर शौचालय का निर्माण नहीं हुआ है। एक तरफ सरकार खुले में शौच नहीं जाने के लिये जागरूक करने के नाम पर पानी की तरह पैसा बहा रही है, वहीं जनपद की एक बेटी ने शौचालय का निर्माण नहीं होने तक पिया का घर छोड़कर मायके को ही अपना ठिकाना बना लिया है। वह शौचालय का निर्माण कराये जाने पर ही ससुराल में कदम रखने की जिद पर अड़ी है।
जनपद के मदनपुर थाना क्षेत्र के ग्राम समोगर निवासी सोनू की 15 मई 2014 को गोरखपुर जनपद के झंगहा थाना क्षेत्र के ग्राम ब्रह्मापुर निवासी विंध्याचल गुप्त के पुत्र चंदन से हुई थी। वह शादी के बाद जब ससुराल पहुंची तो शौचालय न होने के कारण उसे शौच के लिए बाहर जाना पड़ा। इससे नाराज होकर वह अपने मायके मदनपुर थानाक्षेत्र के ग्राम समोगर आ गई। पति ने शौचालय बनवाने का अश्वासन दिया, लेकिन समय बीतता गया और पति का वादा महज वादा बनकर रह गया। वह फिर अपने मायके चली आई और शौचालय का निर्माण नहीं होने तक ससुराल जाने से साफ मना कर दिया।

 


थाने में हुई पंचायत, रही बेनतीजा
सभी कोशिशें बेकार होती देख पत्नी की विदाई के लिये चंदन अपने परिजनों के साथ मदनपुर थाने पहुंच गया और थानाध्यक्ष से पत्नी की विदाई कराने के लिये हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई। थाने पर घंटों पंचायत हुई, परंतु पंचायत बेनतीजा रही। सोनू शौचालय का निर्माण होने के बाद ही पति के साथ जाने की जिद पर अड़ी रही। पति ने दूसरी शादी करने की भी धमकी दी, लेकिन वह अपने निर्णय पर अडिग रही।

 


अर्थाभाव में नहीं हुुुुआ शौचालय का निर्माण
सोनू के पति चंदन ने शौचालय का निर्माण नहीं करा पाने के पीछे अर्थाभाव को मुख्य वजह बताया। चंदन ने बताया कि भूजा बेचकर जैसे-तैसे परिवार का भरण-पोषण कर रहा हूं। शौचालय निर्माण के लिये जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासनिक अधिकारियों से कई बार गुहार लगाई, लेकिन कोई सहयोग नहीं मिला।

 


जिलाधिकारी ने दिया जांच का आदेश
गोरखपुर के जिलाधिकारी राजीव रौतेला ने कहा कि इसकी जांच एवं त्वरित कार्रवाई का आदेश दे दिया गया है। डीपीआरओ को जांच की जिम्मेदारी दी गई है। उन्होंने कहा कि शौचालय के अभाव में पति-पत्नी का संबंध विच्छेद ना हो, इसके लिये जिला प्रशासन सार्थक पहल करेगा।

 


शौचालय निर्माण नहीं, प्रचार पर है सरकार का ध्यान
शौचालय ना होने की वजह से विवाहिता द्वारा ससुराल में रहने से इनकार किये जाने का मामला सामने आने के बाद स्वच्छ भारत अभियान को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आने लगी हैं। अधिकांश लोग सरकार को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि सरकार केवल प्रचार पर ध्यान दे रही है। प्रचार पर जितना खर्च किया जा रहा है, उसकी आधी रकम भी शौचालय निर्माण पर खर्च किया जाए तो तस्वीर अलग होगी।

Ashish Shukla
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