भाजपा पार्षद ने कहा- बिना एमआईसी में लाए कैसे बढ़ा दिया किराया...महापौर बोले- हर बार एमआईसी में लाने की जरुरत नहीं..

भाजपा पार्षद ने कहा- बिना एमआईसी में लाए कैसे बढ़ा दिया किराया...महापौर बोले- हर बार एमआईसी में लाने की जरुरत नहीं..
patrika

mayur vyas | Publish: Jul, 20 2019 11:20:19 AM (IST) Dewas, Dewas, Madhya Pradesh, India

रोप-वे से माता टेकरी आने-जाने के अब लगेंगे ११८ रुपए, पहले था ८४ रुपए किराया
महापौर और तत्कालीन कमिश्नर ने दी रेट बढ़ाने को स्वीकृति, अब उठे विरोध के स्वर

देवास. माता टेकरी पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शुरू किए गए रोप-वे का किराया बढ़ चुका है। अब आने-जाने के ११८ रुपए देने होंगे। मूल किराया ९७ रुपए हैं। शेष जीएसटी है। रेट बढ़ाने के मामले में भाजपा पार्षद विरोध जता रहे हैं। पार्षद का कहना है कि बिना एमआईसी में लाए, परिषद में चर्चा किए रेट कैसे बढ़ा सकते हैं। विरोधस्वरूप पत्र लिखा गया है। महापौर ने इसे नियम सम्मत बताया है और कहा है कि काफी विचार-मंथन के बाद रेट बढ़ाने का निर्णय लिया है।
दरअसल जनता की सुविधा के लिए दो साल पहले रोप-वे शुरू किया गया था। शुरू होने के बाद से ही यह विवादों में घिरा था क्योंकि श्रेय लेने की राजनीति शुरू हुई थी। बाद में जब मामला थमा और काम ठीक चलने लगा तो जनता को कुछ राहत मिली। खासकर वे लोग जो शारीरिक रूप से अक्षम हैं और टेकरी नहीं जा पाते थे उन्हे ंरोप-वे के बाद आसानी हुई। बीओटी पैटर्न पर यह रोप-वे शुरू किया गया था। इसका किराया ७० रुपए और जीएसटी अलग था। इस लिहाज से अब तक लोगों को आने-जाने के लिए ८४ रुपए देने पड़ते थे, लेकिन जुलाई से इसका किराया बढ़ चुका है। अब ११८ रुपए लगेंगे।
कैसे बढ़ा दिया किराया
रोप-वे का किराया बढऩे के बाद से विरोध शुरू हुआ है। परिषद भाजपा की है और भाजपा के पार्षद ही विरोध कर रहे हैं। विरोध की वजह यह है कि बिना एमआईसी में लाए किराया कैसे बढ़ा दिया। पार्षद अर्जुन चौधरी ने बताया कि नियम यह है कि एमआईसी में विषय रखा जाना चाहिए। इसके बाद परिषद में उस पर चर्चा होती है। वहां तय होता है कि क्या करना है। ये तो पूरी तरह गलत है कि एकदम से किराया बढ़ा दिया जाए। मैंने जब पता लगाया तो जानकारी मिली कि पूर्व कमिश्नर नरेंद्र सूर्यवंशी के समय ऐसा हुआ है। इसके बाद वर्तमान कमिश्नर से बात की। महापौर को भी पत्र लिखा है।
महापौर-आयुक्त ने किए दस्तखत
नेता सत्ता पक्ष मनीष सेन ने कहा कि नियम तो यही है कि इसे एमआईसी में लाना चाहिए। परिषद में लाना चाहिए। पहली बार भी ऐसा ही हुआ था। जब पहली बार में परिषद में लाने के बाद रेट बढ़ाए थे तो अब किस अधिकार से बिना विचार किए रेट बढ़ा दिए। महापौर और तत्कालीन कमिश्नर ने दस्तखत किए हैं। दोनों की स्वीकृति से हुआ है। एमआईसी सदस्य इसका विरोध कर रहे हैं। सार यही है कि जनता की सुविधा को देखते हुए सबसे चर्चा के बाद जनहित में निर्णय लिए जाने चाहिए।
कंपनी को हो रहा था नुकसान
महापौर सुभाष शर्मा ने कहा कि रोप-वे तीस साल की लीज पर है। एमआईसी-परिषद की जरुरत नहीं है। पहली बार में एग्रीमेंट हुआ था। स्वीकृति हुई थी तो एमआईसी और परिषद में मामला गया था। हर बार एमआईसी और परिषद की जरुरत नहीं है। रोप वे संचालन करने वाली कंपनी ने १२ बार हमको लेटर दिया कि बहुत नुकसान हो रहा है। मेंटेनेंस बहुत है। कर्मचारी का खर्च नहीं निकल पा रहा। हर माह एक लाख रुपए का बिजली बिल आ रहा है। दो साल में कितना मुनाफा हुआ कितना नुकसान हुआ यह सब हमको दिया है। इसके बाद हमने दूसरी जगहों के रोप वे की टिकट मंगवाई। इस पर गहन चिंतन किया। आखिरी में रेट बढ़ाना तय हुआ। कंपनी की ओर से कहा गया था कि १२५ रुपए किराया और जीएसटी अलग हो लेकिन हमने जीएसटी सहित ११८ रुपए किराया रखने की मंजूरी दी। शिवाजी पार्क का मेंटेनेंस भी कंपनी को करना है। हमारा सोचना है कि यदि योजना शुरू की है तो उसे धक्का नहीं मारना, अच्छे से चलाना है। दो साल में वैसे भी किराया बढ़ाने का नियम है। जो विरोध कर रहे हैं उनको असलियत पता ही नहीं है।

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